#Kavita by Akash Khangar

लोग पूछते है सारी रात जागकर क्या करता हूँ क्यों अपनी रातो की नींद बर्बाद करता हूँ उन्हें कैसे बताऊँ ये बात मेरे यार अपनी गलतियों पर खूब पछताता हूँ खुद से खुद की लड़ाई लड़ता हूँ कभी खुद ही बनता मुजरिम कभी बेगुनाह बनता हूँ मैं रोज मिलता हूँ खुद से बुनता हूँ कोई माला हर रात फिर सुबह होने तक मोतियो सा बिखरता हूँ अब न पूछना कभी मुझसे ये मैं तुमसे नही…

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"#Kavita by Akash Khangar"

#Gazal by Dr. Yasmeen Khan

सुनी दिल की वही आवाज़ हमने। झिझक देखी किसी की आज हमने।।   ज़माना इसलिए हमसे ख़फ़ा है। बदल डाले सभी अन्दाज़ हमने।।   उतर आया ज़मीं पर आस्माँ क्यों। शुरू की ही नहीं परवाज़ हमने।।   तुम्हारी लय कहाँ मिल पाई उससे। बजाया लाख दिल का साज़ हमने।।   खुले गर तो पलट जाएगी दुनिया। छिपा रक्खे हैं इतने राज़ हमने।।   निराशा हाथ आई यास्मीं जब। बदल डाला है ख़ुद को आज हमने।।…

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"#Gazal by Dr. Yasmeen Khan"

#Kahani by Vikas Pal

मेरा प्यार वो है ** व्योम साइकिल बढ़ाए चला जा रहा था, जाँघें भर गई थीं। थके पैर साइकिल के पैडलों से कुश्ती लड़ने से इंकार कर रहे थे। साँस की वजह से पेट के साथ छाती भी गुब्बारा हो रही थी। हारकर उसने साइकिल धीमी कर दी और लम्बी साँसें  छोड़ने लगा। पूरी मेहनत बेकार। ये पाँड़े भी, थोड़ी देर बोल के घण्टा भर अरझाए रखता है, नहीं तो आज उसका सिस्टम बन जाता।…

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"#Kahani by Vikas Pal"

#Kavita by Kapil Jain

होली की रातों में…   रंग ये कोई ले आये जज्बातों में जी सकूँ खुश हुए हालातों में किस्मत भी गुमाँ करे शोहरत पर अपनी दस्तक दे नसीब भी मुलाकातों में तकिये पर रखा हो उम्मीद सूरज का पुष्पों का रश भरा हो मुस्काहटों में तंग हो गली खिखिलाहटों से अपनी रुकावटें ना हों दिल की बातों में साग भात सा मिलन लेकर आँखों में रातभर जागे हम होली की रातों में… कपिल जैन  …

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"#Kavita by Kapil Jain"

#Kavita by Sanjeev Kumar

वो अपने लिए नहीं जीती हर खुसी को छोड़ कर दुख है समेटती सारी खुशियाँ न्यौछावर करके आंचल में मुँह करके रोती समाज के कुछ नामर्दों ने इनके पर है काटे हाथ उठाकर नारी पर दम अपना आजमाते जब नारी की हया लगी सत्यानाश हो जायेगा पंख दे दो इनके उड़ानों को हटा दो सारी बंदिशें    

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"#Kavita by Sanjeev Kumar"

#Kavita by Gopal Kaushal

चिड़िया *** चीं – चीं करती आंगन में चिड़िया आई संग अपने तिनका-तिनका बिनकर लाई । पंख खोलकर बच्चों संग खूब इठलाई घरौंदे के  लिए  समान जो जुटा  लाई ।। बच्चों मत करों आपस में तुम लडाई मैं तिनके संग दाना -पानी भी हूँ लाई । तिनके-तिनके से बनता है आशियाना इसलिए हमारा घर मत तोड़ना भाई ।।

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"#Kavita by Gopal Kaushal"

#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है   //   ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है  // तू बच्ची को भी हुस्न – ए – बहार कहता है  //   थक  गया है हर शख़्स काम करते करते  // तू इसे अमीरी का बाज़ार कहता है।   गांव  चलो वक्त ही वक्त  है सबके पास  !! तेरी सारी फ़ुर्सत तेरा इतवार कहता है //   मौन  होकर…

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"#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan"

#Kavita by Munish Bhatia Ghayal

हरियाणा आखिरी तक पढना मजे की गारंटी ** वाह मिली वाही मिली पर बीवी अनचाही मिली सोचा साली तो सुंदर है लेकिन वो भी ब्याही मिली साले की बीवी देखी तो कुछ दिल को सुकून मिला हाथ लगी निराशा यहां भी वो कहती हमको भाई मिली आंख में काजल लबों पे लाली खूबसूरती का ठोर नहीं मैं कहता उसको सासु मां वो कहती हमें जंवाई मिली आस नहीं छोड़ी हमने ओर तकने लगे पड़ोसन को…

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"#Kavita by Munish Bhatia Ghayal"

#Kavita by Kumari Archana

“अब मैं चुप नहीं रहूँगी” ** बहुत हो गया ! तुम्हारे जुल्मों का इतिहास हो गया जीने कितनी सदियाँ बीती पर तुम्हारी जारशाही नहीं गई ना मेरी गुलामी !   मैं आजादी चाहती हूँ मेरे शरीर की मेरे गर्भ की मेरे बेटी जनने की मेरे खुलकर हँसने की मेरे बहुत बोलने की मेरे पर रोका टोकी करने की   मैं अब चुप नहीं रहूँगी बहुत हो गया!   मुझे सारे अधिकार,स्वतंत्रता व समानता बराबरी में…

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"#Kavita by Kumari Archana"

#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

अपनी ही दुनिया मे मस्त है हम तो भीम के भक्त है.   उठ रही हर तरफ से सदा बदल रहे ताजो तख्त है.   खत्म हो गई राजे शाही बदला गूलामो का वक्त है.   अछूत हमे कहने वालो सबका लाल ही रक्त है.   चमक रहा दुनिया मे नाम हम दलित नही फक्त है.   जो हमारा है वो हम तक आयेगा हक के लिये हम सख्त है.   मेहनत रन्ग जरूर लाती…

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"#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati"

#Kavita by Ajeet Singh Avdan

शराबी { नशा } ~~~ पीनी पड़ी शराब जो, जिद पे आए आप । पैमाने से हो शुरू, बोतल का है माप ।।   आँखो की इन मस्तियों, को दारू में डाल । नशा बना बे-जोड़ वो, करते रहे कमाल ।।   मैं बेचारा पी गया, कितनी किसको होश । जब नाली में गिर पड़ा, हुए फ़ाख़्ता होश ।।   हाँथ पाँव मुँह टूट के, बे-दम हुई शरीर । पोर-पोर अब टूटता, हर हड्डी में…

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"#Kavita by Ajeet Singh Avdan"

#Kavita by Krishna Sharma Maharaj

आपने अपना नामो-निशां छोड़ा होता तो मेरे खत का लिफाफा नहीं कोरा होता ये हकीकत है कि आप सा कोई ना मिला आप मिलती तो मैं खुद से ना जुदा होता मुझे पता है मेरे रूह में बस आप ही हैं काश! आपके रूह में मेरा भी पता होता बह रही है जमीं पे चांदनी की नदी तैरते साये का कोई तो किनारा होता ।

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"#Kavita by Krishna Sharma Maharaj"

#Kavita by Jyoti Mishra

चोरी ** चोरी -चोरी नजरों का मिलना चोरी -चोरी दिल में उतरना चोरी -चोरी तुझको चुराना चोरी से फिर  आजमाना … मिलने का ढूंढे बहाना चोरी न जाने जमाना मुश्किल है सबसे छुपाना होठों पे ताले मगर सब कह डालें नजऱ. हो जाए सबको खबर चोरी की मिलती सजा मिल जाए उसकी रजा चोरी में भी है मजा…….!   ज्योति मिश्रा

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"#Kavita by Jyoti Mishra"

#Kavita by Ashok Singh Styaveer

पथदर्शी नवदीप जलाऐं **   आओ इस घातक अँधियारे में भी, अपनी राह बनाऐं । विषवाही मन में युगकारी, पथदर्शी नवदीप जलाऐं।।१।।   छिन्न-भिन्न हों, गलें मूल से, ये कुत्सित, घातक मंसूबे। जिससे दुर्निवार अभिलाषा, के पातक अब पूरे डूबें।   सावधान, संधान करो अब, निष्ठुर ग्रह विलीन हो जाऐं । विषवाही मन में युगकारी, पथदर्शी नवदीप जलाऐं।।२।।   चिन्ता की क्या बात? रखो सुदृढ़ इच्छाबल। गर्वभरी नव गूँज, भरेगी उर में संबल।   यदि…

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"#Kavita by Ashok Singh Styaveer"

#Kavita by Gopal Vinod , Bareli

शाहजहाँ और ज़फर ** जिसकी तामीर हुई है उसको एक दिन ख़ाक में मिलना है ज़रूर ताज भी एक दिन खण्हर होगा तब भी दुनिया में रहेगा ये मुहब्बत का सुरूर   ताज जैसी न हो तामीर इमारत कोई इसी फितूर में नक्काशों के हाथ काट दिए एक खुदगर्ज इंसां के सिरफिरेपन ने तमाम लोग क्यों ज़िन्दा ज़मी में पाट दिए   उन कटे हाथों पे खड़ा दीख रहा ताजमहल ज़िन्दा लाशों पे खड़ा दीख…

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"#Kavita by Gopal Vinod , Bareli"

#Muktak by Manish Soni

पाकिस्तान की तरफ से फिर से सीज फायर के उल्लंघन पर——-   हो रहा है पुलकित खुद ही खुद में छुप कर हमला बोल रहा, भारत के वीर जवानों को जो हल्के में तू तोल रहा, ऐ पाक! बंद कर दे तू अब ये बचकानी हरकत करना, अभी मान जा नादां वरना काल तेरा मुँह खोल रहा !!!_मनीषसोनी

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"#Muktak by Manish Soni"

#Kavita by Mukesh Bohara Aman

क्या धन देगा मुझे उबार । ** जब दिन होगा मरण द्वार पर, क्या धन देगा मुझे उबार । बार बार सोचा है , सोचूं , धन के मोह को डालूं मार ।।   उसकी दस्तक मांगे जीवन, तब क्या करेगा लाखों का धन , जीवन से धन सम्भव लेकिन, धन से जीवन , सोच बेकार ।   ऋतुओं पर ऋतुओं का आना, कुदरत का सब आना जाना, धन से कभी ना रूकती कुदरत ,…

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"#Kavita by Mukesh Bohara Aman"