#Kahani by Rifat Shaheen

लघुकथा सवाल क्या चाहिये मुझे तुमसे? तुम्हारी ज़िन्दगी के वो पल जो बच रहे हैं सबको देकर। या वो जज़्बात जिसकी बारिश में भीग चुके है कई बदन,वो सांसे जो टकरा चुकी है किसी और सांसों से,वो खुशबु जो बिखर चुकी है कई रेशमी आँचल पर,वो सेज जिस पर पड़ी है न जाने कितनी सिलवटें। मुझे तो ये बासी पन भी कुबूल है फिर क्यों ख़ामोश हो तुम? क्या चाहिए मुझे तुमसे?  

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"#Kahani by Rifat Shaheen"

#Kavita by Kshitij Bawane

  °मन्नतें काम नहीं आएंगी. ** मन्नतें काम नहीं आएंगी ना दुआओं का कुछ असर दिखेगा अगर तबीयत से कोशिश नहीं होगी हर ख्वाब अधूरा रह जायेगा!   रुक जाने से बात नहीं बनेगी ना थक जाने से कोई फायदा होगा अगर लहरों से डर जाएगी कश्ती तो कभी किनारा नसीब नहीं होगा!   ख़ुदा का रहम नज़र नहीं होगा ना हाथ की लकीरें करम करेंगी अगर जुनून ज़रा भी कम रह जायेगा मंजिलें बस…

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"#Kavita by Kshitij Bawane"

#Kavita by Suresh Bhatia . Bhopal

संत्री से मंत्री तक डूबे व्यापम घोटाले में निकलेगे और अजूबे व्यापम घोटाले में   पढना लिखना प्रतियोगिता व्यर्थ हो गया नौकरी पा गये दूजे व्यापम घोटाले में   मामा भांजियों की शादी में व्यस्त था इधर जम कर बेंड बजे व्यापम घोटाले में   रिश्वत ले दे कर बन गये सरकारी दामाद देखो कैसे दूल्हे सजे व्यापम घोटाले में   जाँच पर जाँच अब सी बी आई जाँच बिखर गये सारे मनसूबे व्यापम घोटाले…

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"#Kavita by Suresh Bhatia . Bhopal"

#Kavita by Dipti Gour ‘Deep’

गीत ** भारत देश महान है, भारत मेरी जान है  l भारत के सदके में मेरा,जानो-दिल कुर्बान है l 1, भारत भूमि गौरवशाली, रामकृष्ण भगवान की l ईसा,मूसा,नानक,गौतम, महावीर भगवान की l शूर वीर बलवानों का यही जन्म स्थान है l    हर मजहब के फूल खिले हैं,भारत के गुलदान में l प्रेम ,मोहब्बत भाईचारा, देखा हर इंसान में l मिली-जुली तहजीब यहां, मानव एक समान है l    जब जब संकट आया सबने,रक्षा की इस देश…

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"#Kavita by Dipti Gour ‘Deep’"

#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh

आनंद **   सुख से अनंत गुना एवं उससे भी परे की सर्वोच्च अवस्था, आनंद है । यह किसी बाहरी उत्तेजना से संबंधित नहीं है, बल्कि आनंद आत्मा से संबंधित एक अनुभूति है , हमारे विचार का एक भाग है, जो हमारी भावनाओं से जुड़ा होता है । यही कारण है, आनंद , मन को मिलने वाले सुख की तुलना में उच्चस्तरीय एवं अधिक सुख का अनुभव देता है । जब हम आत्मा से आनंद…

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#Kavita by Shiva Kumar Pandit

सड़कों पर इतना संघर्ष कर परिस्थियों के लायक बन गया लोकलुभावन कुछ नारों से अच्छे कार्यों के विरोध से रातोंरात जननायक बन गया रटेरटाये भाषणों के भटनायक बन गया सता किसे अच्छा नहीं लगता पर इतनी लोलुपता ठीक नहीं शीर्ष पर पहुँचने की जल्दी में नीतियों का खलनायक बन गया शिव कुमार पंडित कोलाकुसमा,धनबाद

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"#Kavita by Shiva Kumar Pandit"

#Gazal by shivmurti tripathi chandresh

जान बूझ कर खैर न पूछो कैसा हूँ किस हाल में हूँ | सबके जैसे मैं भी उलझा दुनिया के जंजाल में हूँ || काल बनी कुछ बड़ी मछलियाँ हम छोटों की ताक में हैं | जान बचने खातिर दुबका डर कर मै शैवाल में हूँ || बदल रहा है राग पुराना बदल रहे सब अपने साज़ | ऊपर वाले की रहमत से अब भी मै सुर ताल में हूँ || जब तक है धरती…

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"#Gazal by shivmurti tripathi chandresh"

#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

रे नेता काहे होत उदास नहीं सफल इस बार हुआ तो,काहे का घबराना बोझ आत्मा पर बतलाकर ,सत्ता दल में जाना बेशर्मी के साथ पुनः ,चरना सत्ता की घास रे नेता काहे होत उदास सब में वही आत्मा बसती अलग अलग है देह देह नहीं आत्मा को पकड़ तू ,हो जाएगा विदेह सत्ता के वैकुण्ठ में संभव ,देह सहित ही प्रवास रे नेता काहे होत उदास हाथ में माला होनी चाहिए,मन में नागफनी हो वस्त्र…

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"#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan"

#Kavita by Lucky Nimesh

इस तरह उलझी रही है जिन्दगी,,,,,, कोन कहता है सही है जिन्दगी।।।।। उलझनो का हाल मै किससे कहु,,, आँख के रस्ते बही है जिन्दगी।।।। अब नही पढना नशीब में इसे,,, गर्द सी मुझपे जमी है जिन्दगी।।। ना सुकूँ है दिल बडा बेचैन है,,, आग के जैसे जली है जिन्दगी।।।। उलझनो में ही सदा उलझा रहा,,,, मकङियो के जाल सी है जिन्दगी।।। ख्वाब है ना आखँ में नींदे कहीं,,,,, खार सी चुभने लगी है जिन्दगी।।। फुरसतो…

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"#Kavita by Lucky Nimesh"

#Kavita by Amit kaithwar mitauli

कदम कदम पर फूल मिले मुझको शूलों से प्यार हुआ. मैंने तो सोंचा एक बार पर दर्द मुझे कई बार हुआ. रोना है हंसना भी है गिरना है उठना भी है. लेकिन इन हालातों से मुझको उबरना भी है. लोगों ने कह डाला क्यों दर्द को पाले बैठे हो . अब ऐसा लगता है दर्द का मेरे ऊपर अधिकार हुआ. कदम कदम…. आ जाओ यदि तुम फिर से किस्मत ये बदल जाए. टूटा पड़ा जो…

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"#Kavita by Amit kaithwar mitauli"

# Kavita by Shambhu Nath

मोहे मत मारो ननद पिचकारी ॥ देखात नहीं तुमका है पाँव भारी ॥ सर्दी लग जाये बुखार आय जाये ॥ पकड़ लेगी मोहे तगड़ी बिमारी ॥  पेट में लल्ला डोल रहा है ॥ बुआ बुआ तोहे बोल रहा है ॥ जल्दी से आयेगी लल्ले की बारी ॥ सर्दी लग जाये बुखार आय जाये ॥ पकड़ लेगी मोहे तगड़ी बिमारी ॥ जाय दुवारे उधम मचाओ ॥ मान जाओ रानी हमें न सताओ ॥ जवानी में ज्यादा…

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"# Kavita by Shambhu Nath"