#Kavita by Imrana

नारी के रूप ************* महिलाओं से पुरुष हैं जन्मे उनको मानते हो अभिशाप बदल लो तुम अपने तेवर को बहुत पड़ेगा तुम पर पाप गाय सी सीधी समझकर करते हो उस पर अत्याचार काली रूप भी उसी का है माननी पड़ेगी तुमको हार

Share This
"#Kavita by Imrana"

#Kavita by Alok Trivedi

जब से पैदा हुआ मैं गेंद सा लुढ़कता ही रहा जिसने चाहा फेंक दिया मार दिया, फोड़ दिया फिर जोड़ लिया पर मैं लुढ़कता रहा कभी हाथों में लिया ठुकराया पैरों से कभी मैंने शिकायत न की बस लुढ़कता रहा रहा अपनी धुन में मगन कभी उड़ा गगन में कभी धरा पर गिरा मैं तो बस लुढ़कता ही रहा #यात्री

Share This
"#Kavita by Alok Trivedi"

#Kavita by LATA RATHORE

Meri kahani kyu har pal muj par bhari hai? is sawal ki alag kahani hai, uljhe suljhe vicharan karte man ne samji jimedari hai, baba k aam k ped k niche suni kahani hai, adhmaile kapdo mai baithi buddi ankhon mai pani hai, behna ki suni mang ko bharwane ki jimedari hai, baba k budde kandho k aram ki ab bari hai, ak jeep mai aate babu ko yuhi niharti…. angan k kone mai baithi…

Share This
"#Kavita by LATA RATHORE"

#Kavita by sanjay verma ‘drushti’

विरहता **** विरहता के समय आती है यादें रुलाती है यादें पुकारती है यादें ढूंढती है नजरे उन पलों को जो गुजर चुके सर्द हवाओ के बादलों की तरह खिले फूलों की खुशबुओं से पता पूछती है तितलियाँ तेरा रहकर उपवन को महकाती थी कभी जब फूल  न खिलते उदास तितलियाँ भी है जिन्हे बहारों की विरहता सता रही एहसास करा रही कैसी  टीस उठती है मन में जब हो अकेलापन बहारें  न हो विरहता…

Share This
"#Kavita by sanjay verma ‘drushti’"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

हम तो अपनों को, अपना संसार समझ बैठे ! उन्हें ज़िन्दगी की नैया का, पतवार समझ बैठे ! रफ़्ता रफ़्ता फंसते गए हम उनके कुचक्र में, हम तो उसी को ख़ुशी का, बाज़ार समझ बैठे ! कैसी हैं फितरतें उनकी न समझ पाये हम, ज़ख्म देने पर भी उनका, इख़्तियार समझ बैठे ! पागल थे कि न समझे मन की गांठों को हम, उनकी अदा को उल्फ़त का, इज़हार समझ बैठे ! भूल ही गए…

Share This
"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"