0203 – Brij Vyas ( Bhagwati Prasad Vyas “Neerad” )

Kavita :

” घनेरी जुल्फें
घटा सी छाई ” !!

हवा में नमी है ,
बिखरी है खुशबू !
मौसम है बहका ,
जगा ऐसा जादू !
गज़ल सी काया –
अदा रुबाई !!

बंद हैं पलकें ,
राज़ हैं गहरे !
अधर पाँखुरी से ,
हैं गात रूपहरे !
निखरा है यौवन –
लिए अंगड़ाई !!

खुद में हो खोये ,
कैसा सितम है !
तलाश ये कैसी ,
बिसुरे से हम हैं !
डूबो न ज़्यादा –
लिए गहराई !!

बेखबर से तुम ,
बाख़बर हैं हम !
चाहतों के दौर ,
ना होगें ख़तम !
मुस्कराये तुम –
निधियाँ पाई !!


Kavita :

” धर्म हमारा बड़ा लचीला ”

मन्त्रों में , वेदों में है वो ,
पत्थर की मूरत में है वो |
ना मानो तो निराकार है ,
मानो तो घट घट में है वो |
नहीं बंदिशों में बाँधा है –
सचमुच है यह बड़ा रंगीला ||

मात-पिता हैं तीरथ जैसे ,
गुरुजनों की बात निराली |
दुखीजनों की पीड़ा समझी ,
टल जाती ग्रह दशा हमारी |
साधु-संतों ने ज्ञान दिया है –
अंतर्मन का चोगा ढीला ||

परिवर्तन स्वीकार किये हैं ,
धर्म ने अंगीकार किये हैं |
सामाजिक बदलाव के चलते ,
बदले से व्यवहार किये हैं |
कई जगह उपहास हुए हैं –
क्यों नहीं है, यह हठीला ||

सच, नई-नई बेला है आई ,
नारी जागृति की अंगड़ाई |
दर्शन की बस होड़ लगी है ,
पुरुष खड़े ले रहे जम्हाई |
न्यायालय , भारी धर्म पर –
कैसा है यह ,हंसी -ठिठौला ||

सेवा में धर्म बस हम जाने ,
कर्मों से हम गये पहचाने |
नया -पुरातन रखा सामने ,
खोते जा रहे ठौर -ठिकाने |
कातर धर्म खड़ा कोने में –
बदल रहा है पल-पल चोला ||


Kavita :

” आंखें मुन्द रही हैं ,
प्यार में ” !!

कल्पनाएं मधुर ,
पलकों पर विराजी !
सिमटी लाज में ,
काया कसमसाती !
कनक आवरण सजा –
खुमार में !!

मुस्कराना नाम ,
तेरे कर दिया है !
खुशहाली को ,
एक नया घर दिया है !
भावनाएं रंग भरे –
मनुहार में !!

नज़राना मिला ,
मीठी सी ठगी का !
इतराना हुआ ,
मेरी बन्दगी का !
तर-बतर मन हुआ –
पुकार में !!


Kavita :

” लहरों का किलोल ,
मन को भाता है ” !!

भीड़भाड़ हो ,
या तनहा हों !
सुख के पल हों ,
या दुखवा हो !
इन टूट रहे ,
तटबन्धों से !
सच दिल अपना –
जुड़ सा जाता है !!

रंग बिरंगे से ,
परिधान सजे !
तन मन उठती ,
ज्यों लहरें हैं !
गहरा अन्तस –
कई ज्वार उठे !
सागर से दिल का –
गहरा नाता है !!

गहराई पर ,
यों पहरे हैं !
अब गहरे जख्म ,
हुए गहरे हैं !
चाक कर रहे ,
सीना अब तो !
गहरापन ही सबको –
लहरा जाता है !!


Kavita :

“सांझ देखो खिलखिलाई है !
अरुणिमा अम्बर पे छाई है ” !!

थका हारा दिन ,
हो गया है पस्त !
रात की जवनिया ,
है सदा अलमस्त !
सृजन की चाहतें –
भोर होते मुस्कराई हैं !!

चित्र खींचे जो ,
परिश्रम तूलिका है !
जो किया हासिल ,
स्वप्न भूमिका है !
उपलब्धियों ने फिर –
खुशियां थपथपाई हैं !!

डरे हुऐ हम ,
अनिश्चय ने छला !
जुटा ली हिम्मत ,
बहुत कुछ है टला !
हमकदम का साथ –
ज़िन्दगी गुनगुनाई है !!

साथ ना छूटे ,
इतनी सी ठानी है !
दौड़ समय की ,
हमसे सयानी है !
कल क्या होना –
उम्मीदें कसमसाई हैं !!


Kavita :

” उठे हिया में हिलोर ” !!

***

द्वार पे आकर ,
लौट गये तुम !
उम्मीदें सब यों ,
हो गई गुमसुम !
सजे धजे अरमान –
ढूंढे प्यार का छोर !!

स्वप्न सजे फिर ,
बिखर गये हैं !
हम तो हर पल ,
सिहर गये हैं !
अकुलाया मन चाहे –
परिवर्तन का दौर !!

दिन दिशा बदले ,
हम सोचते यही !
खुशियों का नर्तन ,
फिर होगा सही !
बिसुरा नहीं पाओगे –
है चाहत पुरजोर !!


Kavita :

” सर्र से , आँचल –
सरकता जाये है ” !!

छट गये ,
बादल गम के !
होश खो बैठे ,
कसम से !
राह चलता कारवां –
मुझको बुलाये है !!

जाने कब ,
नज़रें मिली थी !
यादें लेकिन ,
चुलबुली थी !
सरसराती हवाऐं –
महकी जायें हैं !!

एक नज़र ,
झलक पा के !
हम तो गये ,
इठला से !
लाज आंखों में बसा –
हम मुस्कराये हैं !!

फिर मिलें ,
वादा ये करना !
वक़्त से भी ,
थोड़ा डरना !
हाथ अपने कुछ नहीं –
चाहत जगाये हैं !!


Kavita :

” हो गये पल में पराये ‘ !!

नेह के धागे बन्धे थे ,
द्वार खुशियों से सजे थे !
बचपन की यादें सुहानी ,
अंखियों में वे रतजगे थे !
जाने कैसी घड़ी आयी –
बोल बागी नज़र आये !!

झनझना कर तार टूटे ,
रिश्ते लगे बेकार झूंठे !
टूट कर चाहा था जिनको ,
ले अहं का भाव रूठे !
महके महके ख़्वाब टूटे –
पलकों पे ना संवर पाये !!

जब कभी शीशा दरका ,
उसकी कोई ना सुनता !
दूसरा सजने को आतुर ,
जो टूटा , टूटा औ बिखरता !
वक़्त बांधे ना बंधे है –
बनते बिगड़ते अपने साये !!


Kavita :

” हम तो तुम्हरे दास हो गये ” !!

कमर कटीली ,
भुजदंड कसे !
है रूपगर्विता ,
मद छलके !
नटखट नज़रें ,
हमें छू गई –
हम खुशियों के पास हो गये !!

अरुणिम अधर ,
बोल मीठे !
यौवन के हैं ,
तीर कसे !
आँचर का यों ,
पल्लू थामा –
हम आम थे खास हो गये !!

गहनों का भी ,
भार लदा !
खुशियों ने है ,
तंज़ कसा !
वक़्त देखकर ,
फेरी नज़रें –
हम सचमुच उदास हो गये !!


Kavita :

” कितना और सजोगी ” !!

नख से शिख ,
अलंकरण है !
सजे सजे से ,
तन मन हैं !
नज़रों से ऐसा –
बाँधा है ,
जादू है या
वशीकरण है !
अधरों पर है ,
मूक निमंत्रण –
कितना और हंसोगी !!

रूप रंग है ,
आँचल फहरा !
नागिन लट हैं ,
काजल गहरा !
गंध सुगंध यों –
लहर गई ,
जागा ऐसा ,
भाव रूपहरा !
मौसम बहका ,
भरमाने को –
कितने स्वांग रचोगी !!

रात दिवस अब ,
हुए सुहाने !
लबों पे मीठे ,
प्रेम तराने !
आसमान भी –
रंग बिखेरे ,
इंद्रधनुष को ,
ख़ुशी में ताने !
अलबेली सी ,
सभी अदाएँ-
कितना और छलोगी !!


Geet :

सच तुम रूठ जाओ तो
मनाने का मज़ा कुछ और है !!

बातों बातों में ठुनकना !
होठों से निर्झरणी बहना !
भूकम्प के झटके से लगते
भरभरा चीजों का गिरना !
उस बिगड़े सन्तुलन का –
जब तब दिखता नहीं कोई ठौर है !

भाल की बिंदी बिदकना
और जुल्फों का बिखरना !
चूड़ियां ऊपर को चढ़ती
पल्लू का वो कमर कसना !
चिंगारियां आँखों में भड़के –
बस कब थमे, कब रुके यह दौर है !

हथेलियों का रगड़ खाना
मुठ्ठियों का बंध ही जाना !
तमतमाये गाल हों और
मुस्कराकर ख़म दिखाना !
इस वीरांगना के स्वागत में –
बस मुस्कराने का मज़ा कुछ और है !!

समर्पण मुझको है करना
कानों को है बन्द रखना !
घिरी है सावन बदरिया
भीगने से अब क्या डरना !
बिजलियाँ चमके तो चमके –
रिमझिम रिमझिम बूंदों का ही शोर है !!


Geet :

हम तुम
रंग गये हैं ,
एक ही रंग में !

अबीर है गुलाल है ,
बहकी हुई चाल है !
पीली भंगिया कहीं ,
सुरूर है , धमाल है !
तन मन भीगे हुए हैं –
किसी तरंग में !!

अमीर हैं गरीब हैं ,
दूर ना करीब हैं !
भेद कहीं आज नहीं ,
जगे सब नसीब हैं !
खुशियों का नर्तन है –
उत्सव संग में !!

धमाल है बवाल है ,
उठे कहीं सवाल हैं !
है मस्तियाँ चढ़ी कहीं ,
चुप्पियां बदहाल है !
पल्लवित है आशाएं –
नई उमंग में !!

शिकवा है मितवा है ,
नेता है फितवा है !
है कोई मलाल नहीं ,
सबका मन रितवा है !
रंग से परहेज नहीं  –
ऐसे रंग में !!


Geet :

गुलाल है ,
धमाल है ,
कहिये क्या –
ख़याल है !!

रंगों की महफिल ,
डूबे डूबे से हैं !
सब अपने लगते ,
रंग अजूबे से हैं !
रंग उड़ाया  ऐसा –
मची धमाल है !!

भारी है हुड़दंग ,
मस्ती यहाँ वहां !
अब परवाह किसे ,
कोई गुमाँ कहाँ !
खुशियां काँधे चढ़ी –
करे सवाल है !!

तुमको रंगना है ,
अब गहरे रंग से !
दूजा रंग चढ़े ना ,
प्रीत बढ़े ढंग से !
दुनिया बढ़ी अजूबी –
रोज़ बवाल है !!

350 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *