#Kavita by Jyoti Mishra

हमें देखें नहीं  …सुनें..   झील सी गहरी ऑखें जुल्फें हों जैसे बादल जो एक नजर देखे हो जाए वो पागल….. ये उपमाएं अब नहीं भातीं हैं आज की औरतें सुनकर  इन्हें अब नहीं शरमाती, इतराती हैं..   नर्म, मुलायम हाथ नहीं कर्मठ ,  हथेलियां बन गई हैं योग्यता की पहचान सम्मान की चाहत है घर -बाहर हर जगह साथ चलता है स्वाभिमान … गुलाब की पंखुरियों सी कोमलता नहीं चाहिए उंगलियों को मजबूत हाथो…

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"#Kavita by Jyoti Mishra"

#Gazal by Aasee Yusufpuri

ग़ज़ल   है दर्दे दिल,    कम ज़रूर होगा दीया ये ,     मद्धम ज़रूर होगा   उदास मैं ही    नहीं हूँ     तन्हा उसे भी कुछ, ग़म ज़रूर होगा   जो आज मौसम ये दिलनशीं है वो मुझ से  बरहम  ज़रूर होगा   ग़रूर उसको है क़द पे “आसी” वो देखना   ख़म    ज़रूर होगा _______ सरफ़राज़ अहमद आसी

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#Kavita by Dr. Pratibha Prakash

सुबह प्रार्थना के बाद जब विश्राम के लिये चली तो पंखुरी की चीं ची ने मुझे आवाज़ दी आँख में आँसू थे मैंने पूछा क्या हुआ ? जो उसने कहा सुनकर मन लज़्ज़ा और क्रंद  से भर गया । आप भी सुनिये और कुछ करिए भी   सुन हे मनुष्य मैं निरीह गौरया जब से शुरू हुई आधुनिक प्रगति कभी किसी को मेरा ख्याल न आया अब घर में माँ भी आटे की चिड़िया नहीं…

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"#Kavita by Dr. Pratibha Prakash"

#Kahani by Lucky Nimesh

कत्ल नही होने दुगां डबल बैड पर आडी तिरछी अवस्था में पडी वह लडकी दुनिया जहान से बेखबर सोयी पडी थी! काली जिन्स और लाल टॅाप मे वह बला की हसीन थी! बैड पर उल्टी पोजीसन मे उसका चेहरा चमक रहा था और बता रहा था कि वह बेहद हसीन थी ,बेहद खूबसूरत! एक हाथ उसका आधा बैड से लटक रहा था जिसकी वजह से उसके हाथ में पहना बेशकीमती ब्रेसलेट ,जो कि सोने का…

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"#Kahani by Lucky Nimesh"

#Kavita by Surendra Kumar Singh

तुम हो ***   तुम हो और अनगिन तस्वीरें हैं तुम्हारी। कभी कभी तुम्हारी तस्वीरें तुमसे अच्छी लगतीं हैं तस्वीरें भी क्या जैसे मुक्ति का दरवाजा है मोक्ष के धाम का जैसे कोई जन्न्त है मानसिक संसार में जैसे विचारों की फसलें उग रही हैं तस्वीरों की जमीन पर, और दुनिया सम्मोहित है एक और विध्वंसक युद्ध के लिए तम्हारी तस्वीर के इर्द गिर्द। कभी कभी तुम्हारा होना भी गम हो जाता है तुम्हारी तस्वीरों…

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"#Kavita by Surendra Kumar Singh"

#Kavita by Amrendra Lavanya Anmol

सजदा माँ  का कर लेने से सादगी बढ जाती है जन्नते पाँव छू लेने से पैरवी बढ जाती है ।   काला कलूठा चेहरा हो चाहे हजार दाग हो माँ टीका लगा दे तो खूबसूरती बढ जाती है।   उसके हँसते चेहरे पे कभी गम न होने देना माँ वो देवी है जिससे घर में खुशी बढ जाती है ।   सामने होती है तब तक रौशनी महफूज रहती है माँ आँखें हटाती है तो…

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"#Kavita by Amrendra Lavanya Anmol"

#Kavita by Kumari Smriti

कफ़न ओढ़ कर मर मिटने को तैयार , देश की खातिर चल दे ,, ऐ मेरे यार   जब जब दुश्मन हम सबसे इतरायेगा, दिल पर सबके काला झंडा लहराएगा माँ बहनों की इज्जत से जब खेलेगा, आगे बढ़ने की खातिर हमको ढेलेगा ऐसे दुश्मन को  देंगे धिक्,धिक्, धिक्कार।।। देश की खातिर।।।। फूलों  में हमने क्यों  पत्थर डाला है देश की खातिर अरमानों को मारा है, घर भी , भाई बहन से मुंह मोड़ा है…

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"#Kavita by Kumari Smriti"

Lekh by Anupama Srivastava ‘Anushri’

‘ ठोको ‘ सोच समझकर ! भाषाई व्याभिचार, अभद्र,  अशिष्ट शब्दों के अतिक्रमण से ,  भाषा की अस्मिता के साथ दुर्व्यवहार।   आजकल हर जगह , हर मंच पर  , हर जगह  भाषा  की गरिमा , उत्कृष्टता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और बताया जाता है कि हम  “ज़रा हट कर  “हैँ !   जरा हटकर के फंडे को अपनाने वाले लोग समझते हैं कि हम इस प्रतिद्वंदिता के युग में तभी टिक  सकते हैं,…

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"Lekh by Anupama Srivastava ‘Anushri’"