#Kavbita by Kishor Chhipeshwar Sagar

तुम्ही से प्यार किया तुम्ही से छुपाते रह गए देखा किया चोरी चोरी चुपके चुपके तुम्ही से नजरे चुराते रह गए ना कर सके इजहारे प्यार ना जाने क्यों हम घबराते रह गए तुम थे कितने करीब तुम्हारे थोड़े और करीब आते आते रह गए -किशोर छिपेश्वर”सागर” बालाघाट 9584317447

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"#Kavbita by Kishor Chhipeshwar Sagar"

#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan

कितने भूले हुए नग़्मात सुनाने आए, फिर तिरे ख़्वाब मुझे मुझ से चुराने आए..   फिर धनक-रंग तमन्नाओं ने घेरा मुझ को, फिर तिरे ख़त मुझे दीवाना बनाने आए..   फिर तिरी याद में आँखें हुईं शबनम शबनम, फिर वही नींद ना आने के ज़माने आए..   फिर तिरा ज़िक्र किया बाद-ए-सबा ने मुझ से, फिर मिरे दिल को धड़कने के बहाने आए..   फिर मिरे कासा-ए-ख़ाली का मुक़द्दर जागा, फिर मिरे हाथ मोहब्बत के…

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"#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan"

#Kavita by Munish Bhatiya Ghayal

खुश्क नजरों के पैमाने हो गए आज हर घर में ही थाने हो गए कहती बीवी मैं ही थानेदार हुं आज गुंडों की मैं ही सरदार हुं हम ही बस हम ही निशाने हो गए आज हर घर….. सास कहती है बड़ा कमबख्त तुं लड़ता बेटी से मेरी हर-वक्त तुं पल-पल मुश्किल में बिताने हो गए आज हर घर…… साले की धमकी मिले हरदम हमें आंकता है क्या तुं साले कम हमें आंख दो होते…

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"#Kavita by Munish Bhatiya Ghayal"

#Kavita by Ram Shukla

भले आगाज ऐसा है, मगर अंजाम अच्छा हो | दवा कड़वी भी पी लेंगे, मगर परिणाम अच्छा हो | कठिन है दौर जो लाया, इसे भी देख लेंगे हम | तेरे निर्णय की क्षमता का, सफ़र भी देख लेंगे हम | भरी हुँकार तूने जो, खलदल सभी काँपे | भक्ति और शक्ती से, प्रफुल्लित वीर जन सारे | भले हो राह पथरीली, मगर मंजिल तो स्वर्णिम हो | मेरा आगाज बद्तर है, मगर अंजाम बेहतर…

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"#Kavita by Ram Shukla"

#Kavita by Surendra Kumar Singh

मैं हूँ मौजों का समुन्दर ****** मैं हूँ मौज़ों का समुन्दर मेरी बाँहों में आ कटीली राह में बेचैन भटकने वालों मैं हूँ मौज़ों का समुन्दर मेरी बाहों में आ।   रेत के महल में,ख्वाबों की सुनहरी किरणें अधूरे साज पर बजती हुयी अनगिन गजलें आँख में प्यास की धड़कन की आहटें सुन लो अधर पर फूलों का बगीचा है कलियाँ चुन लो फ़िजा में तैरती अनहोनी में खोने वालों मैं हूँ जीवन का समुन्दर…

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"#Kavita by Surendra Kumar Singh"

#Kavita by Durgadas Pathak , Anurag

लज्जा (शर्म)   देश हित मे जो न खोला वो खून नही वो पानी है अब तो शर्म करो तुम, ऐ कैसी नादानी हैं।     घाटी घायल है तो केवल, आस्तीन के साँपों से। नमक हराम,कमज़र्फ दोगली जयचंदों की संतानों से।     भूल रहे हो तुम प्रलय पड़ा जब जब घाटी पर पराधीनता के संकट आये थे जब केसर की माटी पर     देश हित मे जो न खोला वो खून नही…

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"#Kavita by Durgadas Pathak , Anurag"

#Kavita by Kumari Archana

” तुम मेरा दिल में हो” ** मेरा दिल तुम्हारे हाथों में है जैसे कोई आईना ! मेरी जान तेरे कदमों में है जैसे की धूल! मैं तुम्हारे बाँहों में कैद हूँ जैसे कि बंदनी ! मेरी धड़कती साँसे कहती है तुम मेरे दिल में हो !   कुमारी अर्चना

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"#Kavita by Kumari Archana"

#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati

कब तक जीवोगे गुलाम की तरह चुसते रहेंगे वो तुम्हे आम की तरह रावण-कुंभकरणो को सबक सीखाने उठा लो अब धनुष श्रीराम की तरह संजय अश्क बालाघाटी 9753633830

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"#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati"

#Kavita by Krishna Sharma Maharaj

रोता हुआ चिराग बुझता नहीं कभी तेरे इश्क में दीवाना मरता नहीं कभी इस मयकशी से दर्द बढ़ता नहीं अगर साकी तेरे मैखाने में आता नहीं कभी तेरे हुस्न की इबादत में गुजरी है जिंदगी इक तेरे सिवा और सोचा नहीं कभी शब ने मुझे सौगात दिया है गजल की मैं चांद की खातिर सोया नहीं कभी।   *** पत्थर की तरह दिल को तराशा है बार-बार एक ताजमहल हमने बनाया है बार-बार हम तो…

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"#Kavita by Krishna Sharma Maharaj"

#Kavita by Ajeet Singh Avdan

कलाधर-छंद ~~~~   हैं दिनेश रश्मियाँ वशुन्धरा दुलारती, निखारती संवारती सुहावनी सुवर्णता । कंचनीय सूर्यपात शोभनीय मोहिनी, उदार हो प्रभा-छटा अकास है उड़ेलता ।।   डाल-पात को झकोर झूमती चली हवा, सुगंध साथ में लिए लुभा रही यदा-कदा । माधुरी विभात गीत गा रही सुकोकिला, मधूकरी लजा रही उड़े छिपे लता-लता ।।   लक्ष्य के प्रयास में अधीर बावरे हुए, बयार वेग में पराग पुष्प भौंर चाहते । टोह में उमंग की सुसंग प्रेम जोहते,…

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"#Kavita by Ajeet Singh Avdan"

#Gazal by Alok Shrivas

  सूनी आँखों का मंजर  तुम्हे दिखलाएँ कैसे। प्यार के गीत शुष्क होठों से गुनगुनाएँ कैसे।।   है पड़ी बंजर जमीं कब से इस मेरे दिल की। बिन सावन आंखों का तेरी  लहलहाएँ कैसे।।   बेतरतीब सी ये जिंदगी  उलझन में है घिरी। ये वो अलकें नहीं तेरी फिर सुलझाएँ कैसे।।   खामोशियाँ दीवार की इस कदर है चीखती। तेरी आवाज की सरगोशियाँ हम लाएँ कैसे।।   बहुत आसान था भुला देना मेरी उल्फ़त को।…

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"#Gazal by Alok Shrivas"

#Geet by Dipti Gour ‘Deep’

गीत   नशा नाश कर देता, सारे जीवन के उजियारे को l पास नहीं बिठलाता कोई, एक नशे के मारे को l   भांग,चरस,कोकीन, तम्बाकू, ब्राउन शुगर सब जहरीले l पल में पागल हो जाता है, मद्य का प्याला जो पी ले l घर की बर्बादी का सूचक, समझो सहज इशारे को l   आय से ज्यादा व्यय हो जाता, आमदनी घट जाती है l जीवन शैली मुख्य धारा से, शनै:-शनै:  कट जाती है l…

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"#Geet by Dipti Gour ‘Deep’"

#Shayari by Amit kaithwar Mitauli

कोई आंखों से पिलादे या जाम से मुझे शुरूर नहीं होता. मुझे जो कुछ भी दिया है खुदा ने मुझे गुरूर नहीं होता . एक शख्स है जो मेरे दिल में,धड़कन में घर किए बैठा है मैं पूरी कोशिश करता हूँ मगर वो मुझसे दूर नहीं होता. मैंने उसका जिक्र कर कर के बहुत मशहूर कर दिया. लाख कोशिश की मगर उसके आगे मैं मशहूर नहीं होता. -अमित कैथवार मितौली – -9161642312-

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"#Shayari by Amit kaithwar Mitauli"

#Gazal by Jalaram “Jajbati”

फ़ाइलातुन मफाइलुन फैलुन ————————– कैसे कह दूँ कि तुझ से प्यार नहीं, अपनी किस्मत पे एतबार नहीं। चाहे तुम ने वफ़ा न की लेकिन, बेवफाओं में तुम शुमार नहीं। है यकीनन वो भार दुनिया में, आदमी जिस का कुछ वक़ार नहीं। हो सके तो यकीन कर लेना, मेरी चादर है दाग़दार नहीं। हाँ ये सच है की मैं हूँ ‘जज़्बाती’, तल्ख़ बातें हरेक बार नहीं। ©जालाराम_’जज़्बाती’

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"#Gazal by Jalaram “Jajbati”"