0216 – Sudha Mishra

Kavita : दर्द   रात  के बाद सुबह हुई तम फिर भी छटा नहीं एक और दिन या हर दिन का मेहमाँ तु हो गया दर्द कुछ कहना चाहे भी तो जुबाँ साथ नहीं देती पर्वत समझ कर पूजा जिसे एक ठोकर से अस्तित्व ही बिखर पड़ी मिट्टी के ढ़ेर सा लड़खड़ा गिरा वो जो पर्वत पूजा किए….   ऐसे ही सारे बंधन जिंदगी से  हाथ छुड़ाकर मौका परस्ती निभाते रहे… हम हमेशा उसी मोड़पर…

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"0216 – Sudha Mishra"

0215 – Kirti Vidya Sinha

Kavita : बारिश की नन्हीं बूंदे *** नन्हीं -नन्हीं बूंदे आईं,रिमझिम-रिमझिम करती आईं फिर आई घनघोर घटा बादल गरजा, बिजली चमकी चमकी सृष्टि सारी आई बारिश आई बारिश कहती दुनिया सारी धरा थी प्यासी तृप्त हो गई नदियां भी परिपूण हो गईं ताल तलैया करें हठखेली पर्वत श्रंखला हो गई नवेली नाले नहर खूब है छलके बाग बगीचे महके – महके वन उपवन हैं चहके-चहके डाल-डाल पर  पंछी फुदके कूदें फांदें गाय बकरियॉ मेढ़क मछली…

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"0215 – Kirti Vidya Sinha"

#Kavita by Vinita Rahurikar

आवाज….   नहीं मैनेँ अनसुना नहीं किया उस आवाज को जो मेरे भीतर से उठती थी…   हर बार मैंने बहुत ध्यान से सुना समझा, और अमल किया उसकी बात पर…   क्योंकि वही थी जो मुझे समझती थी जानती थी सबसे बेहतर, सबसे बढ़कर मुझे पूरा विश्वास था उस पर…   तभी मै आज भी सुनती हूँ पूरी ईमानदारी से उसकी आवाज चलती हूँ थामकर उसका हाथ…   पूरा सम्मान देती हूँ मैं उसे,…

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"#Kavita by Vinita Rahurikar"

# Kavita by Ajeet Singh Avdan

नील-छन्द ~~ नैनन से नित दामिनि की छवि आवनि को । देखि मनोहर ओंठ सजी मुस्कावनि को ।। माधव के अध गाल गुलाल रचावनि को । मातु पिता तकि बाल कला दर्शावनि को ।।   कुञ्चित केश कपोलन हाथ हटावन को । धूलि सने कर माधव माथ लगावन को ।। ज्यों अवदान लुभावत केशव हैं मन को । को हिय काठ सरीखन नाहिं जुड़ावन को ।।   …अवदान शिवगढ़ी

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"# Kavita by Ajeet Singh Avdan"

#Gazal by Tej Vir Singh Tej

कितनी बेशर्मियाँ आज़माने लगे इश्क़ में लोग क्या गुल खिलाने लगे।   डर कि मेरी जुबां खुल न जाये कहीं। वो सितम दिन -ब दिन ही बढ़ाने लगे   हम बग़ावत को  शायद निकल ही पड़ें ज़ख़्म दिल के बहुत अब  सताने लगे।   उनको पाने की दीवानगी देखिये हम किताबों से भी दिल चुराने लगे।   रूठने का फकत हमने नाटक किया हमको हँस हँस के वो भी मनाने लगे।   लोग कहते हैं…

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"#Gazal by Tej Vir Singh Tej"

#dohe (Muktak ) by Mukesh Marwari

कुछ राजस्थानी दोहे:-   गणगौर्यां चली सासर,  ईसर जी को साथ | दोन्युँ नाचण लागर्या, पकड़-पकड़ कर हाथ ||     रजपुतानों आज बस्यो, कई बरसां पेली | मरगा राणा मोकळा, कई मरगा माली ||     बिनणी देखी सोवणी, और हाथों कि चुड़ी | साहब फूँकी काया नं, पी कर दारु बीड़ी  ||     प्रेम प्रतीक मीरा ही, और ढ़ोलामारू | प्रित मं मरगा तब ढोला,और अब पिगा दारु |   ✍कवि मुकेश…

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#Gazal by Sanjay Ashk Balaghati

उसे पाकर ग़र लुट भी गया तो क्या सपना दिल का टूट भी गया तो क्या। …. जिंदगी अपना रास्ता खूद डूंड लेती है वो सफर मे ग़र छुट भी गया तो क्या। …. है काम आदमी का आदमी के काम आना उसे गिराकर ग़र मै उठ भी गया तो क्या। …. सच बोलकर दुश्मन ही कमाया है मैने दोस्ती मे बोल एक झुठ भी गया तो क्या। …. हर कदम पर फरेब करता रहा…

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#Kavita by Surendra Kumar Singh

हवा ** इस गन्धिल और शीतल बहती हुयी हवा का अपना सरोकार है। स्पर्श करती है शरीर को तो अंदर से आती है डकार जैसे जी भर के पानी पीने के बाद अक्सर आया करती है। हालाँकि अँधेरा है अभी हवा की इस रौशनी में। लेकिन शब्दों बनो मत कि मैं अँधेरा हूँ तुम अँधेरा नही मोहरा हो। शब्द मेरे भी हैं और सत्ता शब्द की एक मैंने भी बना रखी है चाहो तो देख…

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"#Kavita by Surendra Kumar Singh"

#Gazal by Aasee Yusufpuri

मुझको मालूम है इक रोज़ ज़ुबां खोलेगी ज़िन्दगी मांग ले मुझसे तू अभी जो लेगी   कौन देता है यहां जान किसी की ख़ातिर ये जो दुनिया है बहुत होगा ज़रा रो लेगी   मैंने रग-रग का लहू देके संवारा है इसे मैं अगर चुप भी रहूँगा तो ग़ज़ल बोलेगी   तेरे हमराह तो दुनिया भी है आसी भी है हमसफ़र अब ये बता दिलरुबा किसको लेगी

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"#Gazal by Aasee Yusufpuri"

#Kavita by Kshitij Bawane

अभी के अभी…! ०•••[   कदमों तले होंगे वो बादल सभी ज़िद पकड़ ले तू ऐसी अभी के अभी!   नाम चमकेगा तेरा देखेंगे सभी भिड़ जा तू खुद से ही अभी के अभी!   होगा भरोसा खुद पे मंजिल मिलेगी तभी बढ़ा कदम तू आगे अभी के अभी!   आँसू खुशी के होंगे जब जीत होगी तेरी जगा ले विश्वास तू ऐसा अभी के अभी!   ना रुकेगा कहीं ना झुकेगा कभी खा कसम…

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"#Kavita by Kshitij Bawane"

#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

गई शीत पतझड़ गुजरी आया बसंत हर्षित जग वन है कोयल गाती गीत मधुर पुलकित धरती और गगन है —– सजी प्रकृति है दुल्हन सी मादकता मधुमाई है मनमोहक मुस्कान लिए वन उपवन ली अंगराई है —- तरुवर में कोपल लगते बासंती रंग मचलता है बैठ पतंगे मंजर पे डाली-डाली  खिल उठता है —– जैसे सोलह श्रृंगार किए वनदेवी वन में उतरी हो बैकुंठ सी आभा को लेकर अन्नपुर्णा जग में उतरी हो —– देख…

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"#Kavita by Uday Shankar Chaudhari"

#Geet by Dipti Gour ‘Deep’

प्रकृति का रूप है नारी, शक्ति का अवतार है l सृजन का सोपान मनोहर, सृष्टि का उपहार है l    वात्सल्य,उत्कृष्ट प्रेम की ये मूरत अनमोल है l कर्तव्यों की प्रेरणा , संघर्षों का भूगोल है l कलमधरों की काव्य प्रेयसी धरती का श्रंगार है रणचंडी,महाकाली,दुर्गा अनगिन रूप है नारी के l वीर लक्ष्मीबाई बन के, खेले खेल कटारी के l अबला मत जानो नारी को, नारी पैनी धार है    अभियंता, अभिभाषक बन के, अद्भुत कला…

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#Muktak by Mahendra Mishra

भले दो लाख आँसू तुम सदा हंस के पियूँगा मैं, करोगी बेवफाई तुम प्यार फिर भी करूँगा मैं, सदा है जो कहा तुमसे वही फिर आज कहता हूँ, तुम्हारा था, तुम्हारा हूँ, तुम्हारा ही रहूँगा मैं। मिले जो घाव ठोकर पे वो सीना चाहता हूँ मैं, तेरे नयनों के हर आँसू को पीना चाहता हूँ मैं, तुम्हारे दिल की नगरी पे प्रिये अधिकार करके अब, तुम्हारा रहनुमा होकर के जीना चाहता हूँ मैं।

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"#Muktak by Mahendra Mishra"

B 0214 – Dr. Prashant Dev Mishra

Kavita : “कश की कश्मकश ” *** सिगरेट, पीना बुरी बात है- सेहत ,रिवायत,मुहब्बत सब के लिये। मग़र, तेरी बेपनाह यादों के जालों से घिरा हुआ इंसान, आखिर, करे भी तो क्या? शायद सिगरेट प्रतीक है- “टूटे आशिकों के ज़ज़्बात को बहलाने का” मैं, सिगरेट इसलिये पीता हूं। क्योंकि मुझे लगता है, तुझे , मेरे करीब सिगरेट ही लायी थी।!! उन दिनों , मैं बेफ़िक्र था। जवां हसरतों का एहसास हुआ था। जब पहली बार…

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B 0213 – S K Gupta

Gazal : काश जिंदगी किसी दूकान पर बिकती तरह तरह के रंगों में सजी हुई दिखती खरीदने वालों की भी भीड़ लगी रहती खरीदते वो जो हमे सबसे अच्छी लगती मोल ज्यादा देकर खरीद लेता मैं भी तो जो मुझे खूबसूरत बहुत हसीन दिखती दिल को भी कितना सुकून मिलता मेरे लिबासे वफा पहन कर साथ मेरे रहती कितना खूबसूरत मंजर होता वह भी तो जो दिल मेरा चाहता वही तो वह करती मेरे ही…

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"B 0213 – S K Gupta"

#Kavita by Vinay Shukla

     (1) स्वागत है पुण्य पथ पे सदकाम कीजिएगा मन को पवित्र मंदिर ,सा धाम कीजिएगा भारत ये विश्व गुरू की गद्दी पे पुनः बैठे मेरी कामना को  पूरन हे राम कीजिएगा/    (2) लाख उङाने सब भरते हैं सजन यहाँ पर कौन बना ? आदर्शों की बात छेङकर लखन यहाँ पर कौन बना? सोच रही क्यों खङी तवायफ बाजारों में अबला सी ? हूस्न और जाम सभी चखते हैं सजन यहाँ पर कौन…

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"#Kavita by Vinay Shukla"

#Gazal by VINOD BAIRAGI

नजरो के सामने नजारे  कैसे बचाया जाए लगा दाग इस दिल पर  वो कैसे छुपाया जाए ऐसास नहीं है  जिन्हें अपनी ही गलती का क्यों ना उन्हें फिर से आइना दिखाया जाए इन अंधेरों में हमे चलने की  आदत तो नहीं हे किस  तरह  ये उन्हें ये अब समझाया जाए खंज़र  रखते हैं  जो अपने कलम वालो इन हाथों  में उन्हें फिर किस तरह गुलाब थमाया जाए जिन्हें शर्म तो  नज़र आती  ही नहीं अब…

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"#Gazal by VINOD BAIRAGI"

#Kavita by Naveen Jain

गीत होली है फागुन का महीना है, उड़ रहा है अबीर होली का पर्व है रे, मनवा हुआ अधीर चले पिचकारी सारा रा होली है आरा रारा रा — इस होली के पर्व को, बड़े मौज से मनाएँ होली होय गुलाल की, पानी सभी बचाएँ उड़े गुलाल सारा रा होली है आरा रारा रा — होली के रंगों से सीखो सामंजस्य बनाना संगठित रहना, पर जीवन में खुशियाँ लाना मचे हुड़दंग सारा रा होली है…

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"#Kavita by Naveen Jain"

#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

मद    माया   मत्सर   मनमानी l असत असार क्षणिक हुलसानी ll नेह  फूल   रगड़े   नित   काया l अंत काल  सब  काम न आया ll   भक्ति भाव परहित श्रम सेवा – सर्वोत्तम     आचार l अवधपति ! आ जाओ इक बार ll *** विजय  पराजय आये जाये l सही राह   को  ही अपनायें ll सब  कुछ   देख  रहे रघुराई l निज कर से चलचित्र चलाई ll   विधि का लिखा समय के पट पर – कर   बंदे  …

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"#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh"

#Shayari by Akash Khangar

रात रो कर बिताऊँ या सो कर क्या फर्क पड़ता है तू छोड़ दे मेरी फिकर ऐ खुदा चलने दे युही जब तक ये सिलसिला चलता है… ***   जो कहते है बड़े उसे मान ले प्रश्नो की बेमतलब झड़ी न लगा शब्द उनके नही तजुर्बा है ये व्यर्थ की बहस में न खुद को बहका दोष मढ़ने चले हो तो किसी को न छोड़ोगे अच्छा है खुद कर मंथन ज्ञान का ज्ञान अर्जन कर…

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# Gazal by Jasveer Singh Haldhar

तिमिर ने कल रात चरागों से दूरी बनाली ! अमीरों से दूर हो दिवाली हमने मनाली !! मिल पटाखे जला रहे सारे बच्चे द्वार पर ! कुकुर ने सुन के धमाके पूंछ अपनी झुकाली  !! रोशनी उतनी न थी जो चरागों से तय हुई ! पटाखों के धुएँ ने रोशनी शायद दबाली !! आपने सुनी न होगी एक खबर ऐसी भी है! भारत से डर पाक ने सैना पीछे हटाली !! हम पड़ोसी देश का…

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"# Gazal by Jasveer Singh Haldhar"

B 0212 – Shabnam Sharma

Kavita : अंधेरों में तैरते शब्द **   कुछ अंधेरों में जुगनुओं से तैरते शब्द पकड़ने हैं मुझे, पानी में उड़ती तितलियों के परों पर लिखनी है कहानियाँ, पर क्या करूँ, बन्द हो गई है मेरी ज़िन्दगी के कमरे की सारी खिड़कियाँ, कभी-कभी आती है रोशनी की इक किरन, चीर कर, खिड़कियों के मोटे परदों के बीच से, तब तक सिर्फ बुनती हूँ अपना साँसों का स्वैटर और ठिठुर जाती है ज़िन्दगी, कुछ आगे सोचते-सोचते।…

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B 0211 – Annang Pal Singh Bhadoriya ‘ Annang’

Muktak : अंतर,पद कद में बड़ा, पद बाहरी  विधान. ! कद लम्बा गरिमामयी , मानव की पहचान !! मानव की पहचान, श्रेष्ठतम उसकी गरिमा  ! कद इसको ही कहें,यही है मानव. महिमा  !! कह ंअनंग ंकरजोरि,झाँकिये अपने अंदर ! पद वा कद में,बहुत बड़ा  होता है  अन्तर   !!   Muktak : मानवता निर्माण में दो कारण हैं  श्रेष्ठ  ! सदविचार वा ग्यान का सम्बल रहे यथेष्ठ !! सम्बल रहे यथेष्ठ ,एक यदि कम पड़ जाये…

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"B 0211 – Annang Pal Singh Bhadoriya ‘ Annang’"

#Kavita by Shabnam Sharma

जन्मदिन साल भर इन्तजार अपने जन्मदिन का, पहनाता है भगवान इक माला हमारे गले में वर्षों के मनके पिरोकर, दिखती नहीं, पर पहने रहते हम, हर वर्ष निकाल लेता वो अपना इक मनका, वक्त के साथ ये मनके कम होते चलते व रह जाता सिर्फ वह कच्चा मैला सा धागा, जो अब उठा नहीं पाता हमारे जीवन का बोझ, छूते, महसूस करते हम डसकी मौजूदगी, पर पता है ये अब सह न पायेगा हमारा बोझ,…

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"#Kavita by Shabnam Sharma"

#Kavita by Ashok Jaiswal

बंशी के काँटे में लगा, केंचुआ यूँ बोला मछली से, मैं तो मरा तेरे लिये, अब तू तो ना मर मेरे लिये !!   मान ले मेरा कहना तू, धोखाधड़ी है इसमें भारी, टपकाएगी लार मेरे लिये, बाहर बैठा है तेरे लिये !!   ये जिंदगी के मेले व झमेले, खत्म कभी न होंगे, हम ही ख़त्म हो लेंगे, ‘ताम~झाम’ किसके लिये !!   लालच शै बुरी बहुत है, कर देता है सब कुछ नाश,…

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"#Kavita by Ashok Jaiswal"