#Kavita by Shivansh Bhardwaj

कविता     तुम हमे दिखती क्यों नही आँखों में मेरे प्यास बहुत हैं है ज़रूरत तुम्हें देखने की हमको ये आस बहुत हैं   ये हसीन चेहरा दिल में है है मुझे तुमसे मिलना भी तुम हसीन हो मेरी नज़रो में तुम भी मुझे रोज दिखना भी   एक उम्र ज़रूर लगी इस तऱफ तुम हमपर कभी मेहरबान हो हम दोनों कुछ बातें करे सर के ऊपर आसमान हो   दिल में कुछ बात…

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"#Kavita by Shivansh Bhardwaj"

#Kavita by Preeti Praveen

-“कसक” कसक मन की बता दूँ तो ज़माना ख़ौफ़ खाएगा सुना दूँ दास्ताँ उसकी तो ये दिल काँप जाएगा   आँख में आज भी है क़ैद वो दिल से न जाएगा वो मंज़र दिल को छलनी रूह को घायल कराएगा   पड़ी थी दामिनी नीचे लहू की धार बहती थी क़ातिलाना वहशियों से लाज की भीख माँगी थी   मानवता देखती रही लाज लुटती वहीं रही उन बेटों के गुनाहों को ढॉंककर ताकती रही  …

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"#Kavita by Preeti Praveen"

#Kavita by Ajeet Singh Avdan

किसके कारज का बनी, ये काया आधार । या बस बनके फिर रही, इस अवसर भी भार ।। धरा पर अब तक राही ।।   घट-घट में रत खोजते, निज अनुकूल प्रमाण । प्राण-प्राण में भिन्नता,लाता कैसे प्राण ।। प्रमाणित कब तक होगा ।।   सपनो के संसार की, बातों में क्या खास । पाया खोते पल रही, साँस-साँस नव आस ।। यहीं सब छूटा जाए ।।   …अवदान शिवगढ़ी  

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"#Kavita by Ajeet Singh Avdan"