#Kavita by Niraj Dwivedi

मेरी निशा (रात) – एक कल्पना निशा (रात) से कुछ अनुरोध …… कुछ विहंगम दृश्य तो अपने विचारो ऐ निशा कुछ कलानिधि के कला दिखलाओ तो तुम ऐ निशा कुछ मधुप के गीत ही तुम गुनगुनाओ  ऐ निशा कुछ कोकिला की आवाज तुम कुहुकाओ ऐ निशा कुछ सितारों वृंद से मिलवाओ ही तुम ऐ निशा कुछ मंजरी  महक से महकाओ ही तुम ऐ निशा मै तुम्हारे प्यार में बैठा हूँ मेरी ऐ निशा कुछ तटीना…

Share This
"#Kavita by Niraj Dwivedi"

#Kavita by Satyendra Kumar

मुझको मेरा यार लौटा दे ——————- ओ हक़ीक़तों  की दुनिया मुझको मेरा यार लौटा दे संग हवा के खेलता था जो वैसा ही अखबार लौटा दे। जाने किन रंगों से तुमने उसका वर्ण भिगो दिया है दिखलाकर कितने मोती सपनों मे यूं डुबो दिया है हमने भी तो खेली थी वो बिन रंगों की एक होली, बिन फागुन आया था जो फिर से वो त्योहार लौटा दे। मुझको मेरा यार लौटा दे। कदमों को लंबा…

Share This
"#Kavita by Satyendra Kumar"

#Lekh by pankaj prakhar

विद्यार्थी परीक्षाओं से डरें नही बल्कि डटकर मुकाबला करें (लेखक :- पंकज “प्रखर”) प्रिय विद्यार्थीयों जैसा की आप लोग जानते है की कुछ ही दिनों में बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही है ऐसे में आप लोगों के परीक्षा संबंधी तनाव और परेशानियों को दूर करने के लिए मै कुछ नये सकारात्मक सूत्र आपको देना चाहता हूँ, क्योकि अपने इतने वर्षों के शिक्षण काल में मैंने अनुभव किया है की छात्र अथवा छात्रा…

Share This
"#Lekh by pankaj prakhar"

#Kavita by sanjay verma ‘drushti’

रोटी भूख में स्वाद जाने क्यों बढ़ जाता रोटी का झोली/कटोरदान से झांक रही रोटी भूखे खाली पेट में समाहित होने की त्वरित अभिलाषा लिए ताकि प्रसाद के रूप में भूखा तृप्त हो और धरा पर रहने वाला ऊपर वाले को कह सके तेरा लख -लख शुक्रिया रोटी कैसी भी हो धर्मनिर्पेक्षता का प्रतिनिधित्व करती भाग -दौड़ भी रोटी के लिए करते फिर भी कटोरदान धरा पर रहने वालों को नेक  समझाइश देता कटोर दान…

Share This
"#Kavita by sanjay verma ‘drushti’"

#Kavita by ANJALI KHER

हे वनिता्———- तुम तो हो ममता का सम्मान तुम तो हो भारतीय संस्कारों की आन तुम तो हो प्रेम-स्नेह-त्याग की एकमात्र पहचान फिर क्यों हो इतनी हतप्रभ, स्तब्ध, हताश? क्यों हो रहा अपनी पहचान, सम्मान व अस्तित्व को बचाने का आत्मप्रवंचन? हे कामिनी———– न थक-हार कर बीच राह में रुक तुम जाना अभी तो दूर, बहुत दूर हैं तुमको जाना अभी ही तो सीखा हैं तुमने बिन सहारे चलना अभी ही तो खोली हैं अपनी…

Share This
"#Kavita by ANJALI KHER"

#Geet by Brij vyas

“नज़रों को मेरी तूने , बाँध लिया है ” !! टकटकी लगाए यों मैं , देखती रही ! लज़्ज़ा के आवरण , समेटती रही ! भीतर की हलचल को – जान लिया है !! हसरत भरी निगाहों ने , गज़ब ढा दिया ! डूब गई रंग केसरिया , ऐसा रंगा जिया ! फाग ने  भी अलबेला – स्वांग लिया है !! बेध दिया यौवन ने , बैरागी मन ! सादगी में बसता है , सहज…

Share This
"#Geet by Brij vyas"

#Kavita by Ved Pal Singh

चलो फिर लौट जाएँ…………….. चले थे जहाँ से ज़माने को छोड़ कर, चलो फिर लौट जाएँ उसी मोड़ पर। ना कोई अपना था ना कोई पराया, बनकर चले एक दूजे का हमसाया। खड़े थे जहाँ पे सारे सपने जोड़ कर, चलो फिर लौट जाएँ उसी मोड़ पर। हसीन राह थी पर हम दो अकेले थे, मंज़िल सुहानी के सपनों के मेले थे। हम चल दिये थे सारे बंधन तोड़ कर, चलो फिर लौट जाएँ उसी…

Share This
"#Kavita by Ved Pal Singh"

#Lekh by Ramesh Raj

माना नारी अंततः नारी ही होती है….. किसी भी काव्य-रचना की उपादेयता इस बात में निहित होती है कि उसके प्रति लिये गये निष्कर्ष वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित हों। वैज्ञानिक परीक्षणों से आशय, उसके कथ्य और शिल्प सम्बन्धी चरित्र को तर्क की कसौटी पर कसना, जांचना, परखना होना चाहिए। उक्त परीक्षण के अभाव में जो भी निष्कर्ष मिलेंगे, वे साहित्य में व्यक्त किये गये मानवीय पक्ष का ऐसा रहस्यवादी गूढ़ दर्शन प्रस्तुत करेंगे जिसमें कबीर…

Share This
"#Lekh by Ramesh Raj"

#Kavita by Ramchandra Azad

पाँच सौ-हज़ार सौ रूपए की नोट ने बात कही मुसकाय | हे हजार और पाँच सौ क्यों इतना इतराय || क्यों इतना इतराय समय की लीला न्यारी | गयौ  तुम्हारो  बखत आ गयौ  मेरो बारी | कहता है ‘आजाद’ तिजोरी समय की चोट | उसे देख खुश हो रह्यौ सौ रूपए की नोट ||  बड़के भैय्या आ गए दो हज़ार रंग लाल | जिनके दर्शन के लिए जनता भई बेहाल || जनता भई  बेहाल…

Share This
"#Kavita by Ramchandra Azad"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

अब दिल के ज़ख्म, फिर हरे होने लगे हैं ! हम ग़मों से अब, फिर लवरेज़ होने लगे हैं ! देख कर काली घटाओं का ये सुहाना मौसम, अब दिल के आँगन में, फसाद होने लगे हैं ! जाग कर गुज़ार दीं जिनके लिए कितनी रातें, अफ़सोस कि वो, किसी और के होने लगे हैं ! टूटे हुए दिल को अब भला कैसे संभालें “मिश्र”, उसके तो सारे ख्वाब, अब तमाम होने लगे हैं !…

Share This
"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"

#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

राजनीति में बदजुबांनी पर भीषण तकरार जानवरों ने क्रोध में कर डाली हड़ताल कर डाली हड़ताल हमें ना बीच में डालें अपने झगड़ों में न हमारा नाम उछालें नेताओं से तुलना, है तौहीन हमारी हम झगड़ों में खुद ,नेता की देते गाली “दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

Share This
"#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan"

#Kavita by Alok Trivedi

ग़म के सिवा इस दुनिया में , रखा हुआ है क्या , तू जो न हो तो मेरी, कौन करे परवाह . जहा भी मैं जाऊं , भूलू भटकूँ रह जाऊं  या ना, मेरी कौन करे परवाह . याद तेरी जब आए , मन मेरा भर जाए , तेरे उपकारों का बोझा, कैसे उतारू माँ . मेरी कौन करे परवाह , जब से दुनिया में आया, साथ रहा तेरा साया. जब भी भटका राह से…

Share This
"#Kavita by Alok Trivedi"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

साथ नहीं हो लेकिन क्यों हमसे रूठ गये हो? राह-ए-जिन्द़गी में तुम हमसे छूट गये हो! बढ़ती ही जा रही हैं अपनी दूरियाँ दिल की, हाथ की लकीरों में क्यों हमसे टूट गये हो?

Share This
"#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev"

#Kavita by Shambhu Nath

मुबारक हो तुमको नया साल यारो ॥ खुशियो संग मोती तुम भी लुटा लो ॥ रिद्धि रहे संग सिद्दी भी आये ॥ किस्मत भी चमके सद बुद्धि भी आये ॥ ज्ञान गंगा में आ आ के गोता लगा लो ॥ मुबारक हो तुमको नया साल यारो ॥ खुशियो संग मोती तुम भी लुटा लो ॥ करो खूब तरक्की बने काम सारा ॥ मेहनत यारो करो मत किनारा ॥ ज्ञान रुपी ज्योति को प्यारे जला लो…

Share This
"#Kavita by Shambhu Nath"