#Kavita by Mohit Jagetiya

नेता नेता की तो प्यारी प्यारी बोली है। जनता तो सारी बेचारी भोली है। चुनाव में जनता को कभी ढूंढ़ते है चुनाव बाद जनता को वो लूटते है। ये कैसा आज वो देश बना रहें है देश में कैसा परिवेश बना रहें है। भाई  भाई  में  लड़ाई  कराते  है दुश्मन को भी अपने गले लगाते है । राजनीति में ये कैसा साल आ गया नेता का आज तो बुरा काल आ गया । ये क्या…

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#Muktak by Lovelesh Dutt

शब्दों के अलंकरण से कविता नहीं बनती। बड़े कवि के अनुकरण से कविता नहीं बनती।। “शीश उतारे भुईं धरे” का भाव यदि नहीं है, केवल कोरे व्याकरण से कविता नहीं बनती। ………………….डॉ० लवलेश दत्त(बरेली)

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#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

कालेधन को विषय बनाकर, जन  मानस में दिये उछाल l फँसी  हाय  जनता   बेचारी, समझ न  पायी नूतन चाल ll पूरा  सत्र   बीतने   पर   भी, बच्चे  पाये   नहीं   किताब l फिर  वादों की चकाचौंध में, देख  रहे   मृगतृष्णा ख्वाब ll मेघ – चुनावी   नहीं   बरसते, इनसे कभी न आस लगाय l अब  तो  जागो  मीत   हमारे, अवध सभी को रहा जगाय ll अवध

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#Kavita by Sudha Mishra

सुनो … कहते हो न समाज बदला है सोच बदली है बदला होगा कुछ भी पर लड़की की किस्मत नहीं बदली कल भी पहरे मेंथी ;आज भी है, कल भी  रहेगी… जानते हो क्यूँ ? क्यूँकि लड़की सुंदर है तो खुलकर जी नहीं सकती हंस नहीं सकती ,गा नहीं सकती भाई मेरे कहते थे कभी बचपन में तुमको साथ नहीं ले जाऊँगा कहीं और चलना तो मूँह मत खोलना ..; जब मैंने पूछा क्यूँ ?…

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#Kavita by Mukesh Bohara Aman

होली मस्तानी आयी रे खुशियों के रंग भरने , होली मस्तानी आयी रे । सब के ही चेहरों पर , होली, जवानी लायी रे ।।1।। मस्ती में झूम -झूम , खुशियों को चूम-चूम । जीवन में सुख भरती, होली सुहानी आयी रे ।।2।। खुशियों के रंग भरने , होली मस्तानी आयी रे ।। नीला, पीला और लाल, कुमकुम उड़े गुलाल । गोरी के गालों पर , होली दीवानी छायी रे ।।3।। खुशियों के रंग भरने…

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#Kavita by Vishva Vijay Prtap

” मेरे लिए ” ना बताया गया ना समझाया गया बस पथ से मुझे भटकाया गया ना मंजिल दिखी ना ही रस्ता दिखा चल पड़ा मै जिधर उधर कुछ ना मिला कुछ सोचा जो मैं उसे भुलवाया गया कुछ किया गर कोई ‘मेरे लिए ‘ बस पथ से मुझे भटकाया गया । गिरता रहा और गिरता गया गम पीता रहा,दुख सहता गया मोड़ आया भी मेरी जिंदगी में कही मुड़ने के बजाय,सीधा चलवाया गया कुछ…

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#Kavita by Vinita Badmera

कभी -कभी तुम उस जिद्दी बच्चे से रुठ जाते हो, और मांगने लगते हो चाँद। जबकि जानते हो तुम भी अपनी हद, पर मुझे परेशा कर सुख पाते होंगे, कभी छुपा लेते हो खुद को उस नीम के वृक्ष के पीछेे। जो साक्षी रहा है , हमारे इस अनोखे नेह का। तुम्हारी खोज कर रुआँसी होने ही लगती हूँ, तभी तुम अनायास ही सामने   आ विस्मित कर देते हो और हँसने लगते हो ताली बजाकर…

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#Kavita by Vinod Bairagi

मेरी कविता में दिल की धड़कन सुनाई देगी धड़कन के चलते वो सासे दिखाई देगी । मेरी सासे जो लब पर ही थाम लेता  । मेरे मरने का सिर्फ यही एक इनजाम रेता। तुम जरा देखो जो वक्त पर देती हे रोटिया । कोख में हीं वो मार देते हे बेटिया ~ मेरे लब पर वो मोहब्बत के सगम का स्वर हो । नन्ही सी मुनि सी ये बेटिया हर घर घर हो। ~ घर…

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#Muktak by Chandrakanta Siwal

मुक्तक माणिक ******* ऊँची- ऊँची कुर्सी की फैली बड़ी बिमारी है। गधे सियारों संग में वाचालों की अय्यारी है।। इसका झूठ उसका सच एक ख्याल सबका, मन्त्र मुग्ध सब आपस में ये कैसी लाचारी है। ************* मन से पढ़ती मन की बात हूक प्रेम की भाषा है।। आँख आँख में करती बात मूक प्रेम की भाषा है। प्रेम ही केवल एक विकल्प हर मर्ज़ की दवा दिल पे घाव लगे जब फूक प्रेम की भाषा…

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#Kavita by Shivansh Bhardwaj

कविता मैंने दुःख बहुत झेले हैं मैंने आँशु बहुत लिकाले हैं तेरे हुस्न का मै दीवाना हूँ तेरा मै ही असल दीवाना हूँ मै हूँ तेरे प्यार में तू है मेरे ख़याल में ज़िन्दगी है तू मेरी मै तेरा रखवाला हूँ मुझे तेरे लिये जिना तेरे प्यार में मारना है

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#Kavita by Tej vir Singh Tej

ब्रज वन्दन मनमोहक मनभावन मुरली, मधुबन में मनवा मोहे। स्याम सलोना सरल सुलक्षण,सखन सङ्ग सुंदर सोहे। निरखें नैन निरन्तर-निसदिन,नूतन नीकी नैनछवि। तरुण “तेज” तरु तृप्त-तुष्टि, तारै ‘तन-तृष्णा त्याग’ तोहे।

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#Haiku by Dr. Yasmeen Khan

हाइकु’ आत्मीय स्पर्श रूह भी महकाये जीवन भर। ———–///—-/// नई रीतियां चमकते से लोग जल्दी खींचते। ————///// अपनापन तिरछी चितवन मोहती मन। ————-//// कड़वी बातें तोड़तीं तन,मन बढ़े जलन। डॉ.यासमीन ख़ान

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#Kavita by Vinita Rahurikar

मैं हवा नहीं।। मैं हवा नहीं जिसे कोई अपने फेफड़ों में भर ले मेरी सारी प्राणवायु सोख ले और अपने अंदर की तमाम विषाक्तता मुझमे घोलकर दूषित और मलिन करके फिर बाहर उगल दे मुझे।। मैं हवा नहीं जिसके बिना कोई जी न पाये, हवा की तरह किसी के जीने के लिए जरुरी होना बिलकुल नहीं चाहती मैं।। मैं तो बस मैं हूँ, हूँ और रहूंगी अपने अस्तित्व के प्रति जागरूक, जीवन के सच्चे और…

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#Kavita by Bhuvnesh Kumar Chintan

ठिठुर ठिठुर ठिठुरन के बाद , थोडी सी गरमाई होली । मन में नयी उमंगें आब तक , सदा जगाती आई होली ।। रंगों का सैलाब उमडकर , हर एक चेहरे पर छाया है । इस पावन मौके पर दुश्मन भी , होली मिलने आया है । वैर भाव मिटवाती होली , करती बंद लडाई होली ।।*** रंग गुलाल अबीर लगाकर , सब ही होली खेल रहे हैं । क्यों चुप बैठें युवा आज जब…

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#Kavita by Ankit Chakarvarti

वीणा पाणी शारदे माँ ऐसीे मुझे शक्ति दे दो, जीवन मे जो भी लिखूं सार बना दीजिए प्रेम की करो सुबृष्टि मेरे अंग अंग मात, जोडने को इनको सितार बना दीजिए ।। चित में कवित्य साधना का माँ करो विकास, ज्ञान की पवित्र गंगधार बना दीजिए । आँख दिखाये वतन पर मेरे जो भी शत्रु, काटने को शीश तलवार बना दीजिए ।।

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#Kavita by Adil Sarfarosh

नेताजी जिंदाबाद  (गीत) हम तो ठहरे नेता जी जब सरकार में आयेंगे गाँधी-नेहरु के सपनों को ख़ाक में मिलायेंगे मिलने दो एकबार गद्दी लूटेंगे नोटों की गड्डी घोटाले पे घोटाले करके भ्रष्टाचार फैलायेंगे मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट मिल ही जायेंगे अगर न मिल पाए तो फिर दंगा भड़कायेंगे जनता तो मूरख है वोट हमें ही देगी बीस रुपया वाला पउआ चुनाव में पिलवायेंगे

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#Kavita by Vikram Gathania

स्त्री होना और प्रेम उस दिन तुम मुझसे बात करने को थीं तुम जब खड़ी हो गयी थीं जीने पर जानने मेरा हाल चाल अस्पताल में मैं सीढ़ियाँ चढकर तुम तक पहुँचता मैं बुदबुदाया था धीमे से क्या बात करनी हाथ की मदद भी ली थी कहने में मैं पहुँचता तुम तक ऊपर तुम एकदम गायब हो गयी थीं तब तो तुम्हारे पास एक सही मौका भी था मेरा हाल चाल जानने का पर तुम…

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#Kavita by Mahshar Ajnabi

आओ खेलें रंग गुलाल 🌷 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 लेके अब्दुल घर से गुलाल चले उधर से कन्हैया लाल सलमा पूजा तुम भी आओ हाथों में रंग ले हरा और लाल आओ खेलें रंग गुलाल 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 श्री गणेंश तुम करो उधर से इधर से बिस्मिल्लाह हम पढें गौर से देखो त्रिशूल को तुम ऊँ पढो हम अल्लाह पढें मिटा  दो  ये  भेद – भाव न तुम  छोटे न  हम  बङे खून  सभी का  एक रंग फिर आपस में…

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#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

इस होली मिले प्रेम से,बोले मीठी बोली कुछ तो बदलाव करे इस होली। …. रंग तो बहोत है इस त्यौहार मे पर निखार प्रेम रंग से आयेगा अगर हंसकर मिले हम उनसे तो वो भी बडते मुस्कुरायेगा नफरतो की दीवारे गिराकर चलो मिलके बनाये एक टोली। मिले प्रेम से……. …. है रंजिशे जिनके दिलो मे गुलाल उनके चेहरे पे लगायेंगे है रूठे जो यार अपने पुराने लगा के सिने से उन्हे मनायेंगे। छोडकर जीद अब…

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#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

मुक्तक खट्टी मीठी यादों का सिलसिला अच्छा रहा , उम्र से बडा होता गया पर  दिल से बच्चा रहा , तेरे नाम से दुनिया में जो मिला वही झूठा , एक तू और तेरा नाम ही हरदम सच्चा रहा।

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#Shayari by Beadab Lakhnavi

खूबसूरत हैं उन्हीं को आईना मैं बेचता , बेचता किडनी लहू और आत्मा मैं बेचता । रंग उल्फत का जो चाहो तुम लगाकर देख लो , रंग उल्फत के सभी मैं  हर जवां को बेचता । – पं. बेअदब लखनवी

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#Kahani by Manoj Karn

एन.आर.आइ बहू — अरे ! चड्ढा साहेब, देश छोड़ने की तैय्यारी मे पार्टी है क्या ? — नही पाजी ,आज बहू ब्याही जायेगी ! — यानी वो लड़की…..लिव इन रिलेशन वाली है ? — बिल्कुल नही ! बहू तो है ही पर अधुरी ! — अधुरी ? — आज मंगलसुत्र की रस्म अदायगी के बाद पुरी बहू हो जायेगी . — तो पहले किस रस्म से पनाह ली थी आप के परिवार मे ? –वहाँ…

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#Kavita by Sudesh Kumar Dikshit

राह में तेरी क्या कच्चे घर नही आते, तभी तुम्हें फकीर नज़र नही आते । दाद दूं शर्माने की या मुस्काने की, शब्द कहने को सनम नज़र नहीं आते । इस कदर टूट कर चाहा है दिल ने, तभी जहां के ताहने नज़र नहीं आते । सच बोलना बुरी आदत है हमारी, झूठ बोलने के बहाने नज़र नही आते । पीला दी “दीक्षित” को ऑंखो से इतनी, मदहोशी मे अब मयखाने नज़र नहीं आते ।

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#Lekh by Dr. Arvind Jain

अमेरिका  स्वर्ग या नरक —-डॉक्टर अरविन्द जैन भोपाल – ———————————————————————- हर व्यक्ति अपने घर को अपना घर कहता हैं जब तक वह अपने परिवार से न्यारा /अलग न हो जाये. उसके बाद उसे अपना स्वयं का घर, घर लगता हैं और जहाँ से अलग हो जाता हैं तो वह घर उसे घर जैसा लगता हैं .जैसे बहु को सास कहती हैं कि हमारी बहु ,हमारी लड़की जैसी हैं ,लड़की नहीं .इसी प्रकार home और house  …

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"#Lekh by Dr. Arvind Jain"