#Kavita by Dr. Yasmeen Khan

अकेलापन’ अकेलापन भी अकेला कहाँ होता है ख़ुद में समेटे रखता है करोड़ अहसास बीते ज़माने की धमाचौकड़ियां हँसी,मज़ाक़ों की

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