0220 – Tejvir Singh Tej

Kavita : हनुमत भजन ** संकट हरैगौ मेरौ राम जी कौ दास रे! आऔ हनुमान अब टूट रही आस रे ! केसरी के सुत प्यारे अंजनी नै जाये हैं। रूद्र के अवतार कपि हनुमत कहाये हैं। कलजुग के देवता कौ घट-घट में बास रे! संकट हरैगौ मेरौ….. सूरज कुं भाख लियौ जानि रूप फल में। सागर पै सेतु बन्ध कर दियौ पल में। लंका कुं राख कर कियौ है विनाश रे! संकट ….. सागर कू…

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"0220 – Tejvir Singh Tej"

#Kavita by ] Jasveer Singh Haldhar

कविता पर कविता ———————– कल्पना और विचारों की तकरार है कविता । मानस को ब्रह्म का मधुर उपहार है कविता ।। मन में तरंगे उठें जब नदिया की लहरों सी । कवि मन के द्वन्द्द का छंद उदगार है कविता ।। कोई वक्त से हारा किसी को वक्त ने मारा । कुछ को पढ़ने के लीये अखबार है कविता ।। कभी व्योम में सोती कभी कौम पर रोती । गगन का धरा के संग व्यवहार…

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"#Kavita by ] Jasveer Singh Haldhar"

#Gazal by Adil Sarfarosh

रुख  हवा  का बदलने से क्या फायदा गिर गए फिर संभलने से क्या फायदा   जिन  राहों  पर अपने बिछड़ते रहे हैं उस मंजिल के मिलने से क्या फायदा   रात  भर  चाँद  करता  रहा है रोशनी सुबह सूरज निकलने से क्या फायदा   हो  गए  हैं  वो  हमदम  किसी और के उनकी चाहत में जलने से क्या फायदा   हुस्न वाले किसी के भी होते नहीं साथ इनके चलने से क्या फायदा

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"#Gazal by Adil Sarfarosh"

#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

देख देश में आंखो से हिंसक प्राणी पलते हैं पाकर हिंसा का प्रशिक्षण देश मे हिंसा करते हैं —– उन्हें हुकुमत दुध पिला अपने खातिर पाला है है रिश्ता है ऐसा जैसे दोनो जीजा साला है —— वरना केशर वाली माटी पर सांप नहीं पैदा होता वीरों के इस धरती पर आतंक नहीं पैदा होता —— सत्ता की लोलुपता में ईमान धर्म है बेच दिया बिषदंतो के घुटने में अपना घुटना टेक दिया ——- दशकों…

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"#Kavita by Uday Shankar Chaudhari"

#Kavita by Jyoti Mishra

गर्मी ** गर्मी आते ही याद  आ जाती है बचपन की ढेर सारी यादें .. गर्मी की छुट्टियां ..जैसे मिल गई हों मुहमांगी मुरादें  …   बहुत बड़ा संयुक्त परिवार बुआ , चाचा- चाची की डांट -डपट भरपूर प्यार ..दुलार   ढेर सारे छोटे -बड़े, भाई -बहन एक ही रसोई में जमीन पर बैठकर हंसते -खाते बड़ा सा आंगन …   भरी दोपहरी चुपके से बगीचे में भाग जाते जलते पैर ..लू के थपेडों में…

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#Kavita by Gopal Kaushal

मृग की अभिलाषा *** मृग जोड़े का  देख  प्रेम इजहार वन में आ गई मानों बसंत बहार । फुदकते-उछलते कर अठखेलियां दे रहें संदेश प्यार से  चले संसार ।। माया मोह का नही  जहां बाजार न ही होते है इनके पास  औजार । फिर भी सुरक्षित नही यह मिलन न जाने कब कर ले कोई शिकार ।।

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#Kavita by Munish Bhatiya Ghayal

वाह मिली वाही मिली पर बीवी अनचाही मिली सोचा साली तो सुंदर है लेकिन वो भी ब्याही मिली साले की बीवी देखी तो कुछ दिल को सुकून मिला हाथ लगी निराशा यहां भी वो कहती हमको भाई मिली आंख में काजल लबों पे लाली खूबसूरती का ठोर नहीं मैं कहता उसको सासु मां वो कहती हमें जंवाई मिली आस नहीं छोड़ी हमने ओर तकने लगे पड़ोसन को किस्मत फूटी ये आस भी टूटी वो बीवी…

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#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

~ शायरी ~   दिल में उम्मीदों का ख्वाब पलता रहा, बिन कहे उससे सब कुछ चलता रहा , वो हँसकर एक नजर देख क्या गये, में ताउम्रभर मोमबत्ती सा जलता रहा । *** कोई भी पढ ले जो में वो किताब नहीं हूँ , उँगलियों पर जुड जाये में वो हिसाब नहीं हूँ , मेरे शब्दों को तुम समझो या ना समझो पर, किसी के दिल को जलाये में वो तेजाब नहीं हूँ ।…

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#Kavita by Aditya Mourya

दर्पण रोज तुझे मेरी याद दिलाता होगा कभी तुझे भी मेरा ख्याल आता होगा।   वो बरसात वाली भीगी रातें करनी माता की सुनहरी बातें। चाँद भी तुझे देख देख शर्माता होगा कभी तुझे भी मेरा ख्याल आता होगा।   वो गोद में लेकर मुझे सुलाना मुझ से ही अपनी नजरे चुराना। हाथ का कगंन कुछ याद दिलाता होगा कभी तुझे भी मेरा ख्याल आता होगा।   वो तेरी खुली जुल्फों का लहराना दाँतो तले…

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"#Kavita by Aditya Mourya"

#Kavita by Surendra Kumar Singh

गीत * दिल में जज्बात की परछाइयों की बस्ती है सुर्ख अधरों पे मचलते हुए मौसम की तरह।   एक छू लो तो रूठ जाता है एक मिलते ही मुस्कराता है एक बैठा हुआ है मन्दिर में एक खोया हुआ ख्यालो में दिल में आवाज की सरगोशियों का जंगल है एक झरने से निकलते हुए धुएं की तरह।   ये मुश्किल से कोई बात किया करता है एक आवाज का हर जाम पिया करता है…

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"#Kavita by Surendra Kumar Singh"

#Kavita by Kshitij Bawane

°°°चलते रहना होगा….!°°° रास्ते टेढ़े-मेढ़े सही उनपर चलते रहना होगा| मौसम ठंडे-गर्म सही उनमें ढलते रहना होगा!   कोई कहे कडवा कितना ही उसे अनसुना करना होगा| कोई रोके-टोके कितना ही आगे बढ़ते रहना होगा!   दो-चार ही सही लेकिन कदम मिलाकर चलना होगा| हार तय लग रही हो लेकिन जान लगाकर लड़ना होगा!   नया सूरज निकले ना सही जिगर में शोला जलाना होगा| एक बार ही सही लेकिन चिंगारी को भड़काना होगा!  …

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0219 – Preeti Praveen

Kavita : ख़ुशनुमा पल   *** आ भी जाओ ना इंतज़ार में हूँ ख़ुशनुमा पल के दीदार में हूँ   पहले तो स्वयं आ जाया करते थे मनपसंद उपहार भी लाया करते थे   रंग-बिरंगे परिधानों से सुसज्जित मन ही मन ख़ूब इतराया करते थे   खाने खिलाने का दौर भी चलता था कभी झूठी क़समें तो कभी झूठे वादे   बाँस की ये आरामदायक सी बिछात सामने प्रकृति की मन मोहती छटा   घंटों…

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"0219 – Preeti Praveen"

#Gazal by Kashan Iqbal Pahalwan

खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई नई है.. अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ्तगू में, अभी मुहब्बत नई नई है..   अभी ना आएगी नींद हमको, अभी ना हमको सुकून मिलेगा, अभी तो धड़केगा दिल ज़्यादा, अभी ये चाहत नई नई है..   बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएं.. फज़ा में खुशबू नई नई है, गुलों में रंगत नई नई है..   जो खानदानी रईस हैं वो,…

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#Kavita by Durgadas Pathak , Anurag

शर्म (लज्जा)   घाटी घायल है तो केवल, आस्तीन के साँपों से।   नमक हराम, बेमुराद, दोगली संतानों से।   अब तो शर्म करो तुम, ऐ कैसी नादानी हैं।   भूल रहे हो तुम,   प्रलय पड़ा जब जब घाटी पर   आगे आकर हाथ बढ़ाये,   ऐ बही सैनिक हिंदुस्तानी हैं।   पत्थर उठाते लाज न आई,   यही कश्मीरियत की निशानी हैं।   अब तो शर्म करो तुम, ऐ कैसी नादानी हैं।  …

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"#Kavita by Durgadas Pathak , Anurag"

#Kavita by Kumari Archana

“तुम बिन मैं जीती जागती लाश हूँ ”   साजन तुम हो कि मैं हूँ तुम बिन मैं जीती जागती लाश हूँ ! मेरा सूरज,चाँद,सितारे सब कुछ तुम हो मेरी बंदियाँ की चमचमाहट तुम हो मेरे ओठों की लाली तुम हो मेरे माथे का कुमकुम तुम हो   साजन तुम हो कि मैं हूँ तुम बिन मैं जीती जागती लाश हूँ! मेरा ये रूप सिंगार तुम से मेरी ये हाथों की चुडियाँ तुम से पाँव…

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"#Kavita by Kumari Archana"

Lekh by Masneesh ( Mannu ) Bhatt

आदत से मजबूर हम सभी को शायद ये लगे कि समाज बुरा और बुरा होता जा रहा है पर यकीन मानिये बस ये बात तो बेवजह मान लेने वाली है, मैंने एक दुनियाँ देखी है शायद आपने भी आपके आस पास इसे देखा हो। ये भी सम्भव है कि आप खुद इसका हिस्सा होकर भी इसे नकार रहे हो शायद मैं भी ऐसा ही कुछ कर रहा हूँ। मैं एक काल्पनिक दुनिया की बात करता…

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"Lekh by Masneesh ( Mannu ) Bhatt"

#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

गरीब मेहनत- हमाली करता है अमीर देश की दलाली करता है अपने मतलब के लिए यहां नेता भाईचारे की भी हलाली करता है खाकी-खादी लुट रही है वतन सीमा पे जवान रखवाली करता है वो ही जा बैठता है सरकार मे जो कमाई यहां काली करता है

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"#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati"

#Kavita by Ishwar Dayal Jaiswal

  ** अंतहीन शाश्वत   ***   शाश्वत ! तुम कहाँ हो ? तुम्हे खोजता रहा अतीत मे , खोजता रहूँगा अनन्त भविष्य मे , वर्तमान मे हो अदृश्य तुम । शाश्वत !                                     तुम कौन हो ? तुम्ही से बँधा है संसार , तुम्हीं से गुंथा है ब्रह्मांड , तुम्ही करते हो सबका उत्थान, और करोगे सबका अवसान । शाश्वत ! तुम क्या हो ? हे अनन्त अविनाशी ! मैं तो चला हूँ –                            इसी सृष्टि…

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"#Kavita by Ishwar Dayal Jaiswal"

#Kavita by Sathi Mukherji

त्रिकोण प्यार ,बदली नजंर ******* थी मेरी सहेली हमंराज वो बदली नज़र ,मैं करती क्या। त्रिकौण मोहब्बत हमारी नाकाम दिल से, मैं करती क्या।। तुम भी तो हुए बेबफा एकतरफा  ,मैं करती क्या अब मेरा रक़ीब ,तेरा प्यार वो मैं बेचारी करती क्या।। ये दुनियां है आनी-जानी फैला स्वार्थ मै करती क्या तेरी तासिर बदल गई जब बटवांरा तेरा ,करती क्या।। टुट़ गए हैं बधंन सारे छूट़ गए सब रिश्ते ज़बरदस्ती ,बांध के तुमको वदिंश…

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"#Kavita by Sathi Mukherji"

Gazal by Dr. Dipti Gour ‘Deep’

जिंदगी में ऐसे भी मोड़ आया करते हैं l दिल लगाने वाले ही दिल दुखाया करते हैं l गर्दिशों के मारों से कौन बात करता है l दोस्त भी मुसीबत में मुस्कुराया करते हैं l मशविरा तो दे देना पर मदद मती करना l लोग एहसानों को भूल जाया करते हैं l हम किसी से दुनिया में दुश्मनी नहीं रखते l लोग जाने क्यों हमको आजमाया करते हैं l ‘दीप’ कौन समझाए बेशऊर लोगों को…

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"Gazal by Dr. Dipti Gour ‘Deep’"

0218 – Vikram Gathania

Kavita : सफर दिन का सफर भी क्या कि अभी गुजरो ये जो दिखते पहाड़ हैं यह जो नदिया बहती है उड़ती चिड़िया जो कहती है सब छूट जाता है अभी ! रात का सफर भी क्या है कि खूबसूरत एक स्त्री हुई उसे ईर्ष्या हु�ई मुझसे मैं क्यों इतना सुंदर ख्याल और सोती भी रही मेरी बगल में उनींदी बस में सफर में ! Kavita : एक लड़के से ** मैं कह रहा था…

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"0218 – Vikram Gathania"