#Muktak by Gayaprasad Mourya Rajat

  चलो सच कह ही देता हूँ . ================= आसमान के सूरज को धरती का दीप दिखाना चाहता हूँ , टुकड़े -टुकड़े बटी हुई है   जग में  प्रीति जगाना चाहता हूँ . मेरे दोषों को मत देखो    मैं तो एक बुलबुला पानी का हूँ , मैं दम्भी सागर को एक  बूँद का मान बताना चाहता हूँ . रजत – आगरा

Share This
"#Muktak by Gayaprasad Mourya Rajat"

#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

मैंने चुप रहना छोड़ दिया है, आँखों से कहना छोड़ दिया है। ये असर है तेरी चाहतों का, हवा संग बहना छोड़ दिया है।   कल तक डरती थी ज़माने से, तेरा नाम भी जुबाँ पर लाने से। फिर ये हुआ असर मुझ पर, जिंदगी बदल गयी तेरे आने से।   खुद में ही सिमटी रहती थी मैं, दर्द सारे चुपचाप सहती थी मैं। तेरी मोहब्बत ने हौंसला दिया, वरना खंडहर सी ढहती थी मैं।…

Share This
"#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat"

#Lekh by Sushil M Vyas

कुतुबुद्दीन की मौत   इतिहास की किताबो में लिखा है कि उसकी मौत पोलो खेलते समय घोड़े से गिरने पर से हुई. ये अफगान / तुर्क लोग “पोलो” नहीं खेलते थे, पोलो खेल अंग्रेजों ने शुरू किया. अफगान / तुर्क लोग बुजकशी खेलते हैं जिसमे एक बकरे को मारकर उसे लेकर घोड़े पर भागते है, जो उसे लेकर मंजिल तक पहुंचता है, वो जीतता है.   कुतबुद्दीन ने अजमेर के विद्रोह को कुचलने के बाद…

Share This
"#Lekh by Sushil M Vyas"

#Kavita by Sanjeev Kumar

  काश हम पंछी होते   जाति-धर्म से छूटे होते   अपना अलग बसेरा होता   साथ-साथ सबेरा होता   दुनिया से होकर बेखबर   अलग एक आशियाना होता   ना दूर जाने का गम होता   ना ये दिल आपकी याद में रोता   दुनिया की झूठी रस्मो को   निभाने का गम ना होता   समाज से होकर बेखबर   इक दूजे के दिल में आशियाना होता   काश हम पंछी होते…………….

Share This
"#Kavita by Sanjeev Kumar"

Gazal by Kashan Iqbal Pahalwan

जबीं की धूल जिगर की जलन छुपाएगा, शुरू-ए-इश्क़ है वो फ़ितरतन छुपाएगा..   दमक रहा है जो नस नस की तिश्नगी से बदन, इस आग को ना तिरा पैरहन छुपाएगा..   तिरा इलाज शिफ़ा-गाह-ए-अस्र-ए-नौ में नहीं, ख़िरद के घाव तू दीवाना-पन छुपाएगा..   हिसार-ए-ज़ब्त है अब्र-ए-रवाँ की परछाईं, मलाल-ए-रूह को कब तक बदन छुपाएगा..   नज़र का फ़र्द-ए-अमल से है सिलसिला दरकार, यक़ीं ना कर ये सियाही कफ़न छुपाएगा..   किसे ख़बर थी कि ये…

Share This
"Gazal by Kashan Iqbal Pahalwan"