#Gazal by Anshu Jain Anshu

नयी सी है ये मेरे ख़्याल की खुश्बू मुझे भायी है पिछले साल की खुश्बू   हवा के साथ उड़ के रोज़ आती है वतन की माटी में है कमाल की खुश्बू   बहुत महफ़ूज़ रखती है वो घर अपना अगर माँ है तो है जमाल की खुश्बू   (महफ़ूज़-सुरक्षित,जमाल-सौन्दर्य)   उम्र भर ख़ाक उड़ती है नहीं जाती फूलों की शोखियों में हाल की खुश्बू   (ख़ाक-मिट्टी,शोखियाँ-चंचलता)   उसे छू के महकती है हथेली भी…

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"#Gazal by Anshu Jain Anshu"

#Kavita by Ishwar Dayal Jaiswal

* जीवन की अनुभूति *   जब मैं सोचता हूँ ! केवल अपने लिए , परिवार के लिए , तब ! हर कर्म करता हूँ , फिर भी नही मिलती मन को तृप्ति , नही मिलता आत्मिक सुख , जीवन की अंतिम बेला तक नही मिलता शारीरिक विश्राम , शेष रह जाती है – आखिरी सांस तक सांसारिक खुशियों की कसक , मृग मारीचिका की तरह । ×××××÷×××××÷×××××÷××××××××÷×××   जब मैं सोचता हूँ ! अपने…

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"#Kavita by Ishwar Dayal Jaiswal"

#Kavita by Dr, Pratibha Prakash

आर्यावर्त सप्त सैन्धव सिंहजीत भारत कहलाया है इसकी पवन माटी को भारत माँ कहके पुकारा है चरण पखारे लहराता सागर, हिमालय ने मुकुट सजाया है पश्छिम में भू स्वर्ण कच्छ की, पूरब में गंग की अंतिम धारा है इसकी पावन माटी………………………………………. शक हूँण और यूनानियों ने इसका गौरव ही गाया हा भले लूटने म्लेच्छ भी आये अंग्रेजों ने भी शीश झुकाया है इसकी पावन माटी ………………………………………. अखण्ड संस्कृति खण्ड सभ्यता अतुल्य श्रंगार सजाया है शस्य…

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"#Kavita by Dr, Pratibha Prakash"

#Kavita by Er. Neeraj Baghel

या तो कश्मीर उन्हें दे दो,या आर पार का काम करो, सेना को दो ज़िम्मेदारी,तुम दिल्ली में आराम करो,   हर हर मोदी घर घर मोदी,यह नारा सिर के पार गया, इक दो कौड़ी का जेहादी,सैनिक को थप्पड़ मार गया,   थप्पड़ खाएं गद्दारों के,हम इतने भी मजबूर नही, हम भारत माँ के सैनिक हैं,कोई बंधुआ मजदूर नहीं,   भारत का आँचल स्वच्छ रहे ,हम दागी भी हो सकते है, दिल्ली गर यूँ ही मौन…

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"#Kavita by Er. Neeraj Baghel"

#Kavita by Rifat Shaheen

  टुटा तारा जीवन मेरा चाँद कहाँ से लाऊँ रे मेरा दामन छोड़ दे राही मैं इक भटकी छांव रे पग में कांटे आँख में पानी न साथी न सपना है जग बैरी है अँधियारा है कोई नही अब अपना है थक जायेंगे चलते चलते कोमल तेरे पांव रे मेरा दामन छोड़ …. आस का मोती टूट गया है आंसू बस है नैनन में एक कली भी पास नही है कांटे बस है दामन में…

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"#Kavita by Rifat Shaheen"

haiku by Jyoti Mishra

* नारी *   अबला नारी अंतहीन लाचारी हाय बेचारी   छटपटाई रोई, गिड़गिड़ाई न सुनवाई     बदला वक्त़ मिला खुला आसमां निकले पंख   भरे उड़ान जागृत  स्वाभिमान है पहचान   छाई मुस्कान मुट्ठी में आसमान पाया जहान …!!   🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥   निकला चांद देखती रही हो नयनाभिराम   फैली चांदनी महकी रातरानी भीगी चाहतें   नदी  किनारे पिया राह निहारे लिए सितारे   मिला साथ लिए हाथों में हाथ गुजारी रात  …

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"haiku by Jyoti Mishra"

#Geet by Rakesh Parihar Ranjha

गीत **** बस छू लेना थोड़ा सा भले ही टूकड़े ना उठाना बिखरा पड़ा हूँ जर्रा जर्रा एक बार देखकर तो जाना बस छू लेना थोड़ा सा…..   नाजुक काँच की थी दिवारें अब उसमें भी पड़ी दरारे ऐसे साथ है दर्द ये सारे भूला कब आई थी बहारे जख्मीं हो जाएगें पैर तुम्हारे यूं दिल को ठोकर ना लगाना बस छू लेना थोड़ा सा…..   दिल में जो साये रहते है रातभर मुझे जगाये…

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"#Geet by Rakesh Parihar Ranjha"

#Muktak by Manish Soni

  सौ-सौ तरह के लोग खुद में भरे है ये दुनिया, रंजो-गम तमाम पैदा करे है ये दुनिया, सबकी अपनी ढपली और सबका अपना राग है… अपनी तो समझ से ही परे है ये दुनिया || ___मनीष

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"#Muktak by Manish Soni"

#Kavita by Dr. Sarla Singh

बात कहें क्या बात हम अपनी, हमारी बात ही क्या है । जमाने के सताऐ हैँ, जमाने की कहें क्या हम? बात ही बात में जज्बातों की कुछ बात  कहते हैं , जमाना है किसी का ना । सभी स्वार्थ के हैं साथी हैं , बेबात कोई  भी न मिला । दोस्त तो ना मिला कोई, दुश्मन ही सरे राह मिले । गैर तो गैर ही थे, अपने भी पराये  निकले । बात जब चल…

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"#Kavita by Dr. Sarla Singh"

#Kavita by Ajeet Singh Avdan

स्मृति-भान ~~ सब को श्रीमन्नारायण जी, श्रीमन्नारायण सबको जी । वर्तमान में स्मृतियों के, विस्मृत नाम न हों अब तो जी ।। नाम-स्मरण ध्येय हेतु यह, सृजित-छंद स्वीकार करो जी । धर्म-सनातन पालन-रक्षण, परम्परा निज वहन करो जी ।।     अत्रिस्मृति औसनस्मृति व, आश्वलायनस्मृति भी पढ़ो जी । आपस्तम्ब आंगिरसस्मृति, कपिल कण्व के दम्भ भरो जी ।। चिन्हित हों कामादि दोष सब, भिन्नाशक्ति विकार हरो जी । मानव जीवन में मानवता, रिक्त-पूर्ति अब पूर्ण…

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"#Kavita by Ajeet Singh Avdan"

#Kavita by Mohit Jagetiya

उन कुत्तों का भी ईलाज कर दो मांगे  कश्मीर तो बाज कर दो । सेना  पर  जो  भी  पत्थर मारे सेना  की  गोली  से  अब  हारे। गद्दारों का तुम वो काम कर दो मिटा कर उनको अब शाम कर दो। बहुत हो चुकी उनकी नादानी बहुत बहक चूका उनका पानी  । ना  बने  उनकी  कोई  कहानी मिट जाए उनकी आज जवानी। मिटाने  से  ही  ईलाज  होगा नही  तो  ऐसा ही  आज होगा। नही सेना का…

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"#Kavita by Mohit Jagetiya"

#Kavita by Sudhanshu Dubey

दिल के सुनी और निकल पड़ा लोग कहते है तू कितना बेबस निकला सायद मैं भी कितना पागल निकला लोग कहते रहे मैं सुनता रहा आँसू निकलते रहे,काजल छलकता रहा फिर सोच आयी ऐ मुसाफिर बलवान है विध्यता से परे साहस बड़ा अभिलाष से परे खुद को अडिग बना अगर बन सके तो मंजील बन, जंजीर तोड़ राह निकाल और फिर मिले मंजिल तो सोच अपने मन मोहित मन-अंतर-मनघात को बाँड से परे धनुष के…

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"#Kavita by Sudhanshu Dubey"

#Kavita by Ishq Sharma

मजदूर या मजबूर °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° वो रोज कमाता रोज खाता शान ओ शौकत नही दिखाता अपना हो या कोई पराया अपनी गरीबी नही बताता बंज़र कितनी भी हो धरा लहु सींच उपजाऊ बनाता मंशा अनेक है उसके भी पीड़ा अपनी नही दिखाता भेष बदल कर आते मौसम हर मौसम कुछ’न’कुछ उगाता मजदूरी , मजबूरी न मानो ये न होता अन्न कहाँ से आता दिहाड़ी मजबूरी है उनकी कौन सेठ परमानेंट बिठाता शहरों में गिध्द बहुत है…

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"#Kavita by Ishq Sharma"

#Gazal by Asha Shailli

सहर का ख्वाब टूटा देखने को >> >> चले आए तमाशा देखने को >> >> >> >> उन्हेँ खुद पर गुरूरे जुस्तजू था >> >> जमाना भी लगा था देखने को >> >> >> >> सितारे किसके टूटे आसमां से >> >> शहर उमड़ा पड़ा था देखने को >> >> >> >> हमारे दर्द की हद है कहाँ तक >> >> दरीचा खुल गया था देखने को >> >> >> >> अब आगे हो कोई…

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"#Gazal by Asha Shailli"

#Gazal By Amrendra Lavnya ‘Anmol’

तमाम बाजार की सोई किस्मत उठने लगी गरीब घर से चला सारी कीमत उठने लगी । दिये जलाए कि घर हो रौशन पर अफसोस ये चिराग जलते सितारों में दहशत उठने लगी पनाह मिलता नही था दर दर था पर आज से उजार छप्पर हुआ छत तो इज्जत उठने लगी लहू बहाकर भी नही है इक छत मजदूर को चुरा चुरा कर रखा उसकी दौलत उठने लगी इधर तमाशा उधर तन्हाई है कुछ साजिश बवाल…

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#Gazal by Abhishek Bharti ‘Chandan’

जाम आँखों से पिलाया भी नहीं, वो न आयी औ बुलाया भी नहीं। हो गयी बातें…..इशारों में मगर, चाँद सा मुखड़ा दिखाया भी नहीं। सामना जब भी हुआ तेरा मे’रा, कुछ न बोली औ छुपाया भी नहीं। रात भर यादें रुलाती ही रही, और वो बोली सताया ही नहीं। जानता हूँ मैं खफा क्यों है खुदा, माथ सजदे में झुकाया ही नहीं। ख्वाब में जा जा सितारों से मिले, जेब में बाकी किराया भी नहीं।…

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"#Gazal by Abhishek Bharti ‘Chandan’"

#Kavita by BrajMohan Swami ‘Bairagi’

मानवता की मौत आलू खाकर मर सकता है एक आदमी/ और बिना जहर पीये मर सकती है एक औरत। और बच्चों की मौत का मैं कोई तरीका नही बता पाता हूँ। (यह आसान है) भावी आत्महत्या पीड़ितों के लिए/ इन्हें हासिल करना काफी मुश्किल है। हम घरों के अंदर तक जायेंगे खाली पड़े खण्डहरों तक पहुंचेगी हमारी कविता/आवाज़ क्योंकि ज्यादातर आत्महत्याएं शाम को या रात में होती हैं। हाँ, बिलकुल मेरी बाँहों में परमाणु नही…

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"#Kavita by BrajMohan Swami ‘Bairagi’"

#Kavita by vinay bharat sharma

‘‘कॉलेज का एक लड़का” एक कॉलेज का लड़का वो रोजाना सपने सँजाता है। एक झलक पाने के लिए रोजाना कॉलेज आता है। बालों को वह सॅवारता आईने में वह निहारता। जूते पॉलिश चमकाता सा इत्र से शरीर महकाता है। जीन्‍स शर्ट टी शर्ट कभी कभी सादा वस्‍त्र उठाता है। रोज-रोज सज सँवर वह पढ़ने कॉलेज आ जाता है। कभी कक्षा से बाहर आता कभी पानी पीने जाता है। कभी ताँक झॉककर देखता कभी बहाना कोई…

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"#Kavita by vinay bharat sharma"

0221 – Dinesh Pratap Singh Chauhan

Kavita : “राजनीति की कविता” धंधे और व्यापार हो रहे ,राजनीति में अब तो सौ के कई हजार हो रहे,राजनीति में अब तो जनता के ही बीच के प्रतिनिधि होते थे पहले तो पेश कई अवतार हो रहे,राजनीति में अब तो राज बदल लो चेहरे बदलो बदले मगर न किस्मत अलीबाबा के यार हो रहे,राजनीति में अब तो पर उपदेश कुशल बहुतेरे ब्रह्म सूत्र सत्ता का उपदेशक भरमार हो रहे,राजनीति में अब तो पढ़ लिखकर…

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"0221 – Dinesh Pratap Singh Chauhan"