#Kavita by Shabnam Sharma

कागज़ ***** शायद नहीं जानता ये अबोध बालक, इस कागज़ के टुकड़े की कीमत, तभी मरोड़ रहा, फाड़ रहा और हँस रहा। हो जायेगा बड़ा, सिखायेगा यही कागज इसे सबक, जब सामने आयेगी पोथी, पैसा और हर खाना कागज़ में लिपटा, बन जायेगा कागज़ ही उसकी कसौटी कभी रिजल्ट, तो कभी परीक्षा, कभी प्रश्न तो कभी उत्तर, कभी चिट्ठी तो कभी जवाब। कभी रसाले तो कभी अखबार, कभी हँसी, तो कभी दुलार। नहीं होगा उसका…

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#Gazal by Dr. Yasmeen Khan

हाँ, शिकायत का कभी मौक़ा न मिल पाया मुझे। मैं वो पत्थर हूँ कि हर ठोकर ने सहलाया मुझे।। तल्ख़ रहना तो मेरी फ़ितरत में है मजबूर हूँ। वक़्त ने हर दौर में ज़ह्राब पिलवाया मुझे।। रूह मेरी काँपकर सचमुच ठिठककर रह गयी। आईने ने रूप जैसा आज दिखलाया मुझे।। इस गिरह को खोलने में ही लगी रहती हूँ मैं। कौन है जिसने हमेशा मुझसे उलझाया मुझे।। जिसके कहने पर कोई बस जाए दिल में…

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#Kahani by Harprasad Pushpak

अभिनय (लघु कथा ) ——————————- लम्बी दूरी की रेलगाड़ी जंक्शन पर आकर रूकी।यहां से कुछ डिब्बे और जुड़ने थे ।इस लिये टे्न को कुछ समय रूकना था ।अचानक एक दस बारह साल का एकलड़का रोता हुआ डिब्बे में चढ़ा ।हाथ में कटोरा लिये चीख चीख कर आंसू बहा रहा था वह हाथ से ईशारा कर कहता जा रहा था वह दूर चादर में लिपटा मेरा बाप थोड़ी देर पहले ही मरा है उनके पास मेरी…

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# Kavita by Imrana

नारी के रूप =============== महिलाओं से पुरुष हैं जन्मे उनको मानते हो अभिशाप बदल लो अपने तेवर को बहुत पड़ेगा तुम पर पाप गाय-सी सीधी समझकर करते हो इस पर अत्याचार काली रूप भी उसी का है माननी पड़ेगी तुमको हार। -इमराना

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"# Kavita by Imrana"

#Kavita by Vinita Rahurikar

सृजन…. हर रोज कलम लेकर न जाने क्या-क्या लिखती हूँ मैं.. कभी रंग और ब्रश लेकर कैनवास की परतों में ग़ुम हो जाती हूँ….. तुम समझते हो मैं लिखती हूँ कविता बनाती हूँ तस्वीर…. नहीं कलम और रंगों से मैं करती हूँ सृजन स्वयं का हर क्षण एक नई मनचाही “मैं”का।।

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"#Kavita by Vinita Rahurikar"

#Kavita by Jasveer Singh Haldhar:

छंद –देश राग —————- कोई फांसी चूम रहा,कोई भूखा घूम रहा । कोई तो बताये मुझे कौन जिम्मेदार है ।। कहीं बलात्कार होवे ,आतंकी प्रहार हीवे । घोटालो पै घटालों का कैसा कारोबार है ।। उग्रवावाद के द्वंद्व का ,सांप्रदायिक गंध का। नेता और नीति का ये कैसा सरोकार है ।। संस्क्रति के विनाश का ,देश के उपहास का । शिक्षण के संस्थानों में कौन सूत्रधार है ।। हलधर –

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"#Kavita by Jasveer Singh Haldhar:"

#Gazal by Vinod Bairagi

स्न की हसीना ओ का दीदार हु में। दिल का सफर तो धड़कन करती हे उस के लबो का वो  प्यार हु में।। देखने लगा में इन अँधेरी रातो में मुझे देखा कर तो चादनी भी सरमा गई। मोहब्बत के सपनो में वो आ गई ।। इन आखो में से वो समन्दर का पानी आ गया । इश्क  के प्यार ने दिल को रुला दिया। माली की बागियों से खुसबू आने लगी हे। लब्बो के…

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#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

चाँद बादलों में छुपे छुपे चकोर हो गया , बात मुँह में रखी फिर भी शोर हो गया , कुछ देर हम उनके ख्यालों में खो क्या गये, हमें पता ही नहीं चला कि कब भोर हो गया । ~ सौरभ दुबे ” साहिल”

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#Sazal by Gayaprasad Mourya , Rajat

सजल *********** अपना ही ये चेहरा अक़सर डराता है मुझे . अपना ही अब पराया  नज़र आता है मुझे . मैं हांथों में बुत बन के रह गया हूँ उसके , हर रोज़ मिटाता है खुद ही बनाता है मुझे . मिटटी है वतन की कसम नही खा सकता, दगा दे सकता वो ऐसा नज़र आता है मुझे . अपनी महफ़िल से  रुसवा कर दिया तुमने , गैरों की बस्ती में देखूं कौन बिठाता है…

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#Kavita by Kishor Sagar Chhipeshwar

रानी अवंती बाई बलिदान दिवस विशेष उस वक्त का आलम ना  पूछो न जाने क्या क्या मुसीबत पड़ी थी अपने वतन के खातिर रानी लड़ी थी कौन कहता है कमजोर होती है नारी वो रानी तो तलवारो से खेली साहसी बड़ी थी कापे जो अंग्रेज कायर की तरह जैसे सामने साक्षात दुर्गा खड़ी थी जूनून था तो सिर्फ आजादी का हमको वतन से मोहब्बत बड़ी थी”

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"#Kavita by Kishor Sagar Chhipeshwar"