KAVITA BY Mithilesh Rai ( Mahadev )

–       – जब कभी!

जब कभी तुझको देखता है कोई!
बेचैनियों के आलम से गुजरता है कोई!
बचेगा किसतरह तड़पना किसी निगाह का?
लरजते धूप सी तपन से पिघलता है कोई!

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