#Kavita by Kashan Iqbal Pahlwan

मुहब्बत काँच का सौदा.. मुहब्बत आग का दरिया..   मुहब्बत जून जैसी है.. मुहब्बत बर्फ का गोला..   मुहब्बत रात काली है.. मुहब्बत नीला मौसम है..   मुहब्बत कच्चा आँगन है.. मुहब्बत तितलियों का घर..!!   मगर फिर भी, मुहब्बत काँच का सौदा..!!   किसी नामालूम बस्ती से.. किसी अनजान हस्ती से.. किसी कागज की कश्ती से..   किसी खिड़की के मंजर से.. किसी पत्थर के खंजर से..   किसी धुंधली सी हसरत से.. किसी बेदर्द किस्मत से..??   किसी झूठी तसल्ली से…   मुहब्बत हो ही जाती है….!!! मुहब्बत…

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#Kavita by Kumari Archana

” ओ मेरे प्रियतम प्यारे”   ओ मेरे प्रियतम प्यारे समर्पण है तुझपर अब मैं अर्पण हूँ !   मैं चाहती हूँ कि तुम हर- पल,पल- पल तुम मेरे पास रहो इसलिए तुम फूल बनो जाओ मैं मालिन ! तुम फसाल बन जाओ मैं किसानी ! तुम मालिक बन जाओ मैं दासिन ! तुम घर बन जाओ मैं पहरेदारिन ! तुम भगवान बन जाओ मैं भक्तिन तुम शरीर बन जाओ मैं आत्मा ! कुमारी अर्चना

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#Kavita by Surendra Kumar Singh Chance

कभी मन नही करता क्या?   कभी मन नही करता क्या साथ बैठे कहीं भी भागती हुयी भीड़ के रास्ते में डाल दें बाहें एक दूसरे के गले में आँखे हों आँख में और बातेँ करते रहें भीड़ में खामोश जैसे भीड़ छंटने के बाद की ख़ामोशी और डूब जायें एक दूसरे की आँख में और उत्तर जाएं भीतर और भीतर जहां परमात्मा अपनी रचनाओं की खूबसूरत सी मूर्ति लिए एकटक निहार रहे हों उसे…

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#Gazal by Dipti Gour ‘Deep’

इंसान बन रहे हैं क्यों हैवान की तरह l गुलशन बदल रहे हैं क्यों वीरान की तरह l उल्फत वफा के रिश्ते सभी मतलबी हुए , सब बिक रहे हैं  फलसफे  ईमान की तरह l सबके लहू का रंग एक -सा है दोस्तों, फिर घूमते शहर में क्यों शैतान की तरह l तुम अपनी शख्सियत को रखो खुद संभालकर , बिकने लगी है सियासत सम्मान की तरह l आलम हरेक  सिम्त है बेचारगी का क्यों…

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#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh

भगीरथ   गंगा के साथ अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं, इनमें राजा सगर की कथा और मिथकों के अनुसार ब्रह्मा ने विष्णु के पैर के पसीनों की बूँदों से गंगा की जन्म-कथा, तथा अन्य कथाएँ भी हैं । महाभारत के अनुसार भगीरथ ,अंशुमान के पौत्र तथा दिलीप के पुत्र थे । उन्होंने सौ अश्वमेध यग्य करवाये; उनके महान यग्य में इन्द्र सोमपान कर मदमस्त हो गये थे । भगीरथ ने गंगाघाट के दोनों किनारों…

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#Kavita by Rifat Shaheen

बहुत अच्छे लगे हो तुम मैं ये इक़रार करती हूँ तुम्हारा दिल नही देखा न कुछ परखा,न कुछ जाना मगर अच्छे लगे हो तुम तेरी प्यारी सी सूरत ने मुझे दीवाना कर डाला तुम्हारी उँगलियों के लम्स की चाहत भी है मुझको तुम्हारे लब मुझे चूमें ये हसरत भी ,है अब मुझको मैं ये भी चाहती हूँ तुम मुझे बाँहों में यूँ भर लो के मेरी साँस रुक जाए मेरी पलकें भी झुक जाएँ बहुत…

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#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari

पानी भी नहीं पाते हैं काम करने वाले, अंगूर खा  रहे  हैं  आराम  करने वाले, कुर्सी पे बैठे -बैठे दिनभर हवा बनाते— मेहनतकशों को केवल बदनाम करने वाले।  डॉ. नीरव   काम बदलेगा दाम बदलेगा, मुल्क का इंतजाम बदलेगा, देख लेना तुम अपनी आंखों से राजा बदला गुलाम बदलेगा।  डॉ.नीरव

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#Kavita by Akash Khangar

ताबीज न कुछ कर पाया न दुआ ही रंग लायी जब चली गलतफेहमियो की हवा मेरा घर तबाह कर आयी   कितने सपने संजोये थे कितने मढ़के पिरोये थे एक पल में बिखर गया सब जो वक़्त ने ली अंगड़ाई   खुशबुओं का सौदागर था वो कलमे गुलाब की लगाता था पत्ता पत्ता झड़ गया जब रुत पतझड़ की आयी   आज यकायक ही धड़क गयी धड़कन अचानक ही सिहर उठा मेरा मन ये यूँ…

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#Kavita by Jyoti Mishra

घरौंदा     बचपन में बनाया करते थे हमसब सपनों  का घरौंदा … मिट्टी की खुश्बू से तर भावनाओं से महकता सोंधा -सोंधा…. निश्छल, निर्मल प्यार की अटूट दीवारें सबको  छाया देने वाली छत .. ओसारा…ऑगन अपनेपन से ओत -प्रोत कोना -कोना …. कच्चा …अधपक्का सा पर कितना सादा …सुन्दर सच्चा सा …. दादा -दादी, चाचा -चाची बुआ ..दीदी , भईया सबके लिए होती थी जगह सबके बच्चे  लाड़ले जैसे कृष्ण कन्हैया …. घर  -ऑगन…

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#Kavita by Alok Shrivas

कश्मीर में सेना का अपमान करने वालों की भर्त्सना करती मेरी कविता । ********************     बस यही रह गया है बाकी , घुसें , लातें  खाने  को। शर्म नहीं बचा है तुममे, और क्या रहा दिखाने को।।     जिस सेना ने जाँ पे खेल, खतरों से तुझे बचाया है। उस सेना के जज़्बातों को, तूने  ठेस  पहुँचाया  है ।।     लोकतंत्र ने संविधान की, पहलु में मुँह छिपाई है। धारा तीन सौ…

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#Kavita by Vivek Prajapati ,Kashipur

कश्मीर में कुछ सैनिकों के साथ कुछ देशद्रोहियों द्वारा निंदनीय व्यवहार करने पर विरोध प्रकट करती मेरी ये कविता-   आज कलम कैसे पकड़ूँ जब आँखों में अंगार भरे आज लिखूँ कैसे जब मेरा शब्द शब्द हुंकार भरे।   आज धधकती ज्वाल हृदय में जीना व्यर्थ हुआ जाता केसर की घाटी में क्योंकर नित्य अनर्थ हुआ जाता।   आज वहाँ अपनी सेना के कुछ जवान पर वार हुआ ऐसा लगता है जैसे अब संविधान पर…

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"#Kavita by Vivek Prajapati ,Kashipur"

#Kavita by Ajeet Singh Avdan

संकल्प { बाल-गीत } ~~~~ हम बच्चों ने ठान लिया हम वृक्ष लगाएँगे । अपनी प्यारी धरती पर हरियाली लाएँगे ।।   हरी-भरी रहे वशुन्धरा यह अपना नारा , प्राण-वायु की कमी न हो संकल्प हमारा । जन-जीवन के मूल-भूत आधार बचाएँगे, अपनी प्यारी धरती पर हरियाली लाएँगे ।।   हिन्द-चमन से मुँह मोड़ेगी शीतलता जो, अपने पेड़ों से कह देंगे जल बरसा लो । छाएँगे घनघोर जलद जल बरसाएँगे, अपनी प्यारी धरती पर हरियाली…

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"#Kavita by Ajeet Singh Avdan"

#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

जिन घरो मे साजिशे हुआ करती है मेरे नाम की वहा की लडकिया तारीफ किया करती है मेरे काम की।   हक की लडाई को बगावत का नाम देने वालो देखना एक दिन मेरी आवाज बनेगी अवाम की।   लुटकर गरीबो के घर,छिनकर बेबसो के निवाले मौज करोगे कब तक,पुरेगी दौलत कब तक हराम की।   तुम भी मेरी राह चलोगे मेरी राह मे बारूध रखने वालो जब लुटेगा ,लुटेरा कमाई तुम्हारे मेहनत घाम की।…

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#Gazal by Asif Al Atash

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारों में सब कुछ है गीता क़ुरऑ के पारों में सब कुछ है   ढूंढ रहे हो मेरी बाईक में बम को नेता जी की दस कारों में सब कुछ है   ऊंचे ऊंचे दरबारों में बैठे हो ऐसे वैसे दरबारों में सब कुछ है   देख रहा हूं सारी दुनिया को इनमें लगता है कि बाज़ारों में सब कुछ है   दंगा करवाने के तौर तरीक़े और ग़ौर से देखो अख़बारों में…

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"#Gazal by Asif Al Atash"