#Kavita by Ajeet Singh Avdan

कलाधर-छंद ~~~~   हैं दिनेश रश्मियाँ वशुन्धरा दुलारती, निखारती संवारती सुहावनी सुवर्णता । कंचनीय सूर्यपात शोभनीय मोहिनी, उदार हो प्रभा-छटा

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