#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

मद    माया   मत्सर   मनमानी l असत असार क्षणिक हुलसानी ll नेह  फूल   रगड़े   नित   काया l अंत काल  सब  काम न आया ll   भक्ति भाव परहित श्रम सेवा – सर्वोत्तम     आचार l अवधपति ! आ जाओ इक बार ll *** विजय  पराजय आये जाये l सही राह   को  ही अपनायें ll सब  कुछ   देख  रहे रघुराई l निज कर से चलचित्र चलाई ll   विधि का लिखा समय के पट पर – कर   बंदे  …

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"#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh"

#Shayari by Akash Khangar

रात रो कर बिताऊँ या सो कर क्या फर्क पड़ता है तू छोड़ दे मेरी फिकर ऐ खुदा चलने दे युही जब तक ये सिलसिला चलता है… ***   जो कहते है बड़े उसे मान ले प्रश्नो की बेमतलब झड़ी न लगा शब्द उनके नही तजुर्बा है ये व्यर्थ की बहस में न खुद को बहका दोष मढ़ने चले हो तो किसी को न छोड़ोगे अच्छा है खुद कर मंथन ज्ञान का ज्ञान अर्जन कर…

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"#Shayari by Akash Khangar"

# Gazal by Jasveer Singh Haldhar

तिमिर ने कल रात चरागों से दूरी बनाली ! अमीरों से दूर हो दिवाली हमने मनाली !! मिल पटाखे जला रहे सारे बच्चे द्वार पर ! कुकुर ने सुन के धमाके पूंछ अपनी झुकाली  !! रोशनी उतनी न थी जो चरागों से तय हुई ! पटाखों के धुएँ ने रोशनी शायद दबाली !! आपने सुनी न होगी एक खबर ऐसी भी है! भारत से डर पाक ने सैना पीछे हटाली !! हम पड़ोसी देश का…

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"# Gazal by Jasveer Singh Haldhar"

0212 – Shabnam Sharma

Kavita : अंधेरों में तैरते शब्द **   कुछ अंधेरों में जुगनुओं से तैरते शब्द पकड़ने हैं मुझे, पानी में उड़ती तितलियों के परों पर लिखनी है कहानियाँ, पर क्या करूँ, बन्द हो गई है मेरी ज़िन्दगी के कमरे की सारी खिड़कियाँ, कभी-कभी आती है रोशनी की इक किरन, चीर कर, खिड़कियों के मोटे परदों के बीच से, तब तक सिर्फ बुनती हूँ अपना साँसों का स्वैटर और ठिठुर जाती है ज़िन्दगी, कुछ आगे सोचते-सोचते।…

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"0212 – Shabnam Sharma"

0211 – Annang Pal Singh Bhadoriya ‘ Annang’

Muktak : रिश्तों में बढ़ता दिखे , आज शिकायत दौर. ! भौतिक जग करता नहीं,अब रिश्तों पर गौर !! अब रिश्तों पर गौर, नहीं करती भौतिकता ! भूखी,नंगी रुदन कर रही है नैतिकता !! कह ंअनंग ंकरजोरि,कटे जीवन किश्तों में ! सौदा अथवा बोझ , आज दिखता रिश्तों में !! Muktak : मानव का व्यक्तित्व है, जैसे पुष्प सुगंध ! फैलाओ सद्भाव जग , यह पृभु का अनुबंध !! यह पृभु का अनुबंध, इसे जो…

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#Kavita by Shabnam Sharma

जन्मदिन साल भर इन्तजार अपने जन्मदिन का, पहनाता है भगवान इक माला हमारे गले में वर्षों के मनके पिरोकर, दिखती नहीं, पर पहने रहते हम, हर वर्ष निकाल लेता वो अपना इक मनका, वक्त के साथ ये मनके कम होते चलते व रह जाता सिर्फ वह कच्चा मैला सा धागा, जो अब उठा नहीं पाता हमारे जीवन का बोझ, छूते, महसूस करते हम डसकी मौजूदगी, पर पता है ये अब सह न पायेगा हमारा बोझ,…

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"#Kavita by Shabnam Sharma"

#Kavita by Ashok Jaiswal

बंशी के काँटे में लगा, केंचुआ यूँ बोला मछली से, मैं तो मरा तेरे लिये, अब तू तो ना मर मेरे लिये !!   मान ले मेरा कहना तू, धोखाधड़ी है इसमें भारी, टपकाएगी लार मेरे लिये, बाहर बैठा है तेरे लिये !!   ये जिंदगी के मेले व झमेले, खत्म कभी न होंगे, हम ही ख़त्म हो लेंगे, ‘ताम~झाम’ किसके लिये !!   लालच शै बुरी बहुत है, कर देता है सब कुछ नाश,…

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"#Kavita by Ashok Jaiswal"

0210 – Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

Muktak : मुझको फिर भूली हुई बात याद आयी है! चाहत की सुलगी हुई रात याद आयी है! मैं मुन्तजिर हूँ आज भी दीदार का तेरे, मुझको फिर तेरी मुलाकात याद आयी है! Muktak : जो साथ नहीं देते वे रूठ जाते हैं! रास्तों में अक्सर हमसे छूट जाते हैं! दूरियाँ बन जाती हैं दिलों के दरमियाँ, हौसले भी जिन्दगी के टूट जाते हैं! Muktak : मैं भूला था कभी तेरे लिए जमाने को! मैं…

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"0210 – Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"