#Kavita by Ajeet Singh Avdan

भउजाई

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महतारि बनी जे भउजाई,उन पाँवन सीस नवाइ धरो ।

लछमण देवर कै सुधि लइके,भउजाइन कर सम्मान करौ ।।

अति-भाग बने यहि देहीं के,अग्रज अँगुरी कर मा पकरो ।

बड़के जेकर पहिचानि बने,उनकर दुल्हिनि कर मान करो ।।

 

विधना तन के सब नातन मा,इक नात इहौ बड़ नीक धरें ।

निज-धाम गए अम्मा-बाबू,भइया-भउजी निर्भीक करें ।।

कबहुँक लाडन मा दुलरावैं,कबहुँक अनुसासन तीत करें ।

अवदान न रोष भरोस डिगै,सगरौ विपदा सदमीत हरें ।।

 

अवदान शिवगढ़ी

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