#Lekh सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक समीक्षक: एम. एम. चन्द्रा

अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने आने वाली चुनौतियां कम नहीं होती. पुस्तक में भूमिका का न होना एक तरह अच्छा ही हुआ है. अब पाठक अपनी स्वतंत्र सोच से पुस्तक पढ़ने का साहस जुटा सकते हैं. क्योंकि देखा जाता है यदि पुस्तक में किसी बड़े लेखक की भूमिका…

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

तेरे बगैर मैं तो तन्हा जिया करता हूँ! शामों-सहर मैं तुमको याद किया करता हूँ! जिन्द़गी थक जाती है करवटों से लेकिन, नींद में भी तेरा मैं नाम लिया करता हूँ!

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#Muktak by Manish soni

इस रंग बदलती दुनिया के, इंसान भी बड़े निराले हैं, बाहर बाहर से उजले हैं ये, पर अंदर से काले हैं, सच्चा व्यक्ति कोई न दिखता, किस पर आज यकीन करें??? सच का कोई निशां नहीं, बस भरे झूठ के प्याले हैं!!!

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