#Gazal by Ajeet Singh Charan

न रदीफ न काफिया, न गजलों की बहर पता है जहां तुम्हे पहली दफा देखा,हमें वो शहर पता है लुटा बैठे जो हम दिल की दौलत, मोहब्बत में ये वो जानते हैं, जिन्हें तेरी नज़रों का कहर पता है डच नहीं लगता है आजकल इन सांप बिच्छुओं जबसे जमाना देखा ,हमें आदमी का जहर पता है चाहे जितने ढहा ले जुल्म , जमाना ये जालिम इक दिन तो आयेगी ,उम्मीदों वाली सहर पता है @अजीत…

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"#Gazal by Ajeet Singh Charan"

#Gazal by Devendra Kumar Dubey

कभी रोना,कभी हंसना-हंसाना भूल जाता है, अजब इंसान है,गुजरा जमाना भूल जाता है। बड़ा गुमसुम सा रहता है,सफर में जिंदगी के वो, छुपाकर अश्क अपने वो,रुलाना भूल जाता है। कभी जो गुनगुनाता था,मोहोब्बत के तरानो को, बड़ा खामोश रहता है,वो गाना भूल जाता है। मिली ना है खुशी उसको,गमों को रोज सहता है, वो दीपक भी खुशी के अब,जलाना भूल जाता है, बड़ी मासूम सी हरकत,किया करता था वो मुझसे, वो हरकत भी मनाना भी,सताना…

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"#Gazal by Devendra Kumar Dubey"

#Bal Kavita by Gopal Kaushal

बोलो बलवान कौन—? गधा कहें मैं पहलवान सब मुझ पर मेहरबान ।। कुत्ता कहें मैं हूँ महान बंगलो में मेरी है शान ।। बिल्ली कहें मैं कप्तान चूहे भागे  छोड़ मैदान ।। मुर्गा कहें मै लेता तान समय देखता ये जहान ।। सबका अपना है स्थान काम से  बढ़ता है  मान ।। 👉 गोपाल कौशल

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"#Bal Kavita by Gopal Kaushal"