0209 – Pratap Singh Negi

Kavita : “ अलविदा ” चला गया वो कल , अपनी निशानी छोड़ कर I ता – उम्र भूला ना सकूँ एक ऐसी  कहानी छोड़ कर I तडपता रह गया ये दिल मेरा प्यासा I हो गया , वो रुखसत , पलकों में पानी छोड़ कर I निगाहें , ताकती रह गयी मेरी उसको I वो जुदा हो गया कहा कर , अलविदा मुझको I Kavita : “ अपने पराये ” कहाँ गए  वो  रिश्ते …

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"0209 – Pratap Singh Negi"

B 0208 – Ramesh Raj

Kavita : ।। अब पढ़ना है ।। ——————————- सैर-सपाटे करते-करते जी अब ऊब  चला अब पढ़ना है आओ पापा लौट चलें बंगला। पिकनिक खूब मनायी हमने जी अपना हर्षाया देखे चीते भालू घोड़े चिड़ियाघर मन भाया तोते का मीठा स्वर लगता कितना भला-भला। अब पढ़ना है आओ पापा लौट चलें बँगला ।| पूड़ी और पराठे घी के बड़े चाव से खाये यहाँ झील, झरने पोखर अति अपने मन को भाये खूब बजाया चिड़ियाघर में बन्दर…

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"B 0208 – Ramesh Raj"

B 0207 – Rifat Shaheen

नज्म : मैं ऐसा महसूस कर रही हूँ के तुम यहीं हो यहीं कहीं हो मेरे सुखन में मेरे चलन में मेरे ख्यालों की अंजुमन में मैं ऐसा…. के तेरी खुशबु में मेरी सांसे रची बसी है तुम्हारी आहट मैं सुन रही हूँ मैं बुन रही हूँ तेरे ख्यालों के रेशमी आंचलों को मैं सोचती हूँ के तुम मिले तो मैं ये कहूंगी,मैं वो कहूँगी तुम्हारा दामन मैं थाम लुंगी न जाने दूंगी कहीं मैं…

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"B 0207 – Rifat Shaheen"

#Kavita (नज्म ) by Rifat Shaheen

मैं सपने बुनने लगी थी रंग भरे सपने क्यों….? इसलिये की कोई अपनी आँखों में इंद्रधनुषी रंग और पलकों की तूलिका लिये मुझे आमंत्रण जो दे रहा था। और खींच रहा था मुझे अपनी ओर, अपने चुम्बकीय आकर्षण से पल प्रतिपल मैं होती जा रही थी उसके निकट और निकट इतना की वो मुझमे रंग भरने लगा। मेरे केशों की कालिमा, मेरी आँखों की नीलिमा और मेरे ही अधरों की…. लालिमा से चुराया हुआ रंग…

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"#Kavita (नज्म ) by Rifat Shaheen"

#Kavita by Kumar Harendra Tyagi

शहीद दिवस  – – सिंह भगत,सुखदेव,गुरु, तुमको हम कभी न भूले हैं।। नमन आपकी शहादत को, हँस कर फंदे पर झूले हैं। सिंह भगत,सुखदेव,गुरु, तुमको हम कभी न भूले हैं।। बचपन से ही सुनी तुमने, क्रांतिकारियों की कहानी। परिणाम कि भारत माँ की खातिर, खपा दी जवानी।। देश मुश्किल में था, खून से तुमने खेली थी होली। एक नहीं,दो नहीं, हजारों खाईं थीं सीने पर गोली।। फांसी से पहले भी तुम,  ख़ुशी से फूले हैं।…

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"#Kavita by Kumar Harendra Tyagi"

#Kavita by Viñay samadhiya

हैं सपने प्यार के तनहाई  में आते हैं सपने प्यार के , काटे नहीं कटते लमहे इंतजार के चला आये कोई खबर लिये प्यार की , दिल के संग आँखें भी रहतीं बेकरार सी हाल ए दिल किससे कहूँ ,सूरत उदास है , सुनने वाला नहीं कोई ,तनहाई पास है , ज्जबात हाल ए दिल के ,रुकते नहीं सनम , आँखों के रस्ते धार सी ,बहती ही जा रही , बिन्दिया ,कभी चूड़ी ,कभी पायल…

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"#Kavita by Viñay samadhiya"

Kavita by Pradeep Kumar Pliwal

राजनीति… ——————————– बलात्कार हुआ. आप चुप रहे… गैंगरेप हुआ. आप चुप रहे… दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया. आप चुप रहे… कहा गया – “बच्चों से ग़लती हो जाती है…!” आप चुप रहे… कहा गया – “यह सरकार को बदनाम करने की साजिश है…!” आप चुप रहे… कहा गया – “हमारे प्रदेश में बलात्कार की दर कम है…!” आप चुप रहे… आप तब भी चुप रहे – …जब दिया जा रहा था अपराध को संरक्षण ! …जब दिया…

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"Kavita by Pradeep Kumar Pliwal"

#Kavita by Ram Shukla

फागुनिया का रंग चढ्यो अब जित देखूं उत लाल कोई खेले पी के रंग मे कोई मोहनिया संग और धानी चूनर वाली भागे देख के मस्त मलंग रंग चढ़ा अब केसरिया का खिले फूल के रंग प्रेम फुहरिया मे भींगे सब नाचे मस्त मलंग राम कहे अब हैप्पी होली करो सभी हुडदंग

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"#Kavita by Ram Shukla"

#Shayari by Suraj Sharma

इश्क़ में खुमार बहुत है , इश्क़ में बहार बहुत है।S। हो जाये हो इश्क़ तो ये इश्क़ बीमार बहुत है। इश्क़ में मिलन भी बहुत है , इश्क़ में इन्तजार भी बहुत है।L। हो जाये जो इश्क़ तो इश्क़ बीमार बहुत है। है बेचैन इश्क़ मगर इसमें करार भी बहुत है, इश्क़ वीरान इश्क़ गुलज़ार भी बहुत है, हो जाये जो इश्क़ तो इश्क़ बीमार बहुत है।S। इश्क़ महरम इश्क़ तलबगार भी बहुत है,…

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"#Shayari by Suraj Sharma"