#Kavita by Vishal Narayan

-“मैं ओस का मोती”— **   मैं इक ओस का मोती हूँ जिसने बस बिखरना जाना है.   बरसना है सारी रात मुझको सूबह मोती सा जगमगाना है भरकर मुस्कुराहटें चेहरों पर बहती हवाओं में खो जाना है मैं इक ओस का मोती …. जिसने बस बिखरना जाना है.   मैं रहूँगा हरपल संग में उसके जिस को मैंने अपना माना है बिखरूँगा कभी हँसी बनकर या पलकों पे झिलमिलाना है मैं इक ओस का…

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"#Kavita by Vishal Narayan"

#Kavita by Naveen Kumar Jain

महावीर फिर आओ इक बार ** युग की है यही पुकार, फिर हो महावीर अवतार जियो और जीने दो, गूँजे हर घर, मंदिर, हर द्वार युग की है यही पुकार, फिर हो महावीर अवतार सत्य, अहिंसा धर्म हो मिट जाए अत्याचार युग की यही पुकार, फिर हो महावीर अवतार हे वीर ,अतिवीर,सन्मति हे महावीर, हे वर्धमान प्राणियों की सुनो पुकार कर दो सबका कल्याण गाय और सिंह एक घाट फिर साथ पिएँ पानी दिगंबर श्वेतांबर…

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"#Kavita by Naveen Kumar Jain"

#Kavita by Mukesh Madhuram Bareli

आशाओं और विश्वास से हर लक्ष्य मिल जायेगा जो हो जाओगे निराश तो भाग्य भी रूठ जायेगा   असम्भव नहीं है कुछ भी यहाँ बस मानने की बात है विश्वास है स्वयं पर तो हारा हुआ मनुज भी जीत पायेगा   जिसने भी पाया है जग में पहले स्वयं पर विश्वास किया है शंका का तो कोई समाधान कभी समाधान न बन पायेगा   जीवन्त बनो सजग रहो और दुनिया को बहुत प्यारा मानो दूसरों…

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"#Kavita by Mukesh Madhuram Bareli"

#Muktak by Mohit Jagetiya

तुम  दूर  भी जाओ  हम  तुम्हारे पास आएंगे । खुशियों  की झोली कभी तुम्हारे पास लाएंगे । जैसा भी  साथ मिला है आपका इस जिंदगी में , आपकी  ये दोस्ती हम कभी भूल नही पाएंगे । *** कभी गीत कभी गजल कभी छंद बनों । हल्की  हल्की  मुस्कान  से  मन्द  बनों । तुम जीवन ऐसा जिओ स्वाभिमान का, कल  के  तुम  स्वामी  विवेकानंद बनों। मोहित

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"#Muktak by Mohit Jagetiya"

#Kavita by Ram Sharma, Bharatpuri

प्यारी ओ प्रियतमा , यूं सताया ना कर | थोडी नजरों से हमको,  पिलाया भी कर ||   ये यादें ये रातें ,और सपने मेरे घर पराऐ नही , ये सब घर हैं तेरे यहां घडी दो घडी, आया -जाया भी कर || 1. थोडी नजरों से हमको….   ऐसे गुमशुम रहने कीं , क्या है वजह , कोई शिकवा शिकायत, तो मुझसे कह, मैं हक हूं तेरा , हक जताया भी कर ||       2.…

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"#Kavita by Ram Sharma, Bharatpuri"

#Kavita by Sanjay Shukla

तब समझो आई है होली।। ** लाल हरा नीला व् पीला।। मन उल्लासित तन हो गीला।। तन मन में जब मस्ती छाये ।। मन काबू में ना रह जाए।। हर मन में जब उठे उमंग।। झूम रहे हो सब मिल संग।। गूँज रहे हो ढोल मृदंग।। नाच रहे एक दूजे संग ।। हर चेहरा हो जब लाल।। चेहरे पर हो लगा गुलाल।। सर पर चढ़ी हुई हो भंग।। हाथो में हो सबके रंग।। गांव शहर…

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"#Kavita by Sanjay Shukla"

#Kavita by Shivansh Bhardwaj

विता   इस ज़िन्दगी में वे कभी मिली नही आँखों को हमारी वे कभी दिखी नही रही उम्र किसी की तलाश में ही हमारी वे अब हमारी भी लगता है रही नही ग़म बहुत रहे उस उम्र मेँ भी जिसमें महकें फ़ूल खिले वे हमें कभी दिखे कभी नही हा अपने होकर भी ज़रूर मिलें शिवाँश  भारद्वाज  8802358838

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"#Kavita by Shivansh Bhardwaj"

#Kahani by Neha Agrawal Neh

” सपनों का महल ” ** अपने शानदार केबिन में कॉफी की धुंआ उड़ाते मग को वो अभी अपने लबों पर लगा भी नहीं पायी थी । की कानों में फिर से पापा की आवाज गूजंने लगी। ” तू समझती क्यों नही कमली की अम्मा रेत का महल लहरों की जद में आकर बिखर ही जाता है ,इस बच्चे को जन्म देकर तूने जो खानदान के नाम पर बट्टा लगाया है ना वो मिट नहीं…

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"#Kahani by Neha Agrawal Neh"