#Kavita by Shabnam Sharma

मायका *** घर से कोसों दूर ब्याह दी गई थी, बूढ़ी हो गई थी अब, पर कभी-कबार हवा के झोंके की तरह, डसे याद आती थी पीहर के हर इंसान की वो छप्पर के पास वाला स्कूल का मैदान और हाँ सबसे ज्यादा शाम को उस मैदान में सखियों संग खेलना। खो जाती, ख्यालों में, फिर डसका ध्यान जाता अपने झूरियों वाले चेहरे, और कंपकंपाते हाथों पर। छलक ही जाते हर बार 2 बूंद आँसू,…

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"#Kavita by Shabnam Sharma"

#Bal Kavita by Ramesh Raj

|| हम बच्चों की बात सुनो || ————————————– करे न कोई घात सुनो हम बच्चों की बात सुनो। बन जायेंगे हम दीपक जब आयेगी रात सुनो। हम हिन्दू ना मुस्लिम हैं हम हैं मानवजात सुनो। नफरत या दुर्भावों की हमें न दो सौगात सुनो। सचहित विष को पी लेंगे हम बच्चे सुकरात सुनो। +रमेशराज

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"#Bal Kavita by Ramesh Raj"

#Kavita by Dr.Sulaxna Ahlawat

काल तो अस्सी रपियाँ का टोटा होग्या, भाई र इसै बात का दुःख मोटा होग्या। सोचूँ थी कि भारत बंद के चक्करां म्ह, विपक्षी दल आलै आवैंगे म्हारै घरां म्ह। मन्नै बी कहवैंगे कलम आपणी थाम, बस इतनी सुनतै ऐ तार दूंगी मैं चाम। बस याहे सोच नया बिंडा ले कै आई, दो घण्टे तक बिंडे के करी तेल पिलाई। पर किस्मत म्ह टोटा था कोय ना आया, बिंडा रहगा मेरा कुण म्ह धरा धराया।…

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"#Kavita by Dr.Sulaxna Ahlawat"

#Shayari by Akash Khangar

रो लो कतरे भर या दरिया बहा दो मैं न लौटूंगा अब चलो शर्त लगा लो उलझाई हैं जो तुमने गुत्थियां प्यार के धागों की उम्र बीत जायेगी सुलझा सको तो सुलझा लो…आकाश खंगार *** मोहब्बत भी क्या चीज बनायीं तूने ऐ खुदा एक उसके बदले परी भी मिल जाये तो कंम ही लगेगी…ईमान से…आकाश खंगार **** मेरी मोहब्बत और दोस्ती की कसमें खाएंगे लोग, तुम न मुड़कर देखना, पर, मेरे करीब तो आएंगे लोग,…

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"#Shayari by Akash Khangar"

#Gazal by V.K.Anjan

कोई कोई तो सरासर बुराई देने लगा, कि जब से कानों को ऊँचा सुनाई देने लगा. .. तुझे ख़बर भी नही तेरी एक हरकत से, छुपा हुआ था जो तुझमे दिखाई देने लगा. .. किसी पे हाथ उठा के मैं उठ गया इतना, कि पूरा गाँव मुझे चारपाई देने लगा. .. ख़ुदा का शुक्र के शाखों पे फूल आने लगे, हमारे हाथ मे बेटा कमाई देने लगा .. तुम्हरा साथ मई जून से भी बदतर…

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"#Gazal by V.K.Anjan"

kahani by Sanjay Kumar Avinash

लुटन की मेहरारू ************** वर्षों बाद जश्न मनाने का मौका मिला। लुटन की माँ तूतुहियाँ बाजा की धुन पर ठुमके-पर-ठुमके लगाए जा रही थी। एक-से-बढ़कर एक अंदाज में नृत्य भी परोस रही थी।घर वालों के काफी जद्दोजहद के बाद लुटन शादी के लिए तैयार हुआ था| घर के देवी-देवताओं के साथ-साथ चौधरी जी के बंग्ला के पास अवस्थित ब्राह्मणी स्थान में भी कबूलती कर आई, “माय, ई लुटना के बियाह होए जाए तो एगारह गो…

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"kahani by Sanjay Kumar Avinash"

#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

~  शायरी ~ तुम्हारी याद आयी आइना देखने के बाद, हमने खुद को समझा तन्हा रहने के बाद, कभी दिन रात सदियों सी गुजरती थी । अब जीवन कम लगता तुम्हे पाने के बाद। सौरभ दुबे ” साहिल” किशनी मैनपुरी ( यू पी)

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"#Shayari by Saurabh Dubey Sahil"

#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

मेघ मल्हार का कोई नहीं मैं राग लिखता हूं दिलों में है लगी जो आग वही आग लिखता हूं नहीं लिखता हूं इस खातिर की मेरा नाम हो जाए दबे कुचले का मैं केवल आवाज लिखता हूं लिखने को तो लिख सकता मुहब्बत के तराने भी नहीं श्रृंगार मैं लिखता इंक्लाब लिखता हूं जहां जन्मा जहां खेला वहां की बात लिखता हूं जमीं की दर्द लिखता हूं दबी जज्वात लिखता हूं मचलता है जो मेरा…

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"#Kavita by Uday Shankar Chaudhari"

#Kavita by Shivansh Bahrdwaj

कविता मैंने दुःख बहुत झेले हैं मैंने आँशु बहुत लिकाले हैं तेरे हुस्न का मै दीवाना हूँ तेरा मै ही असल दीवाना हूँ मै हूँ तेरे प्यार में तू है मेरे ख़याल में ज़िन्दगी है तू मेरी मै तेरा रखवाला हूँ मुझे तेरे लिये जिना तेरे प्यार में मारना है शिवाँश भारद्वाज 8802358838 दिल्ली

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"#Kavita by Shivansh Bahrdwaj"

#Gazal by Amrendra Lavnya anmol

ये जमाना आपको भी मेरा दुश्मन बता देगा रास्ता भटक गए तो कोई और पता लिखा देगा । मैं अकेले भी चलूँ तो कदम सँभाल के रखता हूँ क्या जाने कब कौन पत्थर आके मुझे गिरा देगा भीड़ में ससरते हैं लोग और मैं दौड़ जाता हूँ यकीं है गिरने से मुझको माँ की दुआ बचा देगा ऐ नींद जान की खातिर कुछ देर और सब्र कर ले ये अमीरे शहर है जगने से पहले…

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"#Gazal by Amrendra Lavnya anmol"

#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

अवध सभी को रहा जगाय ९- नेताओं   की  बात  न  पूछो, बदल  गये  सब देख चुनाव l चोर,  लुटेरे,  डाकू,    कत्ली, गिरगिट   सा लाये बदलाव ll वादों   का  ये  ढोल   पीटते, भारत  माता   आई   याद l फरियादी   वे  बन  बैठे    हैं, करते  जनता  से फरियाद ll जनता   बैठी  लिये    तराजू, आओ   मूल्यांकन हो जाय l अब  तो  जागो  मीत   हमारे, अवध सभी को रहा जगाय ll अवध

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"#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh"

#Kavita by Jagannath patodi

विकारों से संवाद ना कर । जीवन यह बर्बाद ना कर । बच न सकेगा प्रभु नजर से कभी कोई अपराध न कर । जगन्नाथ पटौदी विलोम शब्द-:- मिलन >< विछोह मिलन वैर नफरत का यहाँ पे दहन जाने कब होगा । प्रीत प्यार का जहां में चलन जाने कब होगा । बीत गया कितना समय ,आपसे बिछडे़ हुए आत्मा परमात्मा का मिलन जाने कब होगा । विछोह मेरी तरह  मजबूर  नही । पास है…

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"#Kavita by Jagannath patodi"

#Kvita by Sudha Mishra

रात की खामोशी हो या दिन का उजाला सब कुछ में सिर्फ नाम है तुम्हारा । हमने तो घर को जलाकर अपने किया था सबकी राहों में उजाला देखो न फिर भी सिर्फ इल्जाम सर आया । दाँव पर लगाकर जिंदगी हरबार दिल हारा इतने पर भी कौन हमें था कभी पहचाना। साँसों पर जबतक  न बन आए मेरे हमने कब था हाथ किसी का छोड़ा । **सुधा मिश्रा***

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"#Kvita by Sudha Mishra"

#Kavita by Shailesh Kumar Singh

फिसलती जा रही है पैरो तले से जमी। और कोई आसमा पे आशियाना बना रहा है। किसी की आबरू लूटी जा रही है। और कोई जश्न ऐ शाम मना रहा है।। कोई भूखे पेट सोने की कोशिस में है तो कोई बिना भूख खा रहा है। किसी को फुरसत नहीं देखे एक नजर आँखों में पानी नहीं। आग दिख रही रही धधक रही सीने में ज्वाला। ये देख कर कि क्या हो रहा है।। अब…

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"#Kavita by Shailesh Kumar Singh"

#Kavita by Dr. Yasmeen Khan

सुबह कब आयेगी ? हर दिन सुबह होते ही नज़र पड़ती है अख़बार की सुर्खियों पर हर ओर ख़ून खच्चर तबाही और तबाही……., तार तार होता हुआ हर एक रिश्ता कहीं बम धमाके कहीं नफ़रत की भड़कती आग कहीं कालाबाज़ारी कहीं रिश्वतख़ोरी कहीं आदमी के ख़ोल में छुपे भेड़िये क़ानून व्यवस्था, मीडिया की डोलती नैय्या खिलने से पहले मुरझाते कोमल फूल दाने दाने को मोहताज ठोकरे खाता लाचार बुढ़ापा मजदूरी करता भटकता बचपन हर पेशे…

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#Kavita by Imrana

हां वो नारी है 💥💥 जून की धूप में पीपल के रूप में प्रेम की पुजारी है हाँ वो नारी है।। बेदम सा शरीर है माथे पर लकीर है आँखें कुछ नम है सहमी सी तस्वीर है भाग्य की चोट से दुख की मारी है हाँ वो नारी है।। कन्या का दोष है सब का रोष है दर्द के घूंघट में एकदम खामोश है दहेज़ की सूली पर पुरुष की तैयारी है हाँ वो नारी…

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"#Kavita by Imrana"

#Gazal by Amit Omar

ग़ज़ल ….तुम बड़े वो हो बड़ी मुश्किल से खुद को था सँभाला..तुम बड़े वो हो निगाहों से ही हमको मार डाला ..तुम बड़े वो नहीं अब नींद आती है, नहीं अब चैन पड़ता है नहीं अब मुँह में रख पाऊँ निवाला.. तुम बड़े वो हो बसे हो तुम ही इस दिल मे, नही खुद की खबर कोई दिया है रोग ये कैसा निराला..तुम बड़े वो हो कि अपना होश यूँ खोया, निकल पड़ता हूँ रातों…

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"#Gazal by Amit Omar"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

क्या  संस्कृति और मर्यादा केवल भाषण और किताबों तक सीमित रह गयी ? यह बात हर युग में उठायी गई थी , हैं और उठायी जाएँगी .वर्तमान सन्दर्भ में इस बात को उठाना आवश्यक हैं या नहीं ? क्या सचमुच हम आधुनिक हो गए ? हम ज्ञानवान हो गए ?हम पूर्ण वैज्ञानिक रूप से विकसित हो गए ?क्या आधुनिक ज्ञान विज्ञानं हमारे सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण हैं ?क्या हमने भौतिक संसाधनों को जुटा कर…

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#Kavita by Pinku Rajput

मोत भी थर थर थर्राती है। जब ज़िन्दगी लोट आती है। गले मिलने को क्या बचा अब ये सब तो बीते कल की कहानी है। जान हथेली पर लेकर न चले तो क्या करें। बतायें पापी पेट ने कब किसकी मानी है। बचपन गुजरा कचरे में जवानी जेलो में बिताई हे। राम जाने किश्मत ने और क्या क्या ठानी है। चलता रहूंगा में भी आख़री सांस तक ठोकरे ही तो खाई है अभी हार कहा…

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"#Kavita by Pinku Rajput"

#Kavita by Vivek Prajapati , Kashipur

अमर शहीद चंद्रशेखर ‘आजाद’ को उनके बलिदान दिवस पर शत शत नमन। है  महान  नाम   चंद्रशेखर  आजाद  भी नाम था आज़ाद और ज़िगर फौलाद था। आँखों में था एक स्वप्न राष्ट्र ये स्वतन्त्र हो रोम  रोम  में  ही  विद्यमान  राष्ट्रवाद था। काँपते थे  शत्रु उसकी एक गर्जना से ही वाणी में तो जैसे मानों एक सिंहनाद था। खायी थी कसम जीते जी झुकेगा वो नही सब थे ग़ुलाम  बस  वह  ही  आजाद था। विवेक प्रजापति

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#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati

एक तुने ही नही जाना राज मेरे दिल की गहराई का, जबकि लोगो ने नाम तक बता दिया मेरी तन्हाई का। मै भी कितना पागल! अपने जैसे ही समझा दुनिया को, जबकि दुनिया नाम है; झुठ,फरेब और बेवफाई का। संजय अश्क

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#Kavita by Kishor Singh

बेटी मेरे मन 💕 के नील गगन की एक तुम ही रौशन 🌟 तारा हो तुम से रौशन मेरा 🏡 आँगन है मेरे सदन की तुम उजियाला हो ** तुमसे सफल मेरा जीवन है जीने का तुम ही सहारा हो तुम बीन मरुमाटी सा मन है तुम पावन शीतल धारा हो ** जब से तुम घर 🏡 में आई हो मेरे 🏡 घर खुशीओं का डेरा है मेरे अधर की मोती तुम #बेटी मम हृदय…

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#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar

प्यार में आसां डगर नही होती सच्चे प्यार की कदर नहीं होती मजाक बना देते है मोब्बत को भी अब वो प्यार वाली नजर नहीं होती टूट चूका हु मोहब्बत में यारो बिना प्यार जिंदगी बसर नहीं होती सितम से मै भी बच जाता शायद मुझे मोहब्ब्त अगर नहीं होती -किशोर छिपेश्वर”सागर” बालाघाट

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"#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar"

#Kavita By Anil Aboojh

परदा —————— परदे के आगे सारे कैरेक्टर हैं दर्शकों से खचाखच भरा हॉल है पॉपकॉर्न खाते बच्चे बूढे जवान हैं अभिनय करते अभिनेता प्रेम,ममता,आक्रोश अपने चरम पर है देशभक्ति का जोश उबाल रहा लहू माइक पर चीखते नेता बादाम खाते अफसर अभिजात्य अभिनेता तालियों की गड़गड़ाहट बच्चों की मुस्कानें धर्म घंटियाँ अजान सबकुछ है लेकिन तभी परदे के पीछे की एक हल्की सी चीख सन्न करती सबको उजागर कर देती है सारा नकलीपन “मुझे रोटी…

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"#Kavita By Anil Aboojh"

#Kavita by Mukesh Bohar Aman

व्यंग्य परक रचना गधों की बात पसंद है नेताओं को तेरे-मेरे ना जज्बात पसन्द है । नेताओं को बस, गधों की बात पसन्द है ।। सबका विकास, काम बोलता छूटे पीछे , अब तो सबको, गधों का साथ पसन्द है । नेताओं को बस, गधों की बात पसन्द है ।। वोट-वोट को तिलमिला रहे नेताओं को , अब वोटों की खातिर, गधों की जात पसन्द है । नेताओं को बस, गधों की बात पसन्द है…

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"#Kavita by Mukesh Bohar Aman"