0225 – Parul Singh

Shayari :

“शायरी नहीं लिखते
बस पेगाम लिखते है,
क्या पता
किसी के पास उनका पता मिल जाए कभी ।”


“अब नहीं जागूँगी
मैं सो जाऊँगी,
ख़्वाबों को भी तो हक़ है तेरे एहसासों का।”


Shayari :

“मैं कहु
तुम समझो
तुम कहो और मैं ना समझू
तभी तो शरारत का सिलसिला बरक़रार रहेगा।”
पारुल सिंह


Shayari :

“रुक जाओ
संभल कर चलना
आगे इश्क़ बैठा है
टकरा गए उससे तो
खामखां मोहब्बत हो जाएगी।”
पारुल सिंह


Shayari :

“उन्होंने कहा कि हम लिखते अच्छा है,
हमने कहा
अजी ये तो बस एहसासों का दर्पण है।”
पारुल सिंह


Shayari :

“आज शायद बरसेंगे नहीं
रूठें हैं ना ये बदल
मैं हर बार इन्हें तेरे आने की झूठी ख़बर जो देती हु।”
पारुल सिंह


Shayari :

“धड़कन, ख़ुशबू, साँसे
सब ही तो यही है तुम्हारी,
फिर क्यूँ बार बार तेरे आने की राह पर आँखे टिकाए रहते है।”
पारुल सिंह


Shayari :

“मुझे हर बार तुमसे दूर जाने की वजह नहीं मिलती,
और पास आने का बहाना ढूंढ़ना नहीं पड़ता।”
पारुल सिंह


Shayari :

“आज भी बारिश है,
आज भी बादल काले है,
बस महसूस करने और देखने का नज़रिया बदल गया।”
पारुल सिंह


Shayari :


“मेरी यादों की आँखों में तुम्हारा ख़्वाब पलता है,
ज़रा सी रोशनी कर दो तो हक़ीक़त में बदल  जाए।”
पारुल सिंह

Shayari :


“कितनो को है आज कल फ़िट्नेस की भूख लगी,
क्या होगा उसका जिसके पास एक वक़्त की रोटी भी नहीं।”
Parul Singh

Shayari :


“अरसे बाद एक बूँद माथे पर गिरी थी बारिश की,
रुकी तक नहीं एक लम्हा भी,
उसको जल्दी थी मंज़िल तक जाने की।”
Parul Singh

Shayari :


“उसकी ख़ामोशी को हर बार सुना था मैंने,

पर मुझे भी तो हक़ था ख़ामोश रहने का।”
पारुल सिंह

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