#Kavita by Sulaxna Ahlawat

सिर्फ एक दिन महिला दिवस मनाने से क्या होगा, झूठ के सहारे अपना मन बहलाने से क्या होगा। समाज में हर रोज पूजा होनी चाहिए महिला की, केवल दिखावे को यहाँ बातें बनाने से क्या होगा। त्याग की देवी है महिला और ममता का सागर है, बोलो इस कड़वे सच को झुठलाने से क्या होगा। कब तक समझते रहोगे पैरों की जूती महिला को, ईश्वर तो देख रहा है आवाज दबाने से क्या होगा। बात…

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#Kavita by Pinku Rajput

आज न जाने क्यों रोने का मन कर रहा है। आँचल में माँ के सो जाने का मन कर रहा है। ये गुजरती ज़िन्दगी को अब थमजाने का मन कर रहा हे। खबर लेने आये थे वो कभी इसी उम्मीद में आज फिर वे हाल होने का मन कर रहा है संस्क्रति को बचाने के लीए हर बढे शहर को गाव बनाने का मन कर रहा है तरक्की बांहे फेला कर गले लगाने को बेताब…

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"#Kavita by Pinku Rajput"

#Kavita by Bhuvnesh Kumar Chitan

शब्दों के अंगारे गीत ******** सुबह सलोनी ,भोर नयी , आईं कितनी , और गयी । भरी दुपहरी या ,हो शाम , दर दर भटकैं आठों याम ।। शब्दों के बंजारे गीत । अब तक रहे कुंवारे गीत ।।***** बडी तपस्या मेहनत से , शब्द शब्द जुड बन निकले । रात रात भर जतन किये , जाने कितने यतन किये ।। सह कर दर्द सँवारे गीत । अब तक रहे कुँवारे गीत ।।**** इस जीवन…

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"#Kavita by Bhuvnesh Kumar Chitan"

#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

छंद -नारी ———— यदि नारी रुष्ट होगी ,प्रकृति ना तुष्ट होगी । उस दिन नर का अस्तित्व मिट जायेगा।। ममता का रूप है ये ,समता स्वरूप है ये । अपमान हुआ तो सतीत्व मिट जायेगा ।। ब्रह्मा की वाणी है नारी ,विष्णु की गृहणी नारी । बिन नारी धरा से स्वामित्व मिट जायेगा ।। शिव अर्ध अंगिनी  है ,मानव की संगिनी है । नारी के बिना सारा व्यक्तित्व मिट जायेगा।। हलधर –9412050969

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"#Kavita by Jasveer Singh Haldhar"

#Kavita by Anil Uphar

—औरत —– रोज़ की भागम भाग सीने में दबाए दहकती आग वक़्त की मार, तानों की बोछार, दोहरी जिन्दगी को ढो रही सदियों से अपनों से छली गई, तंदुर में तली गई, समर्पण की त्रासदी को कब तलक पीती रहेगी ? हाँ – यह औरत है । सब कुछ सहती रहेगी । बीवी किसी की बेटी किसी की बहन किसी की माँ किसी की सब कुछ लुटाकर अपनों के बीच खुद को मिटाकर देहरी के…

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#Kavita by Arun Kumar Yadav

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ अभिवादन *********** जीवन की शुरुआत होती जिस पावन गोंद से । ममता ,स्नेह , सुसंस्कार बांटती जो आमोद प्रमोद से । निष्प्राण बनकर भी जो सबके जीवन में जान भरे । उसका हम सम्मान करे । उस नारी का सम्मान करे ।। कभी बहु तो  , कभी सास कभी बेटी तो, कभी माँ का एहसास उम्मीदों पर खरी उतरती जिस पर जग अभिमान करे । उस नारी…

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"#Kavita by Arun Kumar Yadav"

#Gazal by Anuj Tiwari

तलवार  से  है  जोर  है जुर्रत  जवाब की । देखा  कलम  से झुक गई गर्दन नवाब की ।। नाजुक हैं  फूल तो  बड़े  चाहे  तो मसल दें । लेकिन अदब में झुक गई टहनी गुलाब की ।। बेनूर  इन   फिजाओं   में  रंगत  नहीँ  रही । किसको पड़ी है फिक्र ये चमने-अजाब की ।। है जोर  बाजुओं  में की  पत्थर को तोड़ दे । पर प्यार में है खस्ता-ए-हालत जनाब की ।। देखो न देश लुट  …

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#Kahani by Sanjay Kumar Avinash

कल किसने देखा🌹 मन-मस्तिष्क में अठखेलियां जब हुंकार भरने लगे तो उसे नजरअंदाज करना संभव नहीं। आज भी उस रात की याद आती है तो मन व्याकुल हो उठता। नस-नस में कंपन शुरू हो जाती; मेरी जिन्दगी में अनायास आई और चली भी गई। अप्सरा या कोई देवी नहीं, वह मेहनत व मजदूरी करने वाली, सुशील व कर्मठ महिला थी, जो अपने साथ दो-दो बच्चों के भी बोझ उठा रखी थी। सुबह उठकर घर का…

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#Gazal by Dr. Yasmeen Khan

कोई पुरवाई चले जब यास्मीं। क्यों तिरा तन-मन जले तब यास्मीं।। ख़ुशबुएं अंगडाई लें जब बाग़ में। कह उठें क्यों सब ही के सब यास्मीं।। आज तो है बात कुछ सबसे अलग। इस तरह चहकी है कब- कब यास्मीं।। क्या तिरे मन में छुपा है तू बता। खोल भी दे अपने तू लब यास्मीं।। डाल से झटका मुझे, नोचा मुझे। कुछ नहीं बाक़ी बचा अब यास्मीं।। डॉ.यासमीन ख़ान

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#Gazal by Aditya Mourya

जिसे मैने अपना खुदा माना था आज वो ही मुझे भुला के बैठी है..। ज़िंदा हूं आज भी उसकी हसीन यादों मे… किसी और को वो अपना बना के बैठी है। कर के मेरे इस  दिल के टुकड़े टुकड़े वो अपना दिल किसी और से लगा बैठी है…। कल तक जो चलती थी हाथों में हाथ लेकर आज वो ही अपना हाथ किसी और को थमा बैठी है। कवि आदित्य मौर्या कंटालिया

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#Muktak by Manish Soni

फकत इक बार की मेहनत, से जो तुम हार जाओगे, नई राहों, में चलने से, अगर तुम जी चुराओगे, ये उम्मीदों, की किरणें हैं, इन्हें पहचानना सीखो, पड़ेगी जब ये किस्मत पर, जहाँ में जगमगाओगे || #मनीष

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#Gazal by Adil Sarfarosh

ग़ज़ल इस ज़माने में यारों अब छल है बहुत दिल लगाकर दुखाना आजकल है बहुत अपनी गलती को कोई दोष देता नहीं औरों की गलतियों में दखल है बहुत कैसे करोगे असली-नकली में फर्क एक ही चीज़ की यहाँ नक़ल है बहुत सिर्फ कपड़ों को धोने से क्या फायदा मन में जब तक तुम्हारे मल है बहुत कौन कायम है अपनी ही बात पर बाबू चुनाव है दल-बदल है बहुत लूटकर खा गए सब मेरे…

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#Kavita by Raj Malpani

.”नारी शक्ति”.. ईश्वर ने भी इस नारी का सदा किया सम्मान धन की देवी लक्ष्मी शक्ति  दुर्गा की  पहचान हर परीवार का अनमोल गहना है नारी शक्ति हर घर को स्वर्ग बनाए करके अब हरी भक्ति बलिदान जिनकी भावना है उनको नारी कहते नारी शक्ति का सम्मान स्वयं ईश्वर भी करते अजन्मे बालकों का पालन अपने पेठ में करती अपने ममता तले हर बच्चों का ब्रह्ममंड रचाती नौ महीने तक हर कष्ट  उठाकर सहेती है…

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#Gazal by Ishaan Sharma Anand

जमाने भर का विष अक्सर लबों से मैं लगाती हूँ। मुझे वरदान है कोई जो फिर भी मुस्कुराती हूँ।। . बदन को घूरती नज़रें मुझे हर रोज़ चुभती हैं, जुबाँ खामोश रखती हूँ, जिगर पर चोट खाती हूँ।। . तले छत के रहोगे तो तुम्हारा वो मकाँ होगा, मुझे है इल्म ऐसा कि मकाँ को घर बनाती हूँ।। . मेरे दिल की तबीयत को समझ पाया नहीं कोई, नज़र में अश्क रखती हूँ, लबों से…

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"#Gazal by Ishaan Sharma Anand"

#Kavita by Tej Vir Singh Tej

नारी महिमा पल में सौम्य-शांत,पल में ही ये शमशीर दुधारी है। माता,भगनी,सुता रूप में,जीवन की उपकारी है। नारी का है रूप जगत में,अद्भुत,अनुपम-अति उत्तम। देवी का अवतार धरा पर,हुई अवतरित नारी है। क्षमा,त्याग और प्रेम-अहिंसा,नारी हिय की खान बने। सृजन का आधार धरा पर,जननी का सम्मान बने। खुशियों की वर्षा हो उस घर,जिसमें वास करे ‘बेटी’। धरती पर ही स्वर्ग नारि के,तप से हर स्थान बने। नारी रूप सदा पूजित है,वेद-पुराण बखान करें। सुर-नर,मुनिजन सदा…

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"#Kavita by Tej Vir Singh Tej"

#Kavita by Pankaj Kumar Sharma

खुदा का अप्रतिम कृति हो तुम हर घरों को करे रौशन वो दीप ज्योति हो तुम कभी माँ कभी बहन कभी बहु कभी बेटी हर रूपों में खुदा का एक नया रुप हो तुम विश्व कि संचालनी हो तुम कोमल पर शक्तिशालनी हो तुम तुम से ही तो जग निर्मित है परहित के लिये अर्पित हो तुम हे नारी ! प्रेम हो तुम ,स्नेह हो तुम वात्सल्य हो तुम ,दुलार हो तुम बच्चो के लिये माँ का प्यार…

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"#Kavita by Pankaj Kumar Sharma"

#Kavita by Dr. Pratibha Prakash

नारी तू शक्ति है सृष्टि के तू कण कण में नारी तू शक्ति है शिवाला गिरिजा और और मंदिर में प्रथम भगौती गुरुद्वारों में भक्ति प्रेम प्रदर्शन में नारी तू शक्ति है……. गार्गी मैत्रेयी विदुषी तू अपाला पी जाती तू विष का भी प्याला सहनशक्ति तू धैर्य की देवी,विकराल बनी चण्डी रण में नारी तू शक्ति है……… जीजा पदमिनी और अहिल्या तू जशोदा देवकी कौशल्या तू लक्ष्मीबाई सी योद्धा,ऊर्जा बनी तू जन जन में नारी…

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"#Kavita by Dr. Pratibha Prakash"