0222 – Asha Shailly

Gazal :

सहर का ख्वाब टूटा देखने को
चले आए तमाशा देखने को
उन्हेँ खुद पर गुरूरे जुस्तजू था
जमाना भी लगा था देखने को
सितारे किसके टूटे आसमां से
शहर उमड़ा पड़ा था देखने को
हमारे दर्द की हद है कहाँ तक
दरीचा खुल गया था देखने को
अब आगे हो कोई आहो-फुगां क्यों
खड़ा सैय्याद चेहरा देखने को
छुपी आँखों में कितनी तिश्नगी थी
न पैमाना कोई था देखने को
कलम की नोक कैसे कुंद होती
हमारे पास दम था देखने को
हसीनो की कबा की क्या कहें अब
बदन उघड़ा है सारा देखने को


Gazal :

ज़रा रुक सको तो सहर देख लेना
सितारों से बरसा हुनर देख लेना

थकोगे यकीनन वो लम्बा सफर है
घना राह में इक शजर देख लेना

कहाँ तक उड़ोगे, तुम्हें कुछ पता है
कभी अपने भी बालो-पर देख लेना

नसीबों में हर इक के होता नहीं है
रश्तिे-सा कोई बशर देख लेना

कहीं पर समन्दर, कहीं ऊचे परबत
मुकद्दर में है ये मगर देख लेना

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