#Kavita by Kavi Alok Pandey

—- काहें ! भूल गयले रे भाई ! —– काहें भूल गयले रे भाई ! अब आपन नया साल के मनाई ! काहें भूल गयले रे भाई ! जीवन के सौम्य – श्रृंगार के प्रकृति के बसंत-बहार के भारत के भव्य सत्कार के अन्याय के सुंदर प्रतिकार के लोग भूला गयलें अभीये, नित मंगल – गान के गाई… अब आपन नया साल के मनाई… देशवा देखलस घोर निराशा , कतना कट गयले, विकट तमाशा; लाखन…

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"#Kavita by Kavi Alok Pandey"

#Kavita by Umesh Lakhpati Krishna

जिंदगी के सफर यूँही गुनगुनाते रहेगें। भागदौड़ में भी सब से मिलते मिलाते रहेगें। मुश्किलों के सबब से थक ना जाना तुम, कभी ख़ुशी कभी गम यूँही आते रहेगें। जिंदगी की ज़द्दोज़हद में साथ तेरे हम, थाम के हाथ कदम से कदम मिलाते रहेगें। रहे महोब्बत् से दुनियां सारी,बन प्यारी, मुहब्बत के लुटेरे है हम यूँही लूटते लुटाते रहेगें। दूर दुनियां में हमसे जाओगे कितना तुम, हम धड़कन बन याद अपनी दिलाते रहेगें। आँखों में…

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"#Kavita by Umesh Lakhpati Krishna"

#Kavita by Shambhu Nath

ये पंक्ति पढ़ी खूब जायेगी ॥ कविता सन्देश सुनायेगी ॥ आने वाले कल में बच्चो को ॥ इतिहास यही दोहरायेगी  ॥ सच की विजय  हमेशा होती ॥ असत्य नहीं टिक पाता है ॥ कोशिस अपनी पूरी करता है ॥ अंत समय खुद ही जाता है ॥ कठिन परिस्थिति में रह करके ॥ कलियाँ फिर मुस्कायेगी ॥ आने वाले कल में बच्चो को ॥ इतिहास यही दोहरायेगी  ॥ भेद भाव सांप्रदायिक हिंसे को ॥ कुछ अल्प…

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"#Kavita by Shambhu Nath"