0210 – Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

Muktak : मुझको फिर भूली हुई बात याद आयी है! चाहत की सुलगी हुई रात याद आयी है! मैं मुन्तजिर हूँ आज भी दीदार का तेरे, मुझको फिर तेरी मुलाकात याद आयी है! Muktak : जो साथ नहीं देते वे रूठ जाते हैं! रास्तों में अक्सर हमसे छूट जाते हैं! दूरियाँ बन जाती हैं दिलों के दरमियाँ, हौसले भी जिन्दगी के टूट जाते हैं! Muktak : मैं भूला था कभी तेरे लिए जमाने को! मैं…

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"0210 – Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"

Dr. Sarla Singh

आईना आईना कभी किसी सूरत मेंं, झूठ कभी नही बोला करता । बोलता है बस वो वही उतना, वही जो देखता है हकीकत वो। लाख लगा कर तरह तरह से , रंग -रोगन की परत को तुम । छिपा लो दुनिया से कितना , अपने चेहरे की हकीकत को । जिंदगी के सफर में भी साथी, ये वक्त एक आईना ही तो है । कर देता है ये भी ज्यों का त्यों, हकीकत का बयां…

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"Dr. Sarla Singh"

#Kavita by Kapil Jain

सौहार्द प्रेम की होली   ***   रंग दी तुमने मेरी चुनरिया भीग गई मेरी चोली तुम हो कितने निष्ठुर साजन सजनी साजन से बोली प्रेम रंग में रंग जाने का नाम है प्रीत की होली अंग अंग पर रंग बरसाने आती है प्यारी होली प्रीत रंग से रंगने वाले को मैं क्यों निष्ठुर बोली समझ गया मैं कितना पावन है त्यौहार ये होली अलग –अलग रंगों के फूल चमन मैं तो क्यों ना खेले…

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"#Kavita by Kapil Jain"

#Kavita by Gopal Kaushal

नवरंगी बौछार *** गले कैसे मिले भैया जब पेट हो गए मोटे । फोकट में दिल्ली लूटे जो   सिक्के  है  खोटे ।। सारे रिश्ते नाते हो गए आज के माहौल में छोटे । अपराधी मौज कर  रहें फरियादी खा रहें है सोटे ।। रंग लगाने किसको जाएं लगाने से पहले हम सोचे । नवरंगी हो हमारा हरपल ढूंढ रहें हम अक्सर मौके ।।

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"#Kavita by Gopal Kaushal"

#Kavita by Madhumita Nayyar

दूर..     मीलों दूर हैं हम ना जाने कहाँ हो तुम! दिल लेकिन मेरा पास तुम्हारे इतना, कि धड़कनें भी तुम्हारी सुन सकती हैं मेरी धड़कनें, साँसें मेरी तुम्हारे साँसों की गर्माहट से तप सी जाती हैं, इतने पास हो तुम कि मानो कभी दूर ही ना थे हम, मुहब्बत के रेशमी धागे से बंधे।     मुझे मुहब्बत थी तब भी तुमसे, है आज भी मुहब्बत तुमसे, कितना? समुन्दर में पानी हो जितना,…

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"#Kavita by Madhumita Nayyar"

Gazal by Dr. Dipti Gour Deep

मुल्क  की सरहदों पे जो सर दे गए l जिंदा रहने का हमको हुनर दे गए l उन शहीदों को कैसे भुलाएं कि जो l हिंद की शक्ल में प्यारा घर दे गए l उनकी  कुर्बानियों ने गज़ब कर दिया l जिंदगी भर को दर्दे-जिगर दे गए l हम तो जाते हैं अहले-वतन खुश रहो l मरते-मरते सभी को खबर दे गए l सर्द रातों में  ख़ूं को जमाते रहे l हमको रोशन सुहानी सहर…

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"Gazal by Dr. Dipti Gour Deep"

#Muktak by Gayaprasad Mourya Rajat

  चलो सच कह ही देता हूँ . ================= आसमान के सूरज को धरती का दीप दिखाना चाहता हूँ , टुकड़े -टुकड़े बटी हुई है   जग में  प्रीति जगाना चाहता हूँ . मेरे दोषों को मत देखो    मैं तो एक बुलबुला पानी का हूँ , मैं दम्भी सागर को एक  बूँद का मान बताना चाहता हूँ . रजत – आगरा

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"#Muktak by Gayaprasad Mourya Rajat"

#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

मैंने चुप रहना छोड़ दिया है, आँखों से कहना छोड़ दिया है। ये असर है तेरी चाहतों का, हवा संग बहना छोड़ दिया है।   कल तक डरती थी ज़माने से, तेरा नाम भी जुबाँ पर लाने से। फिर ये हुआ असर मुझ पर, जिंदगी बदल गयी तेरे आने से।   खुद में ही सिमटी रहती थी मैं, दर्द सारे चुपचाप सहती थी मैं। तेरी मोहब्बत ने हौंसला दिया, वरना खंडहर सी ढहती थी मैं।…

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"#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat"

#Lekh by Sushil M Vyas

कुतुबुद्दीन की मौत   इतिहास की किताबो में लिखा है कि उसकी मौत पोलो खेलते समय घोड़े से गिरने पर से हुई. ये अफगान / तुर्क लोग “पोलो” नहीं खेलते थे, पोलो खेल अंग्रेजों ने शुरू किया. अफगान / तुर्क लोग बुजकशी खेलते हैं जिसमे एक बकरे को मारकर उसे लेकर घोड़े पर भागते है, जो उसे लेकर मंजिल तक पहुंचता है, वो जीतता है.   कुतबुद्दीन ने अजमेर के विद्रोह को कुचलने के बाद…

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#Kavita by Sanjeev Kumar

  काश हम पंछी होते   जाति-धर्म से छूटे होते   अपना अलग बसेरा होता   साथ-साथ सबेरा होता   दुनिया से होकर बेखबर   अलग एक आशियाना होता   ना दूर जाने का गम होता   ना ये दिल आपकी याद में रोता   दुनिया की झूठी रस्मो को   निभाने का गम ना होता   समाज से होकर बेखबर   इक दूजे के दिल में आशियाना होता   काश हम पंछी होते…………….

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"#Kavita by Sanjeev Kumar"

Gazal by Kashan Iqbal Pahalwan

जबीं की धूल जिगर की जलन छुपाएगा, शुरू-ए-इश्क़ है वो फ़ितरतन छुपाएगा..   दमक रहा है जो नस नस की तिश्नगी से बदन, इस आग को ना तिरा पैरहन छुपाएगा..   तिरा इलाज शिफ़ा-गाह-ए-अस्र-ए-नौ में नहीं, ख़िरद के घाव तू दीवाना-पन छुपाएगा..   हिसार-ए-ज़ब्त है अब्र-ए-रवाँ की परछाईं, मलाल-ए-रूह को कब तक बदन छुपाएगा..   नज़र का फ़र्द-ए-अमल से है सिलसिला दरकार, यक़ीं ना कर ये सियाही कफ़न छुपाएगा..   किसे ख़बर थी कि ये…

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"Gazal by Kashan Iqbal Pahalwan"

#Kavita by Arti Alok Verma

मौसम बरपा गया कहर अब जिंदगी  गई ठहर ये जीवन कैसे हो बसर ? कड़ी धूप ने रोजी छीनी बारिश ने तोड़े छाजन करने को जीवन यापन परदेश जा रे तू साजन ।। महंगाई में  ने तोड़े कमर चूल्हे  ठंडे पड़े घर -घर नीत जीवन देखें मर मर देखें बूढे मां-बाप  या देखेंअपना बचवन करने को जीवन यापन परदेस जा रे तू साजन।। सूखा राहत का नहर तोड़ तोड़ कर पत्थर भोजन न मिलता पेट…

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"#Kavita by Arti Alok Verma"

#Kavita by Mahesh Gupta Jounpuri

( मेरे श्याम कि होली ) राधा कृष्णा ने ऐसी खेली होली भीग गया तन मन हुआ रंगो कि बौछार बच ना पाया कोय होली में ऐसे डूब गये सब राधा कृष्णा हो गया प्रेमी मन अवधपुरी सी लागी हैं अबकी बार कि होली मन जेहन में शंमा गया कृष्णा कन्हैया की होली मन चीवन लागे हैं तुम में हैं प्रीत कन्हाई देखन को बाट जोहुँगा मैं मोहन जल्दी आना राधा रानी संग महेश गुप्ता…

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"#Kavita by Mahesh Gupta Jounpuri"

#Kavita by Umesh Lakhpati Krishna

जिंदगी के सफर में चाह मेरी, तुम हमराही मेरे बन जाओ। तेरे साथ से ये सफर सुहाना, इस सफर के हमसफर बन जाओ। तेरा साथ,है बड़ा प्यारा, दिल पे बन के नीलगगन छा जाओ। सातों जनम साथ तेरा हो, जनम जनम मेरे सनम बन जाओ। तुम बिन निर्धन मैं दुनियाँ में, तुम मेरे प्रेम रतन धन बन जाओ। जिंदगी के सफर में चाह मेरी, तुम हमराही मेरे बन जाओ।

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"#Kavita by Umesh Lakhpati Krishna"

#Kavita by Prabhanshu kumar

….ईश्ववर…. ईश्वर तुम कहाँ रहते हो, तुम सोने के मंदिर में हो क्या तुम बङी अटारी में या धर्म गुरूओं की गाङी में हो क्या तुम हीरे रत्नों में या पुजारी , सेवाधिकारी में हो क्या कहॉ हो तुम तुम सेठ के चढावे मेंं या काले धन के हिस्सों में हो क्या तुम पूरी कोई इच्छा में या रोज माँगते उस मन्नत की आसूआें की तिजौरी में में हो शायद तुम दान बलिदानों में, तुम…

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"#Kavita by Prabhanshu kumar"

#Kavita by Satyendra Kumar

रंग दिखलाऊँ अब कौन सा दर्शाएगा जो मेरी छवि को भड़कीला ज्यादा ना लगे जो भा जाए हर एक किसी को . रंग कहूँ सूरज सा मुझको भाता है रातों मे तो क्या कहूँ जो धोया काला रंग दौड़ता है दिन मे तो क्या . सच तो है एक रेखा पीली सी भाती है दिन रात कवि को रंग दिखलाऊँ अब कौन सा दर्शाएगा जो मेरी छवि को . हरा रंग दूँ पत्ती से छिपकर…

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"#Kavita by Satyendra Kumar"

#Kavita by Neeraj dwivedi

प्रेम , सौहार्द और मित्रता के रंग चढ़ायें होली में ईर्ष्या द्वेष और अज्ञान का रंग छुड़ायें होली में कल्पित कथा के रंग सजायें इस कविता के उत्सव में पर्यावरण और मानवता का नीर बचायें होली में काम क्रोध मद लोभ का दहन करें इस होली में हवस असंतुष्टि और बाधा को जड़ से मिटायें होली में कर्मठता का अग्नि प्रज्वलन आवश्यकता इस उत्सव में मिथ्या मृषा और दर्प का असुर जलायें होली में बसंतदूत…

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"#Kavita by Neeraj dwivedi"

#Kavita by LATA RATHORE

सूखा पेड़ ** सूखा पेड़ गाँव की पगडंडी के किनारे से खामोशी में भी एक गीत गुनगुना रहा है l अपने यौवन की , हरे सावन की यादो को सहेजे , जीर्ण अवस्था में भी शान से मुस्कुरा रहा है l आँगन में बैठे वृद्ध सा ,कमजोर और लाचार सा , अपने अनुभव की दास्ता सुना रहा है l पगडंडी के उस ओर खड़े नए को बलिदान की एक सीख सिखा रहा है l छाया…

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#Kavita by Jyoti Mishra

हमें देखें नहीं  …सुनें..   झील सी गहरी ऑखें जुल्फें हों जैसे बादल जो एक नजर देखे हो जाए वो पागल….. ये उपमाएं अब नहीं भातीं हैं आज की औरतें सुनकर  इन्हें अब नहीं शरमाती, इतराती हैं..   नर्म, मुलायम हाथ नहीं कर्मठ ,  हथेलियां बन गई हैं योग्यता की पहचान सम्मान की चाहत है घर -बाहर हर जगह साथ चलता है स्वाभिमान … गुलाब की पंखुरियों सी कोमलता नहीं चाहिए उंगलियों को मजबूत हाथो…

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"#Kavita by Jyoti Mishra"

#Gazal by Aasee Yusufpuri

ग़ज़ल   है दर्दे दिल,    कम ज़रूर होगा दीया ये ,     मद्धम ज़रूर होगा   उदास मैं ही    नहीं हूँ     तन्हा उसे भी कुछ, ग़म ज़रूर होगा   जो आज मौसम ये दिलनशीं है वो मुझ से  बरहम  ज़रूर होगा   ग़रूर उसको है क़द पे “आसी” वो देखना   ख़म    ज़रूर होगा _______ सरफ़राज़ अहमद आसी

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"#Gazal by Aasee Yusufpuri"

#Kavita by Dr. Pratibha Prakash

सुबह प्रार्थना के बाद जब विश्राम के लिये चली तो पंखुरी की चीं ची ने मुझे आवाज़ दी आँख में आँसू थे मैंने पूछा क्या हुआ ? जो उसने कहा सुनकर मन लज़्ज़ा और क्रंद  से भर गया । आप भी सुनिये और कुछ करिए भी   सुन हे मनुष्य मैं निरीह गौरया जब से शुरू हुई आधुनिक प्रगति कभी किसी को मेरा ख्याल न आया अब घर में माँ भी आटे की चिड़िया नहीं…

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"#Kavita by Dr. Pratibha Prakash"

#Kahani by Lucky Nimesh

कत्ल नही होने दुगां डबल बैड पर आडी तिरछी अवस्था में पडी वह लडकी दुनिया जहान से बेखबर सोयी पडी थी! काली जिन्स और लाल टॅाप मे वह बला की हसीन थी! बैड पर उल्टी पोजीसन मे उसका चेहरा चमक रहा था और बता रहा था कि वह बेहद हसीन थी ,बेहद खूबसूरत! एक हाथ उसका आधा बैड से लटक रहा था जिसकी वजह से उसके हाथ में पहना बेशकीमती ब्रेसलेट ,जो कि सोने का…

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"#Kahani by Lucky Nimesh"

#Kavita by Surendra Kumar Singh

तुम हो ***   तुम हो और अनगिन तस्वीरें हैं तुम्हारी। कभी कभी तुम्हारी तस्वीरें तुमसे अच्छी लगतीं हैं तस्वीरें भी क्या जैसे मुक्ति का दरवाजा है मोक्ष के धाम का जैसे कोई जन्न्त है मानसिक संसार में जैसे विचारों की फसलें उग रही हैं तस्वीरों की जमीन पर, और दुनिया सम्मोहित है एक और विध्वंसक युद्ध के लिए तम्हारी तस्वीर के इर्द गिर्द। कभी कभी तुम्हारा होना भी गम हो जाता है तुम्हारी तस्वीरों…

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"#Kavita by Surendra Kumar Singh"