#Gazal by Alok Shirivas

ग़ज़ल *** नफरतों का बीज बोया किसने पता नहीं। ये गलतियाँ थी मेरी कोई तेरी खता नहीं।। आरजू जो पाने की हम तेरी किया करे। तू नहीं मेरे नसीब में ये मुझको बता नहीं।। मुक्कमल नहीं जिंदगी अब तो तेरे बगैर। संग छोड़ के मेरा अब मुझको सता नहीं।। एहसान है तेरा मुझ पे जो चाहा था कभी। अब नही दिल में चाहत मुझको जता नहीं।। आँखों से बरसा आँसू मन भीग सा गया। न…

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"#Gazal by Alok Shirivas"

#Kahani by Vishwa Vijay Pratap

I WAS THE KILLER   चारो तरफ घना कुहरा छाया रहता है…… अगर किसी को देखना पडे तो सिर्फ हल्का-हल्का सा चेहरा दिखाई पडेगा वो भी ये नही पहचाना जा सकता है कि किसका चेहरा है। वहा का जगह पथरीली, चारो तरफ ऊचे-2 पहाड….टूटी-फूटी बस्ती जिसमें लोग रहते है। थोडी दूर पर आवाजे सुनाई पडती है। “ मारो……..मारो…….मारो……..मारो………..” आवाजो को सुनकर सारे बस्ती वाले अपने-2 घरो से बाहर आ जाते है ……। दूर सामने से…

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"#Kahani by Vishwa Vijay Pratap"

#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

मेरा क्या है? सोचना कभी तुम इस बारे में खोजना जवाब इस सवाल का तुम्हारा सारा अहंकार उड़ जाएगा तुम्हारा घमण्ड टूट कर बिखर जाएगा जब इस सवाल का खोजने जवाब जाओगे कड़वी सच्चाई से तुम्हारा सामना होगा अहंकार की पट्टी आँखों से खुल जाएगी और जीवन में एक नया उजाला होगा बस एक यही सवाल है जिसका जवाब हमें मोक्ष की प्राप्ति तक लेकर जाता है सारी अकड़ निकल जाती है मनुष्य की इस…

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"#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat"

#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

पूछ रहा हूं मैं बगिया के इस गुलशन के माली से लिए हाथ खू़नी खंजर कातिल बैठा हर डाली पे — कौन बचाएगा गुलशन के रंग बिरंगे फूलों को सींचेगा इस मधूबन को काटेगा चूभती शूलों को — ये बगिया भारत मां की बेेटों की अमिट निशानी है राणा शिवा गुरु भगत शेखर की अमर कहानी है —- भारत माता के खातिर फांसी का फंदा चुम लिया मौत को अपने गले लगाकर पथ क्रांति का…

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"#Kavita by Uday Shankar Chaudhari"

#Gazal by Pankaj Sharma Parinda

गांव   में  जब   हम   पुराने  घर  गये देखकर  मंज़र  वहाँ   का   डर  गये। =========================== गूँजा  करती  थीं  जहाँ  किलकारियाँ क्यूँ  वहाँ  हालात   हो   बदतर  गये। =========================== एक  थी   दीवार   आँगन   में   खड़ी देखकर जीते  जी  हम  तो  मर गये। =========================== पूछती  हैं  प्रश्न  घर  की  खिड़कियाँ किसलिये हमको यूँ’ तनहा कर गये। =========================== झूमते बागान  थे  जिस  जिस  जगह फूल बिन पतझड़ के उनसे झर गये। =========================== लहलहाती  थी  फसल  खेतों  में तब आज   देखा  …

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"#Gazal by Pankaj Sharma Parinda"

#Kavita by Ishwar Dayal Jaisval

← मेरा  शहर→                                                     मेरा शहर !                                                                   इक्कीसवीं सदी में                                                            श्मशान बन गया है।                                                            शहर की पाश कालोनियों में                                                  अब इंसान नही,                                                               चलते-फिरते मुर्दे दिखाई पड़ते हैं ।                                        वैसे तो                                                                           खपरैल, बैलगाड़ियां, टूटी-फूटीं पगडंडियां                               अतीत का इतिहस बन गईं हैं,                                                     चारों तरफ चिकनी सड़कों पर                                               फर्राटे भरती हुई कारों की लंबी कतारें,                                    ऊँची चिमनियों से धुएँ उगलते हुए                                         बड़े-बड़े कल-कारखाने,                     दीखती जरूर है                              लेकिन!                                          वह दर्पण दिखाई नहीं देता                जिसमें हम पूरे समाज को देखते थे…

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"#Kavita by Ishwar Dayal Jaisval"

#Shayari by Ishq Sharma

1 मेरे ख़्वाब मीठे आये मुझे स्वाद भरा खिलाती है खुद लूखी-सूखी खाकर #माँ चुपके सो जाती है   2 कलम से मुझे अपनी ये कलाम लिखना है दफ़ा लाख दुआ में #माँ तेरा नाम लिखना है   3 तकलीफ़े सारी दूर हो गई तेरी आहट से माँ नींद भी अरसों बाद आई तेरी गोद की गर्माहट से माँ   4 सब किताबें फाड़ दी इश्क़ के चाहतों की, रहने दिया लफ्ज़ #माँ तब नींद…

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"#Shayari by Ishq Sharma"

#Muktak by Manish Soni

दरख्त के सूखे पत्ते ही झरे नहीं हैं अभी, जो भी मिले हमें वो खरे उतरे नहीं हैं अभी, ऐ जिंदगी !! प्लीज़, न देना अब कोई नया जख्म……. जो भी दिये हैं वो ही भरे नहीं हैं अभी !!!!  #__मनीषसोनी  

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"#Muktak by Manish Soni"

#Kavita by Jyoti Mishra

कौन कहता है कि तुम मेरी बाहों में रहो जाओ चाहे दूर जितना, बस निगाहों में रहो दर्द जितने भी दो, हंसकर सह लेंगे हम शर्त  इतनी सी है, मौजूद़ मेरी आहों में रहो …   चाहो जिसको उससे कुछ भी न चाहो ए दिल मुनासिब है नहीं के तुम भी उसकी चाहों में रहो फूल बेशक बिछाओ राहों में उसके पर कांटे बनकर नहीं उसके मुकामों में रहो …   हर सांस ये कहती…

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"#Kavita by Jyoti Mishra"

#Kavita by Vipul Sharma

देखना चाहता हूँ =========== देखना चाहता हूँ तुम्हे हर लम्हा हर घडी अनवरत देखना चाहता हूँ वो नेह मेरे लि़ये जो भरा है तेरी आंखों मे वो अपार नेह, जिसमे शामिल हूँ मैं तेरा बनकर तेरे लिये कहाँ नही दिखायी देती हो तुम मुझे कब नही होता है एहसास तेरा नदी की कलकल मे सूरज की रश्मियों मे सुबह की बहती मंद मंद पवन मे कहाँ नही दिखायी देती तुम जाडे मे फैलती घुंध मे…

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"#Kavita by Vipul Sharma"

#Kavita by Dr. Parag Jarodia

अटूट तेरी आस हो,अथक तेरे प्रयास हो पाँव हो धरा पे,तेरी सोच में आकाश हो | भीड के पीछे न चल,ये भीड तेरे साथ हो तू शांत से समंदरों में,लहरों का आगाज़ हो | रूके न तू,झके न तू ,न तू कभी निराश हो! चंद्र सा शीतल रहे तू ,सूर्य का प्रकाश हो | मिले हार जीवन में अगर,तो भी न हताश हो गिर के फिर उढेगा तू ,खुद पे जो विश्वास हो | आलस्य…

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"#Kavita by Dr. Parag Jarodia"

#Kavita by Kavi Nadeem Khan

भ्रष्टाचारी,तानाशाही सारी बुराइयाँ मिटालो तुम महान बाद में बनना पहले मेरे देश को बचालो तुम जनता से किया वादे खोखले होते जा रहे है जनता से किये गए सारे वादे निभालो तुम एक ओर समानता का अधिकार है दूसरी ओर आरक्षण की खाई है इक बात इस प्यारे से जनरल वाले की भी मनवालो तुम क्यों दूसरों को सीख देते हो मेरे मुल्क के नेताओं पहले अपने मुल्क से सारी बुराइयाँ निकालो तुम कौमी एकता…

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"#Kavita by Kavi Nadeem Khan"

#Kavita by Atyutam Keshvam

क्या मेरी सामर्थ्य माँ ,रचूँ गजल या गीत . मैं तो तेरी बाँसुरी ,गुँजित तव संगीत .. – हिन्दी भाषा हिन्द की ,कल्याणी सुखधाम . जहाँ उपेक्षित यह रहे,वहाँ विधाता वाम .. – विश्व क्षितज पर देश का ,दिन-दिन बढ़े प्रताप . पर अवलम्बन अनुकरण ,त्याग सकें यदि आप .. – हिन्दी के उत्कर्ष में ,हम सबका उत्कर्ष . अगर बढ़े यह तो बढ़े ,जन-गण-मन का हर्ष .. – निज भाषा संस्कृति कला ,पर धरकर…

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"#Kavita by Atyutam Keshvam"