#Kavita by Arti Alok Verma

मौसम बरपा गया कहर अब जिंदगी  गई ठहर ये जीवन कैसे हो बसर ? कड़ी धूप ने रोजी छीनी बारिश ने तोड़े छाजन करने को जीवन यापन परदेश जा रे तू साजन ।। महंगाई में  ने तोड़े कमर चूल्हे  ठंडे पड़े घर -घर नीत जीवन देखें मर मर देखें बूढे मां-बाप  या देखेंअपना बचवन करने को जीवन यापन परदेस जा रे तू साजन।। सूखा राहत का नहर तोड़ तोड़ कर पत्थर भोजन न मिलता पेट…

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"#Kavita by Arti Alok Verma"

#Kavita by Mahesh Gupta Jounpuri

( मेरे श्याम कि होली ) राधा कृष्णा ने ऐसी खेली होली भीग गया तन मन हुआ रंगो कि बौछार बच ना पाया कोय होली में ऐसे डूब गये सब राधा कृष्णा हो गया प्रेमी मन अवधपुरी सी लागी हैं अबकी बार कि होली मन जेहन में शंमा गया कृष्णा कन्हैया की होली मन चीवन लागे हैं तुम में हैं प्रीत कन्हाई देखन को बाट जोहुँगा मैं मोहन जल्दी आना राधा रानी संग महेश गुप्ता…

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"#Kavita by Mahesh Gupta Jounpuri"

#Kavita by Umesh Lakhpati Krishna

जिंदगी के सफर में चाह मेरी, तुम हमराही मेरे बन जाओ। तेरे साथ से ये सफर सुहाना, इस सफर के हमसफर बन जाओ। तेरा साथ,है बड़ा प्यारा, दिल पे बन के नीलगगन छा जाओ। सातों जनम साथ तेरा हो, जनम जनम मेरे सनम बन जाओ। तुम बिन निर्धन मैं दुनियाँ में, तुम मेरे प्रेम रतन धन बन जाओ। जिंदगी के सफर में चाह मेरी, तुम हमराही मेरे बन जाओ।

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"#Kavita by Umesh Lakhpati Krishna"

#Kavita by Prabhanshu kumar

….ईश्ववर…. ईश्वर तुम कहाँ रहते हो, तुम सोने के मंदिर में हो क्या तुम बङी अटारी में या धर्म गुरूओं की गाङी में हो क्या तुम हीरे रत्नों में या पुजारी , सेवाधिकारी में हो क्या कहॉ हो तुम तुम सेठ के चढावे मेंं या काले धन के हिस्सों में हो क्या तुम पूरी कोई इच्छा में या रोज माँगते उस मन्नत की आसूआें की तिजौरी में में हो शायद तुम दान बलिदानों में, तुम…

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"#Kavita by Prabhanshu kumar"

#Kavita by Satyendra Kumar

रंग दिखलाऊँ अब कौन सा दर्शाएगा जो मेरी छवि को भड़कीला ज्यादा ना लगे जो भा जाए हर एक किसी को . रंग कहूँ सूरज सा मुझको भाता है रातों मे तो क्या कहूँ जो धोया काला रंग दौड़ता है दिन मे तो क्या . सच तो है एक रेखा पीली सी भाती है दिन रात कवि को रंग दिखलाऊँ अब कौन सा दर्शाएगा जो मेरी छवि को . हरा रंग दूँ पत्ती से छिपकर…

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"#Kavita by Satyendra Kumar"

#Kavita by Neeraj dwivedi

प्रेम , सौहार्द और मित्रता के रंग चढ़ायें होली में ईर्ष्या द्वेष और अज्ञान का रंग छुड़ायें होली में कल्पित कथा के रंग सजायें इस कविता के उत्सव में पर्यावरण और मानवता का नीर बचायें होली में काम क्रोध मद लोभ का दहन करें इस होली में हवस असंतुष्टि और बाधा को जड़ से मिटायें होली में कर्मठता का अग्नि प्रज्वलन आवश्यकता इस उत्सव में मिथ्या मृषा और दर्प का असुर जलायें होली में बसंतदूत…

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"#Kavita by Neeraj dwivedi"

#Kavita by LATA RATHORE

सूखा पेड़ ** सूखा पेड़ गाँव की पगडंडी के किनारे से खामोशी में भी एक गीत गुनगुना रहा है l अपने यौवन की , हरे सावन की यादो को सहेजे , जीर्ण अवस्था में भी शान से मुस्कुरा रहा है l आँगन में बैठे वृद्ध सा ,कमजोर और लाचार सा , अपने अनुभव की दास्ता सुना रहा है l पगडंडी के उस ओर खड़े नए को बलिदान की एक सीख सिखा रहा है l छाया…

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"#Kavita by LATA RATHORE"