0225 – Parul Singh

Lekh :

‘आशा की टॉयलेट कथा’

हाल ही में हुई एक घटना से आपको रूबरू करवा रही हूँ और हो सकता है की आप भी कभी ऐसी ही परिस्थितियों से गुजरे हो|

एक महिला आशा जिसने एक प्रतिष्ठित कम्पनी में उच्च पद पर कार्यभार संभाला| वेतन बहुत ही अच्छा और महिला की अपेक्षा के अनुरूप था| अपने अनुरूप पद और वेतन पाकर महिला बहुत खुश थी| परन्तु अचानक ऐसा क्या हुआ की सिर्फ चार दिन बाद ही उसने कम्पनी से इस्तीफा दे दिया?

हर देशवासी के बहुत सारे अधिकार और हक ऐसे होते है जो उनको मिलने ही चाहिए उनमें से एक अधिकार है एक ‘स्वच्छ टॉयलेट’ | हाल ही में अक्षय कुमार और भूमी की फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ को देखने के बाद वो फिल्म महज दो दिन के अंतराल में ही दिमाग से उतर गयी परन्तु उस फिल्म की सबसे ज्यादा अहम् भूमिका तब सामने आई जब आशा के साथ ये घटना घटी|

आशा जब पहले दिन अपने कार्यस्थल पहुचीं तो नयी उमंग और जोश के साथ कार्य के अवलोकन में लग गयी | जैसे जैसे कुछ समय बीता उसको दैनिक कार्यों के लिए ‘शौचालय’ का रास्ता खोजना पड़ा| जब उसने उस प्रतिष्ठित कम्पनी का ‘शौचालय’ देखा तो उसमें मूलभूत सुविधाएँ ही नहीं थी| एक दिन कैसे भी करके आशा ने समय निकला| दूसरे दिन वही समस्या सामने खडी थी| अच्छा पद , अच्छा वेतन परन्तु कुछ मूलभूत सुविधाओं की कमी| इस बात से आशा ने कार्यालय के लोगो को अवगत कराया परन्तु कोई हल नहीं निकला|

कम्पनी जॉइन करने के चार दिन बाद ही आशा की तबियत बिगड़ने लगी और इसके चलते उसने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया| लेकिन कितनी ही आशाएं ऐसी जो रोज इस समस्या से लड़ती है और एक साफ़ शौचालय व उसमें मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसती है|

आशा जो की एक सम्रध परिवार से आई थी उसके लिए उस नौकरी से इस्तीफा देना शायद कोई बड़ी बात नहीं रही होगी परन्तु क्या एक प्रतिष्ठित कम्पनी के मालिक का ये कर्तव्य नहीं बनता की लम्बे अरसे से उनके कार्यस्थल में जिन मूलभूत सुविधाओं की कमी है उनको पूरा करें|

जिस भी कम्पनी में फीमेल्स(महिलाएं) कार्य करती है वहां उनके लिए कुछ ज़रूरी सुविधाएँ होनी ही चाहिए| और इसके लिए एक फीमेल(महिला) को ही आवाज़ उठानी होगी| ऐसा नहीं है की एक पुरुष को स्वच्छ शौचालय की ज़रूरत नहीं है परन्तु एक स्त्री को कुछ ज़रूरी सुविधाएँ देना अति आवश्यक है|

एक स्वच्छ और सुन्दर वातावरण सभी अपने आस पास चाहते है| आज देशभर में स्वच्छता अभियान का बिगुल बजा  है|  हमारी वर्तमान सरकार इस अभियान में पूर्ण रूप से जुटी हुई है परन्तु सिर्फ कागजी अभियान से काम नहीं चलता | हरएक देशवासी को इस स्वच्छता मिशन में सहयोग देना होगा तभी जा कर हम अपने देश को साफ़ और सुंदर बना पाएंगे|

सरकार से एक अनुरोध है कि स्वच्छता का अभियान तो छेड़ दिया परन्तु जो शौचालय आपके द्वारा बनवा दिए गए है उनकी सफाई का अभियान भी छेड़ा जाये| और सभी कार्यालय चाहे वो सरकारी हो या प्राईवेट सभी में शौचालय की स्थिति के अवलोकन के लिए एक दल बनाया जाये और हर जगह की सफाई व्यवस्था के दौरे के साथ साथ शौचालय में मूलभूत सुविधाओं का दौरा भी कराया जाये|

धन्यवाद,


Shayari:

कहो तो आज ही इस बेनाम से एहसास को दफ़न कर दूँ

कहो तो आज ही यादों के सफ़र को ख़त्म कर दूँ

कहो अगर तो आज ही अपने ख़्वाबों से तुम्हारे किरदार को अलविदा कर दूँ

कहो ना तुम की भूल जाए तुमको और हमेशा के लिए खुदा हाफ़िज़ कह दूँ

Parul


Shayari :

“क्यूँ भूले बताओ तुमको,
इश्क़ हो तुम कोई भूल नहीं।”

“मेरी आदतों से निकल जाओ जल्दी तुम,
या फिर मेरे जिस्म की बन जाओ धड़कन तुम।”

“मुझे भूल जाओ
या भूलाने दे तुमको,
अब रोज़ रोज़ का इंतज़ार अच्छा नहीं लगता।”


Shayari :

“काश ये इंतज़ार थोड़ा कम हो जाए,
बहुत अरसा हुआ है,
बारिश में ख़ुद को पिघलाए हुए।”

**

“रोज़ाना तेरे आने की खनक सी आती है,
पर ये तो मेरे दिल के टूटने की आवाज़ है,
तेरे आने की नहीं ।”


Shayari :

“मुझे नफ़रत है तुमसे इस क़दर ए यादों,
की तुम आती तो रोज़ हो ,
पर उनको साथ नहीं लाती।” 😢


“रात को देखा है सोते हुए कभी?
इसने भी सिखा है जागना मेरी आँखों से ही।”


Shayari :

“शायरी नहीं लिखते
बस पेगाम लिखते है,
क्या पता
किसी के पास उनका पता मिल जाए कभी ।”


“अब नहीं जागूँगी
मैं सो जाऊँगी,
ख़्वाबों को भी तो हक़ है तेरे एहसासों का।”


Shayari :

“मैं कहु
तुम समझो
तुम कहो और मैं ना समझू
तभी तो शरारत का सिलसिला बरक़रार रहेगा।”
पारुल सिंह


Shayari :

“रुक जाओ
संभल कर चलना
आगे इश्क़ बैठा है
टकरा गए उससे तो
खामखां मोहब्बत हो जाएगी।”
पारुल सिंह


Shayari :

“उन्होंने कहा कि हम लिखते अच्छा है,
हमने कहा
अजी ये तो बस एहसासों का दर्पण है।”
पारुल सिंह


Shayari :

“आज शायद बरसेंगे नहीं
रूठें हैं ना ये बदल
मैं हर बार इन्हें तेरे आने की झूठी ख़बर जो देती हु।”
पारुल सिंह


Shayari :

“धड़कन, ख़ुशबू, साँसे
सब ही तो यही है तुम्हारी,
फिर क्यूँ बार बार तेरे आने की राह पर आँखे टिकाए रहते है।”
पारुल सिंह


Shayari :

“मुझे हर बार तुमसे दूर जाने की वजह नहीं मिलती,
और पास आने का बहाना ढूंढ़ना नहीं पड़ता।”
पारुल सिंह


Shayari :

“आज भी बारिश है,
आज भी बादल काले है,
बस महसूस करने और देखने का नज़रिया बदल गया।”
पारुल सिंह


Shayari :


“मेरी यादों की आँखों में तुम्हारा ख़्वाब पलता है,
ज़रा सी रोशनी कर दो तो हक़ीक़त में बदल  जाए।”
पारुल सिंह

Shayari :


“कितनो को है आज कल फ़िट्नेस की भूख लगी,
क्या होगा उसका जिसके पास एक वक़्त की रोटी भी नहीं।”
Parul Singh

Shayari :


“अरसे बाद एक बूँद माथे पर गिरी थी बारिश की,
रुकी तक नहीं एक लम्हा भी,
उसको जल्दी थी मंज़िल तक जाने की।”
Parul Singh

Shayari :


“उसकी ख़ामोशी को हर बार सुना था मैंने,

पर मुझे भी तो हक़ था ख़ामोश रहने का।”
पारुल सिंह

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