0204 – Anand Singhanpuri (त्रिदेव राज आनन्द किशोर)

Kavita : ”दर्द की चुभन ” दर्द के मयखाने में, बैठा हूँ | कोई आवाज तो दे दो, सुनलो हमारी नगमों गजल जरा उठकर दाद तो दे दो || उसकी विरहन मासूम अदायिगी | किस तरह कायल कर गई , चुभती दिल पर दर्द की अंगड़ाई , हमें घायल कर गई अब आस लगाये हैं , कोई हमें साथ तो दे दो || सुनलो हमारी नगमों गजल जरा उठकर दाद तो दे दो || जी…

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"0204 – Anand Singhanpuri (त्रिदेव राज आनन्द किशोर)"

0203 – Brij Vyas ( Bhagwati Prasad Vyas “Neerad” )

Kavita : ” धर्म हमारा बड़ा लचीला ” मन्त्रों में , वेदों में है वो , पत्थर की मूरत में है वो | ना मानो तो निराकार है , मानो तो घट घट में है वो | नहीं बंदिशों में बाँधा है – सचमुच है यह बड़ा रंगीला || मात-पिता हैं तीरथ जैसे , गुरुजनों की बात निराली | दुखीजनों की पीड़ा समझी , टल जाती ग्रह दशा हमारी | साधु-संतों ने ज्ञान दिया है…

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0202 – Shanti Swaroop Mishra

  Gazal : डर है कि कहीं वो, बेवफ़ा न हो जाए ! बे-सबब ये ज़िंदगी, तबाह न हो जाए ! वो तो बेख़बर है दुनिया की चालों से, फंस कर कहीं वो, गुमराह न हो जाए ! फ़ितरत बदलते नहीं लगती देर यारो, गलती से कहीं उससे, गुनाह न हो जाए ! दोस्ती का भरोसा भी न रहा आज कल, कहीं प्यार किसी से, बेपनाह न हो जाए ! सोचते रहिये दोस्त बस ये…

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"0202 – Shanti Swaroop Mishra"

0201- Ved Pal Singh

कविता : मेरा गुनाह ………………………. इक गुनाह मैं बार बार करता हूँ, के कातिल को अपने घर लाता हूँ। क्योंकि सिर्फ खुदा से डरता हूँ, बाकी किसी से खौफ नहीं खाता हूँ।। जानता हूँ इस जमाने को मैं खूब, रोज़ ये मुझको पागल कहता है। मुझको मेरे ही कायदों से हटाने की, ये हर वक्त जुगत में रहता है।। मैं अपने कायदों से फिसलता नहीं, बल्कि और चिपकता जाता हूँ। क्योंकि सिर्फ खुदा से डरता…

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"0201- Ved Pal Singh"