0204 – Anand Singhanpuri (Tridev Raj Anand Kishor)

Kavita : कुछ शब्द बाकी हैं तुझको क्या दूँ, हिसाब दूँ। या किताब दूँ आवाज दूँ या ख़िताब दूँ। सुन तो लो, अभी भी कुछ शब्द बाकी हैं। तेरे मेरे बुनियाद के कुछ फरियाद के कुछ अफ़साने है उन हंसी जज्बात के कुछ शब्द बाकी हैं।। उन लम्हों की दरमियाँ गूंजती चहुँ छोर मन मे फुदकते उचकते ख़्वाब भरे आशाएं कुछ शब्द बाकी हैं।⁠⁠⁠⁠ Kavita : ”जख्म ” जख्म आज भी मेरे हरे हैं |…

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0203 – Brij Vyas ( Bhagwati Prasad Vyas “Neerad” )

Kavita : ” ये आंसू के धारे हैं ” !! दर्द है जगा कहीं , आंखों में नमी नमी ! यादों के जंगल में , कांटों की कमीं नहीं ! कभी छुअन , बनी तड़पन – हम आँसूं भी वारे हैं !! दूर तक है खामोशी , आस है बुझी बुझी ! प्यार की पहेलियां भी , क्यों रही सदा उलझी ! रहे मगन , किये जतन – ये आँसूं भी हारे हैं !! खुशी…

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0202 – Shanti Swaroop Mishra

  Gazal : बिठा दें चाहे लाख पहरे, ये जमाने वाले ! मगर घुस ही जाते हैं, दिल जलाने वाले ! कर सकते हैं राख उनको भी ये शोले, भला कहाँ सोचते हैं ये, घर जलाने वाले ! अब तो मदद करना भी गुनाह है दोस्तो, नहीं हैं कम इधर, इलज़ाम लगाने वाले ! बड़ा बेरहम है आज का ये जमाना दोस्त, लापता हो जाएंगे, तुझपे जाँ लुटाने वाले ! कहाँ फंस गए ठगों की…

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"0202 – Shanti Swaroop Mishra"

0201- Ved Pal Singh

कविता : हम बहुत करते हैं जब करते हैं ……… हम वो नही करते हैं जो सब करते हैं, मगर सब कहते हैं कि गजब करते हैं। भले गुज़ार दें वक्त खाली कितना भी, मगर हम बहुत करते हैं जब करते हैं। ज़िंदगी ने हमें सताया भी है कई बार, मगर फिर भी उससे हम कब डरते हैं। हम चलने वाले हैं उसूलों की राहों पर, खुदा में यकीन बड़ों का अदब करते हैं। रौशन…

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"0201- Ved Pal Singh"