#Kavita by Alok Trivedi

बरसाती मेंढ़क सा टर्रटराता मंज़िल की चाह में राहों की धूल खाता बिखरता टूटे हार की तरह जाल में फंसे पंछी सा काँटा निगली मछली सा तड़फड़ाता जिये जा रहा हूँ मौत के नशे में चूर होने के ख्वाब से ज़िन्दगी के नश्तर को पीठ दिखाता न भूख है न प्यास फिर भी एक अनंत सागर पिए जा रहा हूँ जिए जा रहा हूँ सीने को कर के पत्थर सा दिल को पहना कर जिरह…

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"#Kavita by Alok Trivedi"

#Kavita by Vishal Shukla

धरा धरी तो मइया रोई बाप कलेजा चाक हुआ देख खिलौना भैया से हर दिन दो-दो हाथ हुआ सजी चुनरिया मुझ पर सोहे दुनिया की आंखों में गड़ गई जब-जब निकली घर से बाहर कुछ ठिठकी, कुछ सहम गई यह है मेरी शंका अपनी या है इन नजरों का दोष नहीं, नहीं यह सच है मेरा स्वप्न नहीं, पूरा है होश रिश्ते-नाते बड़े करीबी पर सबकी आंखें कुछ बोलें जब भी देखें मेरी जानिब यहां-वहां…

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"#Kavita by Vishal Shukla"

#Geet by Brij vyas

घूँघट में अठखेली करते , प्रियतम मेरे मन भाव रे !! जब हटा आवरण देखोगे तो , वे गाल गुलाबी होंगे ! अधरों पर लरजन थिरकेगी , दो नयन शराबी होंगे ! स्वेद कणों संग भाल पे टिकुली – झूमेगा वह बोर ठाँव रे !! जब लरजेगी कानों की लव औ , झूम रहा होगा झुमका ! तब कमर कंदौरा हिचकोले ले , मारे प्यारा सा ठुमका ! कंठमाल अधर में झूले गुमसुम – चूनर…

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#Kavita By Raginee Gupta

स्त्री हाँ स्त्री हूँ पुरुषों से तुलना स्वीकार नहीं है, हाँ स्त्री हूँ स्वयं की शक्तियों से अंजाम नहींं हूँ, हाँ स्त्री हूँ अपनी सीमायें जानती हूँ, हाँ स्त्री हूँ अपनी रक्षा करना जानती हूँ, हाँ स्त्री हूँ उस सदी से इस सदी का सफर मैंने भी तय किया है बहुत बदलाव देखे है बहुत बदलाव लाए है मैंने औरों के लिए लडी़ थी अब स्वयं के लिए लडूंगी क्योंकि स्त्री हूँ

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"#Kavita By Raginee Gupta"

#Shanikayen by Harprasad Pushpak

डाकटरका मर्ज मरीज से भी बड़ा है। तभी तो 20 साल से एक ही अस्पताल मे पड़ा है। …………. डाकू ने कहा सरदार पुलिस का भय है सरदार ने कहा आगे बढो़ रेट तय है ……….. डाकू और नेता में समानता दोनों अदृश्य एक लूट के बाद दूसरा जीत के बाद ……….. पहले चाय फिर मिठाई हर दफ्तर का दस्तूर आदमी की हेसियत तौलता है खुल कर बोँता है …………….. सिपाही ने चोर पकड़ा चोर…

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#Lekh by Kirti Gandhi

राजस्थान में  लोकपर्वके रुप  में गणगौर बड़ी धूमधाम से मनाया  जाता है ।यू तो गणगौर स्त्रियों का त्यौहार है किंतु कमोबेश पूरा परिवार ही इसमें शामिल रहता है। इसमें भगवान शंकर और पार्वती की पूजा ईश्वर और गणगौर के रुप में की जाती है ।होलिका दहन के दूसरे दिन होली की राख एवं मिट्टी मिलाकर 16 पिंडिया बनाई जाती है ।जिन्हें ईश्वर गणगौर मानकर इनकी पूजा की जाती है ।        मान्यता है…

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#Kavita by Ram Shukla

हे शम्भुनाथ घटघटवासी,जय अमरनाथ गौरास्वामी | हे प्रलयनाथ संकटहारी,देवाधिदेव अवघडदानी || खोलो खोलो अब नेत्र प्रभु बढ़ रहा अधम अत्याचारी | लुट रही आबरू बाला की बढ़ता जाता है ब्यभिचारी|| निज देशद्रोह षन्यंत्रो के विषधर अब पाले जाते है | विद्या के मन्दिर मे अब गद्दार छिपाए जाते है || था दिव्य्प्रकाषित आर्यवर्त चहुँओर प्रेम प्रवाहित था | धर्मध्वजा और ज्ञान यज्ञ का फैला तेज प्रकाश यहाँ || सूखे भूखे और भ्रस्टो से अब बुझा…

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"#Kavita by Ram Shukla"

#Kavita by Ved Pal Singh

ज़माने से फिर भी पाना चाहता हूँ………. नही देगा ज़माना मैं जो चाहता हूँ, ज़माने से फिर भी पाना चाहता हूँ। सब पत्थर दिलों में जज़्बा जगाके, हिम्मत-ओ-ताक़त का पाठ पढ़ाके, भटके हुए इंसानों को राह दिखाके, अमन और भाईचारा उन्हें सिखाके, ज़हां से नफ़रत मिटाना चाहता हूँ। थोड़ा सोच लूँ कुछ करने से पहले, यूँ छलके ना प्याला भरने से पहले, मिट ना जाए चाहत मरने से पहले, ज़मीं पे रंग-ए-ज़ुल्म भरने से पहले,…

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#Kavita by Kavi Deep Avasthi

दिल की क्या ख़ता? इक दिन मेरी साँसो ने मुझसे पूँछा। क्यूँ तुम लंबी साँसे लेते रहते हो? मै बोलूं इससे पहले दिल बोल पडा। तुम मुझ पर इतना दबाव क्यूं देते हो? दिल के बाद मेरी आंखे भी बोल उठी। क्यूं अश्कों से मुझको रोज भिगोते हो? तभी कंठ ने धीमे स्वर में पूंछ लिया। क्यूं पीते हो घूंट,सिसकियां लेते हो? रातें मुझसे कह उठी बतलाओ तो। क्यूं रातो मे नही कभी तुम सोते…

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"#Kavita by Kavi Deep Avasthi"

#Kavita by LATA RATHORE

Antardhwani Is chilchilaati dhoop mai, in badalo ki oat mai… Tapti hui , chipti hui Is aasma k rang si bikhri hui , ulji hui…. Anjaan raaho mai ghumti , bebaat yuhi jhumti… Aanchal mai chup jati kabhi , kabhi daudti besabr si… Ak waqt se bewaqt hi yu waqt ko bas dundti… Mere chirantan chitt ko jhakjorti ,fir raundti Awaj ak awaj mere astitav ko hai khojti…..

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#Kavita by vinay kumar samadhiya

” संसार बिका ” बिकता है सब कुछ देखो पानी पैसा प्य़ार बिके बिकती देखी मानवता मानव के व्यवहार बिके हाव बिके भाव बिके जीवन के संभाव बिके पड़ी ज़मीं पर एक हकिकत यहां ममता के उदगार बिके नहीं मरे हैं कहीं ज़मीं पर पद लोलुप,चम्चा और नेता दूनियां में घरवार बिके नेता कुर्ता फार दिखे सडे-गले से मुह ले लेकर ज़हर बुझे आचार दिखे मरा शर्म का पानी सबका आँखो के लज्जा द्वार बिके…

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"#Kavita by vinay kumar samadhiya"

#Kavita by Anita Mishra

हम किसी से कम नहीं @@@ हम किसी से कम नहीं भारत के संतान है हम जो दम है और किसी मे नहीं, युवा -बच्चे ,नारी -नर साहस के पुतले हैं होते सीमा पर शहिद अपने देश के खातिर एक ने दस -दस को मारा दिखा दिया , नहीं झुके है नहीं झुकेन्गे केसरिया चोला मेरा हमसे रण मे जीत जाए किसी मे इतना दम नहीं हम किसी से कम नहीं l खंजर सीने पर…

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#Lekh by sanjay verma ‘drushti’

कंडों का होलीदहन: पर्यावरण की पक्ष में कंडे की होली जलाएं ,लाखों गायों का सालभर का खर्च निकल जाएगा । ये कार्य  पर्यावरण के हक़ में एवं  गो सेवा के लिए  पुनीत कार्य होगा ।आज भी कई क्षेत्रों में दाहसंस्कार में कंडों का ही पूर्ण रूप से उपयोग किया जाता है। जो की पर्यावरण व ,लकड़ी के हित  में है  ।  वर्तमान में  मोहल्लों में कई स्थानों पर होलीदहन  किया जाने लगा है ।सुझाव है…

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"#Lekh by sanjay verma ‘drushti’"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

गर बाज़ार में मिलता प्यार, तो खरीद लेते हम भी ! होता बिकाऊ अगर ऐतबार, तो खरीद लेते हम भी ! न होते वीरान गुलिस्तां न होती ये सर्दियां गर्मियां, मिल जाता मौसम खुशगवार, तो खरीद लेते हम भी ! न होते कभी गम न बहता आंसुओं का दरिया कभी, होता खुशियों का गर बाज़ार, तो खरीद लेते हम भी ! न होती ये झंझटें न होता ये बलवों का खेल ख़ूनी ही, मिल जाता…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"

Samiksha/Lekh by Dr. Brhmjeet Goutam/Ramesh Raj

विरोध की कविता : “ जै कन्हैयालाल की “ [ प्रथम संस्करण ] + डॉ. ब्रह्मजीत गौतम —————————————————————— ‘ तेवरी ‘ विधा के प्रणेता, कथित विरोधरस के जन्मदाता श्री रमेशराज की लघु कृति ‘ जै कन्हैयालाल की ‘ आज के समाज और समय की विसंगतियों और विद्रूपों का जीवंत दस्तावेज़ है | 105 द्विपदियों से समन्वित इस कृति को कवि ने ‘ लम्बी तेवरी ‘ नाम दिया है | प्रत्येक द्विपदी में एक प्रथक भाव…

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"Samiksha/Lekh by Dr. Brhmjeet Goutam/Ramesh Raj"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मुझको तेरी याद कहाँ फिर से ले आई है? हरतरफ ख्यालों में फैली हुई तन्हाई है! भटके हुए हैं लम्हें गम के अफसानों में, साँसों में चुभती हुई तेरी बेवफाई है!

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"#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev"

#Kavita by Shambhu Nath

हम स्वतंत्र भारत के ॥ सच्चे पहरे दार है॥ परतंत्र मेरा काम है॥ गणतंत्र के गुलाम है॥ रूकते नहीं कभी हम॥ थकते न पाँव मेरे॥ चढाते है शिखा पे॥ जहा कठिन घटा घनेरे॥ दिया है जिसने चमन मुझे॥ उनको मेरा सलाम है॥ परतंत्र मेरा काम है॥ गणतंत्र के गुलाम है॥ सच का साथ देता ॥ संकट भी दूर रहता॥ बढे चलो बढे चलो॥ मन हमारा कहता॥ सच्चाई के सिवा कोई॥ दूजा नहीं लगाम॥ परतंत्र मेरा…

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"#Kavita by Shambhu Nath"