#Kahani by Ajeet Singh Avdan

कहानी – ( समाज ) हरखू लकड़ी काटने का काम करता था, आज वह कुछ देर से जंगल के उस हिस्से में पहुँचता है जहाँ कटाई का काम चल रहा है, उसके साथी एक पेड़ की छाया में बैठे आराम कर रहे हैं, सब लोग उसके देर से आने का कारण पूँछते हैं, तो वह बताता है कि उसकी जोरू पेट से है जो कि आज भोर से ही तकलीफ में है । अरे यार…

Share This
"#Kahani by Ajeet Singh Avdan"

#Kavita by Jyoti Mishra

जो अक्सर बाहर  मौन रहते हैं वह भीतर तूफान लिए रहते हैं ऑखों में  सागर की लहरें मचलती  है होठों पर  लेकिन वो मुस्कान लिए रहते हैं ख्वाहिशें हजारों सीने में दफन होती हैं अपनी ही मौत का वो सामान लिए फिरते हैं पलकों पे ख्वाब बेबस रातों को टहलते हैं होती नहीं शब जिसकी वो शाम लिए फिरते हैं हर सांस पे होते हैं जख्मों के निशां लेकिन मरहम लगाने औरों को , हाथों…

Share This
"#Kavita by Jyoti Mishra"

#Kavita by Meghvrt Arya

किसे देखती हो तुम गौरैया कौन तुम्हें बुलायेगा गंगा को भागीरथ लाये तुम्हें कौन ले आयेगा आज दुनिया ऑनलाइन है किसके पास आज टाइम है चाँद मंगल पर पानी ढू़ढ़ते घर की गौरैया गायब है | किसे ढू़ढ़ती हो तुम गौरैया कौन दाना तुम्हें चुगायेगा हाथी को ले आये थे भीम तुम्हें कौन ले आयेगा दुनिया आज स्वार्थी है तुमसे वो क्या पायेगा परग्रही पूर्वजों को ढू़ढ़ते घर की गौरैया गायब है | किसे सोचती…

Share This
"#Kavita by Meghvrt Arya"