#Gazal by Uday Shankar Chaudhari

दिवाना है नही मुझसा कोई भी जमाने में मेरे महबुब के जैसा कहां कोई जमाने में आशिक हूं वतन का प्यार मुझको जमीं से है मुहब्बत है तिरंगे से ना दुजा है जमाने में —— पकड़ता हूं कलम जब भी कोई श्रृंगार लिखने को कलम चलती नहीं कहती जमीं का दर्द लिखने को नजर जाती किसानों पर उनके आशियानो पर सजल मन से कलम बढती दबे अरमान लिखने को —– जमीं को सींचते हैं जो…

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"#Gazal by Uday Shankar Chaudhari"

#Kavita by Sanjeev Kumar

आज के युग में मैंने क्या क्या नही देखा अपनों का खून करते हुए अपनों को देखा रिश्तों के बदले पैसों को अनमोल होते देखा आज के युग मे…………. नेताओं को कानून जेब में रखते हुए देखा भ्रष्टाचारियों को राजनीति करते हुए देखा मासूम बच्चियों से हैवानियत होते हुए देखा आज के युग में………….. पैसों से सब कुछ बिकते हुए देखा दहेज़ की खातिर बेटियों को जलते हुए देखा बेटियों के दुष्कर्मियों को खुले घूमते…

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"#Kavita by Sanjeev Kumar"

#Jyoti Mishra

जीवन साथी   तुम दीप बनो  ,  मैं बाती हो प्रशस्त  आलोकित, कण – कण मिलकर साथ मिटाऐंगे तम तुम हो प्रकाश मैं जगमग ज्योति जलाती …   फूल मिलें या  हों अंगारे मिल -जुलकर हम ख्वाब संवारे तुम संग चलो, मै हर पल साथ निभाऊं साथी ….   सांसो की ये डोर बंधी संग तेरे तेरे सुख -दुख हैं अब मेरे खिली रहे ये बगिया अपनी फूलों सी मुस्काती जनम -जनम तक साथ रहो…

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"#Jyoti Mishra"

#Kavita by Madhu Mugdha

मेरी जिन्दगी की एक क्ल्पना हाे तुम ……. मैं नहीं जानती, ना बता सकती हूँ , कि तुम कौन हो . जिस समय मैं टुकड़ों में टूट कर चूर-चूर होकर बिख़र रही थी, उस समय तुम ही थे …. जो मेरे मिटते वजूद को फिर से जिवित कर रहे थे… आज भी तुम्हारी… उपस्थिति और समीपता को महसूस करती हूँ । .. आजकल न जाने कहाँ खो जाती हूँ… तुम मेरी सोच हो , मेरी…

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"#Kavita by Madhu Mugdha"

#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

छन्दमुक्त सरस्वती वन्दना” माँ  वर दे मुझको  सत्य लिखूँ।   जब चारों ओर अन्धेरा हो असत्य ने सच को घेरा हो उजियारा तम  के वशीभूत हर ओर हर तरफ झूठ झूठ तब अंधियारे  से युद्ध लिखूँ माँ  वर दे मुझको  सत्य लिखूँ।   जब कलम के साधक चाकर हों गंदे नाले रत्नाकर हों कवि  भाँड़ मिरासी  बन जाएँ पद पुरस्कार पर बिक जाएँ तब कलम बनाकर अस्त्र लिखूँ माँ  वर दे मुझको  सत्य लिखूँ।  …

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#Kavita by Gopal Kaushal

नदी के रंग ** काले-स्वेत बादल मानों  धीरे – धीरे भू  पर उतर  रहे लेकर नदी में हिलोरे ।। खिली – खिली – सी सूरज  की  किरणें । नीर  के आईने में आई मानों संवरने ।। साँय – साँय कर सरिता बहती रहें । नाविक ले पतवार सरिता ने गीत कहें ।। मझधार में भंवरे यूँ ही गोतें लगाते  रहे । हौसलों से  हीं  हम नौका पार लगाते रहें ।। ✍ गोपाल कौशल

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#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है   //   ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है  // तू बच्ची को भी हुस्न – ए – बहार कहता है  //   थक  गया है हर शख़्स काम करते करते  // तू इसे अमीरी का बाज़ार कहता है।   गांव  चलो वक्त ही वक्त  है सबके पास  !! तेरी सारी फ़ुर्सत तेरा इतवार कहता है //   मौन  होकर…

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#Kavita by Shailesh Kumar Singh Vadodara

1.मुझे भी हक़ है मेरी जिंदगी जीने का। तुम्हे तकलीफ न होने दूंगी। बापू मत मार , मैं अपनी लड़ाई लड़ लुंगी। बस एक सहारा दे दे। मुझे जीने दे बापू। धरती का एक किनारा दे दे।   2.बोझ नहीं मैं माता हु। बोल नहीं सकती तो क्या मैं निर्बल हु मुझे जीने दो हे मानव सृष्टि विधाता हु। क्या भूल गए अपनी संस्कृति या भूल गए अस्तित्व, दिन दूर नहीं घड़ा भर ही चूका…

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#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

~ शायरी ~   दिल में उम्मीदों का ख्वाब पलता रहा, बिन कहे उससे सब कुछ चलता रहा , वो हँसकर एक नजर देख क्या गये, में ताउम्रभर मोमबत्ती सा जलता रहा ।   ~ सौरभ दुबे ” साहिल”  

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#Kavita by Aditya Maurya

दर्पण रोज तुझे मेरी याद दिलाता होगा कभी तुझे भी मेरा ख्याल आता होगा।   वो बरसात वाली भीगी रातें करनी माता की सुनहरी बातें। चाँद भी तुझे देख देख शर्माता होगा कभी तुझे भी मेरा ख्याल आता होगा।   वो गोद में लेकर मुझे सुलाना मुझ से ही अपनी नजरे चुराना। हाथ का कगंन कुछ याद दिलाता होगा कभी तुझे भी मेरा ख्याल आता होगा।   वो तेरी खुली जुल्फों का लहराना दाँतो तले…

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#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

कोई मन्दिर,कोई मस्जिद के लिये लड रहा है, जात-धर्म के नाम पर देश अपना उजड रहा है।   फुल बाटते हाथो मे हथियार थमा दिया है लोगो ने दिल जैसी जमीन पर नफरते ऊगा दिया है लोगो ने। साथ-साथ चलते लोग अब दुरियां बनाये बैठे है हिन्दु-मुस्लिम थे कभी ऐसे,जैसे एक मां के बेटे है चंद देश के गद्दारो ने आग लगा दी है रिस्तो मे, भाई ही अब भाई का लहु बहाने आगे बड…

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"#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati"

#Geet by Gayaprasad Mourya Rajat

गीत 🍀🍀🍀🍀🍀🍀 मेरी एक चली होती तो, मैं सबसे कह देता। पुरवा चलती पछुआ बहती, मैं मौसम संग बह लेता। तेरे अंगों की मदमाती आहट को सुन सुन कर, कोई नया गीत रच लेता साँसों को चुन चुन कर। बक़्त हाथ से निकल गया ज्यों रेत बहा मुट्ठी से। उजड़ गया वो घरपतुआ भी खड़ा किया मिट्टी से। नदी बही जिस अभिलाषा से, मैं भी तो बह लेता, मेरी एक चली होती तो, मैं सबसे…

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"#Geet by Gayaprasad Mourya Rajat"

0217 – Prabhat Ranjan

Kavita : पुत्री/बेटी को समर्पित ***   होंठों पे तेरे हँसी देखकर   होंठों पे तेरे हँसी देखकर एक सुकून सा मिलता है चेहरे पे तेरे जो ये नूर है एक फूल सा खिलता है होंठों पे तेरे . . .   छोटी-सी, नन्ही-सी, प्यारी-सी तू कोई परी लग रही मासूमियत तेरे गालों पे क्या खूब है सज रही तेरी आँखों में आये जो आंसू मेरा मन ये मचलता है होंठों पे तेरे . .…

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"0217 – Prabhat Ranjan"

#Kavita by Ram Shukla

जिन्हें खुद के पैरों पे भी खड़े होने का सलीका न था आज वो हमे हमारी औकात बताते हैं जानते नही वफ़ा की बातें और हमे बे-वफ़ा का ख़िताब दिए जाते हैं खुदगर्जी मे डूबे हैं वो और , मगरूर हमे कहे जाते हैं बे-नाम धागों मे बचा है रिश्ता उसे यूँ जार-जार किये जाते हैं खुद को पत्थर कह मूंछो पे ताव देने वाले दिल की आवाज सुन खुद-ब -खुद खिंचे आते थे मगरूर…

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"#Kavita by Ram Shukla"

#Geet by Surendra Kumar Singh

गीत * दिल में जज्बात की परछाइयों की बस्ती है सुर्ख अधरों पे मचलते हुए मौसम की तरह।   एक छू लो तो रूठ जाता है एक मिलते ही मुस्कराता है एक बैठा हुआ है मन्दिर में एक खोया हुआ ख्यालो में दिल में आवाज की सरगोशियों का जंगल है एक झरने से निकलते हुए धुएं की तरह।   ये मुश्किल से कोई बात किया करता है एक आवाज का हर जाम पिया करता है…

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"#Geet by Surendra Kumar Singh"

#Gazal by Dipti Gour ‘Deep’

जिंदगी में ऐसे भी मोड़ आया करते हैं l दिल लगाने वाले ही दिल दुखाया करते हैं l गर्दिशों के मारों से कौन बात करता है l दोस्त भी मुसीबत में मुस्कुराया करते हैं l मशविरा तो दे देना पर मदद मती करना l लोग एहसानों को भूल जाया करते हैं l हम किसी से दुनिया में दुश्मनी नहीं रखते l लोग जाने क्यों हमको आजमाया करते हैं l ‘दीप’ कौन समझाए बेशऊर लोगों को…

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"#Gazal by Dipti Gour ‘Deep’"

#Gazal by Harpershad Pushpak

जिस पर भी एतवार किया है। उसने ही छिपकर बार किया है।। शीतलता मांगी थी जब भी। हाथों में  बस अंगार दिया है ।। बात सफेदी की करता पर । कालिख का व्यापार किया है ।। झाँक रहा जो आसमान से । उसे मसीहा नाम दिया है ।। बना मसीहा जो मजलूमों का । खुद को ही आवाद किया है ।। वही नसीहत बाँटते पुष्पक। हदों को जिसने पार किया है।। लौट रहे थे जो…

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"#Gazal by Harpershad Pushpak"

#Muktak by Mahendra Mishra

सांझ की लालिमा से जब ये सारा जग सुशोभित है, उतारे आरती मंदिर में देवों की पुरोहित है, तेरी उड़ती हुई जुल्फों और मुस्कान पे प्यारी, तुम्हारे सामने गाता ये ‘मोहित’ तुमपे मोहित है। तुम्हारे साथ जुड़ करके तुम्हारा नाम बन जाऊँ, जो सुंदर स्वर्ग से भी हो वो पावन धाम बन जाऊँ, मेरे गीतों की वंशी में बनो प्रिय राधिका अब तुम, मैं तुममें इस कदर डूबूँ तुम्हारा श्याम बन जाऊँ। रचनाकार- महेंद्र मिश्र…

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#Kavita by Satyendra Kumar

कविता मुश्किल नहीं होती ———————————– कविता मुश्किल नहीं होती ये कभी मुश्किल नहीं होती . तुम जाना अपने घर मे कमरे की उस अलमारी से जो बाद पड़ी है पहरों से हाथ डाल के उठा लेना कुछ फुटकर सिक्के जिनसे खरीदते थे पतंगे . भीड़ से भरे बाजार मे खड़े होकर उन्हे उछालना अंखे बंद करके सुनना मिलेगी तुम्हें उनकी एक धुन . शब्द मिलेंगे तुम्हें बाजार से कुछ घर से, कुछ आकाश से कल्पनाओ…

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"#Kavita by Satyendra Kumar"

#Kavita by Vinod Bairagi

नजरो के सामने नजारे  कैसे बचाया जाए लगा दाग इस दिल पर  वो कैसे छुपाया जाए ऐसास नहीं है  जिन्हें अपनी ही गलती का क्यों ना उन्हें फिर से आइना दिखाया जाए इन अंधेरों में हमे चलने की  आदत तो नहीं हे किस  तरह  ये उन्हें ये अब समझाया जाए खंज़र  रखते हैं  जो अपने कलम वालो इन हाथों  में उन्हें फिर किस तरह गुलाब थमाया जाए जिन्हें शर्म तो  नज़र आती  ही नहीं अब…

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"#Kavita by Vinod Bairagi"

Vyang by M M Chandra

नागनाथ सांपनाथ का चुनावी उत्सव: लेखक – एम. एम. चन्द्रा (व्यंग्य ) …………………………………………….. गजब ये है कि अपनी मौत की आहट नहीं सुनते, वो सबके सब परीशां हैं, वहां पर क्या हुआ होगा। दुष्यंत कुमार की यह ग़ज़ल कोयल एक पेड़ पर बैठी गा रही है . तभी अचानक उस पेड़ के नीचे पड़ा सड़ा आधा जमीं में धंसा बाहर फन निकले एक नागनाथ ने आवाज लगाई. बस करअब तो अपनी हार मान ले. हम चुनाव…

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"Vyang by M M Chandra"

Lekh by dr arvind Jain

पद ,पैसा ,प्रतिष्ठा और पुरुस्कार —- भाई मुरारी की उम्र चालीस साल की कब होगयी उन्हें पता तक नहीं चला .कारण वेचारे को पच्चीस साल लग गए बी,ए.की डिग्री लेने में. उसके बाद पढाई पढाई करते समय आराम प्रेमी होने से अधिक आराम में उनका विश्वास. उनका विश्वास हैं की मनुष्य को आराम मौलिक आधार के साथ मिलना चाहिए. चाहे हम पढ़े या नौकरी करे या व्यापार . तभी तो उनको पच्चीस साल लग गए…

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"Lekh by dr arvind Jain"

#Kavita by anupama shrivastava ‘ANUSHRI’

“ रंग ” बाहर रंगों के मेले हों  ना हों, दिलों में रंग  खिले-खिले हों नीला रंग ओढ़ लेती हूं, लगता आसमां साथ चल रहा है सफेद पैरहन  पंछियों की टोलियों में उड़ा देता है धानी धरा की हरीतिमा समों, उसी की तरह औघड़ दानी बना देता है गुलाबी,  मासूम परियों की, लज़ीली मुस्कुराहट से सज़ा देता है ज़िंदगी के उत्स को उकसा देता है तो गेरुआ मन पर दस्तक दे रूह छू जाता है…

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"#Kavita by anupama shrivastava ‘ANUSHRI’"

#Kavita by Neeraj Dvivedi

मानव बहुत लिखा तुमने तिमिर की कहानी बहुत तुमने गाया तिमिर की कहानी बहुत तुमने रोका चंदा की छाया बहुत तुमने रोका दिनकर की किरणें बहुत तुमने शोषित किया है अमन को बहुत तुमने पोषित किया है अहम् को बहुत तुमने अनुग्रह किया है दनुज पर बहुत तुमने विग्रह किया है धरा पर बहुत तुमने रोका है नदियों की धारा बहुत तुमने बोला है विषधर की बोली बहुत तुमने काटा है सुन्दर विपिन को बहुत…

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"#Kavita by Neeraj Dvivedi"

#Kavita by Shambhu Nath

होली में दादा जी आयेगे ॥ लायेगे पिचकारी ॥ दादी जी ने अभी से ही ॥ कर रखी है तैयारी ॥ मिष्ठान बहुत दादा लायेगे ॥ आयेगा मुझको कपड़ा ॥ दादी जी को साड़ी आयेगी ॥ चाचा करेगे झगड़ा ॥ सुबह शाम सीचेंगे दादा ॥ अपनी ये फुलवारी ॥ दादी जी ने अभी से ही ॥ कर रखी है तैयारी ॥ पकवान बनेगा होली में घर पर ॥ बुआ बुलायी जायेगी ॥ पाप के संग…

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"#Kavita by Shambhu Nath"