#Gazal by Uday Shankar Chaudhari

औरों के बहते अश्कों को मैं अपने दामन में भरलूं औरों के पथ के कांटे मैं  चून सफल जीवन करलूं ~ आर्तनाद क्यूं करे कोई मैं खुशियों का संचार करुं भूले  भटके  दीनों  की  मैं  उजियारा  संसार  करुं ~ अपने खातिर जग जीता है हम दुनियां की पीर हरें निज बसर परिंदे भी करते हम दुखियों की नीर हरें ~ जिस आंगन घना अमावस हो पुनम वहां मैं बन जाऊं जिस घर हो गंभीर व्यथा…

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"#Gazal by Uday Shankar Chaudhari"

#Gazal by Pinku Rajpoot

ये मन अब बईमान होने जा रहा है। ये जानबर अब इंसान होने जा रहा है। बन्द  कमरे से निकला है अभी। खुली हवा में साँस लेने जा रहा है। आज़ाद होने के बाद क्यों उदास है। किसके लिए ये फिर कैद होने जा रहा है। लवो पर उसके मेरा नाम नही आया। यु झुटा हँसकर क्यों रोने जा रहा है। अब ऐसा क्या मिल गया है उसे आज। जो अपना सब कुछ खोने जा…

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#Kahani by Sanjay Kumar Avinash

डरकडोर माँ थी! पूर्ण माँ!  एक-एक कर तीन बेटियों की माँ। शादी के चार-पांच वर्षों के अंदर ही दो-तीन-चार से पांच हो गई। उस समय खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही थी,  जब सौरी घर के करीब से आवाज आई, “अरी! लक्ष्मी आई है”, वहीं आदित्य के पिता बोल रहे थे, “चलो, ठीक-ठाक से हो गया न….. पुत्र होता तो अभी से जश्न मनाना शुरू कर देता…. फिर भी कोई बात नहीं, बेटी है तो…

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#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

धर्म – राग  को जपते – जपते, बदल दिये धार्मिक प्रतिमान l मत   की  लालच  में नेतागण, बने  मौलवी   साधु  सुजान ll कल तक जो छी छी करते थे, धर्म – नाम  से   था   परहेज l वर्षों  पहले   के   वादे     को, रखे  हुए   थे  बहुत   सहेज ll कोई   धर्म   नहीं  सिखलाता, झूट,   लूट,   हत्या,  अन्याय l अब  तो  जागो  मीत   हमारे, अवध सभी को रहा जगाय ll अवध

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#Gazal by Jagannath patodi

आप बिन कोई हमें भाता नहीं जिंदगी काअब मजा आता नहीं जब कमाने लग गया बेटा कहीं कह राह है बाप से नाता नहीं कौन कहता है खुदा ये दूर है पास ही है छोड़ ये जाता नहीं चाहता है जो चमन खिलता रहे नफरतों के राग वो गाता नहीं नफरतो की आग फैलाते रहे आज कहते है अमन आता नहीं राह में क्यों छोड़ हम को चल दिये आप बिन रहबर सफर भाता नहीं…

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"#Gazal by Jagannath patodi"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

हम न सुधरेंगे और न सीखेंगे हम भारतवासी  बहुत अच्छे गुणोंके धारी जीव हैं जंतु नहीं .हमें या हमारे खून में विरोध करने की आदत हैं ,हमको नियम को तोड़ने में मजा आता हैं ,जैसे हम कुछ भी भले के लिए बोले पर पाकिस्तान /चीन को विरोध करना . ऐसे ही हमारे देश में यदि किसी सुधार की बात करे ,कहने या सुनने के पहले विरोध ,समझना नहीं .कारण हमारा खून ख़ास तौर पर अस्सी…

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#Kavita by Sudha Mishra

नाम तो मैंने भी लिखा दिल पर तुम पढते हो या नहीं? एक थी पहचान खो गयी वक्त के थपेड़े में कैसे ढूँढू तुम्हारे निशाँ मिलते नहीं फिर दस्तक देकर अहसास तो दिलाओ तुम हो यहीं कहीं ऐ मेरी कविता के हमसफर.. *सुधा मिश्रा* ** बात ही मान बात ही अपमान बात ही मरहम बात ही घाव *सुधा मिश्र** *** बुत सी हो गयी फिर अहिल्या कोई राम तुम फिर एक ठोकर लगा जाना फिर…

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"#Kavita by Sudha Mishra"

#Kavita by Ashutosh Anand Dubey

आजादी का मतलब कोई आजाद से ज्यादा क्या जाने…….. क्रांतिवीर श्री चंद्रशेखर तिवारी’आजाद’ जी,,, भारत माँ के सच्चे सपूत, आजाद परिंदे को पुण्यतिथि पर कोटि कोटि श्रद्धांजलि एवं शत् शत् नमन। ********* भरी गुलामी में जिसने पूरी आजादी पाई थी। जिनके एक हुंकार से शामत अंग्रेजों की आई थी। क्रांतिवीर बन आजादी का अलख़ जगाया था जिसने। हम स्वयं सिद्ध अधिकारी हैं यह पाठ पढ़ाया था जिसने॥ इंकलाब का नारा देकर सचमुच में आजाद हो…

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#Kavita by Vinod Bairagi

शहर शहर में खुशिया आई गांव गांव हे खालीपन बोल मेरा अनमोल हे वो बोल गया  केशरी नन्दन इस धरती से उस आसमान तक वो ही चीज़ गज़ब की है एक तो मेरे माँ पिता है एक मेरा गुरुवर हे||1|| जिसकी धुन में दुनिया झूमे वो एक ऐसा तारा है, जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.। पागल हो गए सारी दुनिया वाले , जबकि तेरी ही इस दून में, अब…

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#Kavita by Yasmeen Khan

मन की चुभन’ चुभन तो किसी भी तरह की हो नुकसानदायक है, मन की चुभन तो सबसे ज़्यादा दर्द देने वाली  ख़तरनाक होती है। कभी -कभी मन में चुभती है… आँख में किरकने वाले तिनके की तरह, कभी-कभी मन में मीठा-मीठा दर्द करती है चुभी फांस को कुरेदने की तरह, कभी कभी ज़ेहन,दिल,दिमाग़ में मचलती ही रहती है किसी खुजली की तरह जितना सहलाओ, बहलाओ उतनी ही हथधर्मी दिखाती है। पलों, मिनटों, घण्टों तक ख़ुद…

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"#Kavita by Yasmeen Khan"

#Gazal by Sanjay Ashk Balaghati

दिलशाद कर रोता हुं….. कभी ईश्क मे फरियाद कर रोता हुं कभी खूद को बरबाद कर रोता हुं। कभी मयखाने तो कभी रब के दर तेरे नाम से, तुझे याद कर रोता हुं। दिल मे है मेरे दर्द के समन्दर कई रोज आंखो से बरसात कर रोता हुं। चेहरे पर उभर आई है तन्हाई मेरी मै तेरे ख्यालो को ईजाद कर रोता हुं। लगने लगा है अब तो जहर भी मिठा अब जिंदगी को बे-स्वाद…

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"#Gazal by Sanjay Ashk Balaghati"

#Kavita by Mukesh Bohar Aman

मां को समर्पित रचना मां तुम बहुत याद आई जीवन की शुरूआत से, ठीक पहले, जीवन के हर पल, हर घड़ी, रफ्ता रफ्ता हौले-हौले । मां तुम बहुत याद आई ।। जीवन के अगले पड़ाव में, पाठशाला के नीम की छांव में, लौटते-लौटते, धूप और छांव में । मां तुम बहुत याद आई ।। इससे भी थोड़ा आगे, जीवन के चैराहे पर । कभी कुछ खोये तो, कभी कुछ पाये पर । मां तुम बहुत…

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"#Kavita by Mukesh Bohar Aman"

#Gazal by Adil Khan , Sarfarosh

आपकी जिस पर नज़र हो गयी है ज़िन्दगी उसकी मुनव्वर हो गयी है ज़ख्म भरते नहीं, दर्द जाता नहीं चोट दिल पे इस क़दर हो गयी है जब कभी तुझे तन्हा देख लेता हूँ हालत और भी  बदतर हो गयी है कह नहीं सकता यूँ हाले दिल तुमसे और  चर्चा  ये सारे शहर हो गयी है बहुत दूर कर ले खुद से तू हमको तेरी याद मेरा हमसफ़र हो गयी है -आदिल फर्रुखाबादी

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"#Gazal by Adil Khan , Sarfarosh"

#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

छंद -शक्ति राणा वार्ता ————————— महाराणा लोट जाओ ,संकट को ओट जाओ । राणा छोटे भाई की ये जिद मान लीजिये।। यदि ये लड़ाई छेड़ी ,पैरों में पड़ेंगी बेड़ी । कुछ दिनों के लिए ये प्रण टाल दीजिये ।। ये वक्त नहीं राड़ का ,हीरा है तू मेवाड़ का । मेवाड़ी सैना में शक्ति का संचार कीजिये ।। घोडा ले करो प्रस्थान ,शक्ति का बढ़ाओ मान । आजादी की जंग में सब्र का घूँट पीजिये।।…

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"#Kavita by Jasveer Singh Haldhar"

#Kavita by Harprasad Pushpak

अंधा ये कानून नही था,अंधों का कानून था । न्याय नियम.की बात कहां जब उल्टा सब मजमूंन था।। धृष्ट् राष्ट अंधी सी सत्ता भीष्म पितामह मोन थे । जन जन में अकुलाहट भय था समझो दोषी कौन थे ।। देश द्रोहियों के मान सिंह कुछ पेरोकार हो ,जातेहैं । अगर मगर की भाषा गढ़ कर प्रश्न खड़े कर जाते हैं ।। अंधकार में जीते हैं जिनको अंधकार ही भाते हैं। बीज बिषैले बौ वोटों की…

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"#Kavita by Harprasad Pushpak"