#Geet by Munish Bhatia Ghayal

खुश्क नजरों के पैमाने हो गए आज हर घर में ही थाने हो गए कहती बीवी मैं ही थानेदार हुं आज गुंडों की मैं ही सरदार हुं हम ही बस हम ही निशाने हो गए आज हर घर….. सास कहती है बड़ा कमबख्त तुं लड़ता बेटी से मेरी हर-वक्त तुं पल-पल मुश्किल में बिताने हो गए आज हर घर…… साले की धमकी मिले हरदम हमें आंकता है क्या तुं साले कम हमें आंख दो होते…

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"#Geet by Munish Bhatia Ghayal"

#Gazal by Dipti Gour ‘Deep’

रिश्ता दिल से बनाए रखिएगा l राजे उल्फत छुपाए रखिएगा  l तुमको ठोकर जहां ने दी लेकिन, आस की लौ जलाए रखिएगा उसने दी है किताब गजलों की, घर की रौनक बनाए रखिएगा l जब भी देखोगे नजर आऊंगी , दिल में शीशा लगाए रखिएगा l घर की बेटी खुदा की नैमत है, लाज इसकी बचाए रखिएगा l जाने किस वक्त कोई आ जाए, अपनी महफिल सजाए रखिएगा l उलझनें ज़िन्दगी में काफी हैं ,…

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"#Gazal by Dipti Gour ‘Deep’"

#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh

भूत   सृष्टि में कोई भी स्थान ऐसा नहीं है, जहाँ आत्मतत्व न हो , आत्मा का नाश नहीं होता है ; इसलिए इसे अविनाशी कहा गया है । जीवात्मा, इस देह में आत्मा का स्वरूप होने के कारण सदा नित्य है । जीवात्मा के देह मरते हैं ; आत्मा न किसी को मारता है, न ही मरता है । आत्मा अक्रिय होने के कारण किसी को नहीं मार सकता, जीवात्मा के शरीर उसके वस्त्र…

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"#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh"

#Gazal by Vikash Raj

  फिर नया कोई ख्वाब क्यों संजो नहीं पाता हूँ मैं, तुझसा तेरी याद को क्यों खो नहीं पाता हूँ मैं ।   यार ने अपना बनाकर इस कदर छोड़ा मुझे, चाह कर भी अब किसी का हो नहीं पाता हूँ मैं ।   ना किसी से रश्क है ना इश्क है मुझको मियाँ, फिर बताओ रात भर क्यों सो नहीं पाता हूँ मैं ।   जब भी जाता हूँ सनम गलियों में अपने यार…

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"#Gazal by Vikash Raj"

#Khani by Sushil M Vyas

ऊँची उड़ान गिद्धों का एक झुण्ड खाने की तलाश में भटक रहा था।उड़ते – उड़ते वे एक टापू पे पहुँच गए। वो जगह उनके लिए स्वर्ग के समान थी। हर तरफ खाने के लिए मेंढक, मछलियाँ और समुद्री जीव मौजूद थे और इससे भी बड़ी बात ये थी कि वहां इन गिद्धों का शिकार करने वाला कोई जंगली जानवर नहीं था और वे बिना किसी भय के वहां रह सकते थे। युवा गिद्ध  कुछ ज्यादा…

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"#Khani by Sushil M Vyas"

#Gazal by Aasee Yusufpuri

भोजपुरी ग़ज़ल   दिल में हलचल मचा के गइल रूप  अइसन  देखा  के गइल   मनवा  बेचैन   बा  का  करीं जब से  उ मुस्किया के गइल   होश में    ई रहेला      न मन जाने का, उ  खिया के गइल   रात सपना में       आइल रहे सेज फूलवा    सजा के गइल   दिल से निकसी न आसी कबो मन में अइसन  समा के गइल —————— सरफ़राज़ अहमद आसी

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"#Gazal by Aasee Yusufpuri"

#Kavita by Uday Shankar Chaudhary

परशुराम तुम राम कृष्ण की मातृभूमि हो ~~ परशुराम तुम राम कृष्ण की मातृभूमि हो वीर धीर निर्भीक सुतों की मातृभूमि हो — तुम अखिल विश्व की गुरु महान तुम दिए विश्व को अमर ज्ञान हो स्वर्ग तुम्हीं इस धरती पर जीवंत रुप में परम धाम — देव मनुज ऋषि मुनियों की मातृभूमि हो परशुराम राम कृष्ण की मातृभूमि हो — तुम हो वेदों की ऋचा मधुर तुझमें गीता का अमर सुर मानवता की अमर…

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"#Kavita by Uday Shankar Chaudhary"

#Kavita by Jyoti Mishra.

* इल्जाम *     तोड़ा -मरोड़ा सत्य  को नहीं छोड़ा हृदय तोड़ा   हो असहाय खून के ऑसू बहे नहीं उपाय   दर्द निचोड़ा कलम में डुबोया अक्षर जोड़ा   लिखी कविता समेटे अहसास बही सरिता   न हो दोबारा किसी पर विश्वास टूटे जो आश   मीठा जहऱ न कर  एतबार ढाए कहर   पथ दुर्गम कंटीले चाहे रास्ते अकेला चल …..!! ज्योति मिश्रा🔥  

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"#Kavita by Jyoti Mishra."

#Kavita by Rakesh Parihar Ranjha

कहाँ खो गया वन्देमातरम् ============ कोई लिखता शहिदों को कोई लिखे गाथा वीर की कोई ना लिखे कहानी भारत माँ के पीर की क्यूं ऐसा हो गया धरम कहाँ खो गया वन्देमातरम् . कहने को तो हो गया अपना देश आजाद जहाँ दबा दी जाती हैं बेटियों की आवाज़ क्यूं भारत में वीरों हो रहा ऐसा करम कहाँ खो गया वन्देमातरम् . मर रहे है युवा बढ़ रही है बेरोजगारी पढे लिखे घर बैठे फैल…

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"#Kavita by Rakesh Parihar Ranjha"

#Kavita by Ishq Sharma

उड़ना  हर  इंसान  चाहता  है। परिंदे  की  पहचान चाहता है। अठखेलियों से हैरान है तौभी। ज़िन्दगी  में  शान  चाहता  है। गम के  अलाव बुझा न सका। ख़ुशी के  पकवान  चाहता है। अपने  अपनों से बहुत मिला। शक़्स कोई अंजान चाहता है। मुसीबतों से वाकिफ़ सदा वो। होना न  हालाकान चाहता है। अस्मत रूह की बचा बचाके। जीना नही भगवान चाहता है। लगे दर्द  अपना सबको बड़ा। इंसानों  में  इंसान  चाहता है। पागलों  तरह  कोई  प्रेम…

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"#Kavita by Ishq Sharma"

Muktak by Rakesh Yadav Raj

कुछ दोहे ~   मात रेणुका गर्भ में, पलते पालन हार। परशुराम के नाम से, लिये षष्ट अवतार।। ( 1 )   जब जब धरती पर बढ़े, अधर्म अत्याचार । तब तब धरती पे लिये,जगपालक अवतार।।( 2 )   जमदग्नि ऋषि के यहाँ, परशुराम अवतार। धन्य धन्य माँ रेणुका, आये तारन हार।। ( 3 )   एक हाथ फरसा लिये, दूजे हाथहि वेद। धर्म बढ़ाये जग सदा, करते नहि वे भेद।। (४ )   अन्याय…

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"Muktak by Rakesh Yadav Raj"

#Kavita by Dr.Abnish Singh Chauhan

गली की धूल … समय की धार ही तो है किया जिसने विखंडित घर   न भर पाती हमारे प्यार की गगरी पिता हैं गाँव तो हम हो गए शहरी गरीबी में जुड़े थे सब तरक्की ने किया बेघर   खुशी थी तब गली की धूल होने में उमर खपती यहाँ अनुकूल होने में मुखौटों पर हँसी चिपकी कि सुविधा संग मिलता डर   पिता की जिन्दगी थी कार्यशाला-सी जहाँ निर्माण में थे स्वप्न, श्रम,…

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"#Kavita by Dr.Abnish Singh Chauhan"

#Kavita by Mukesh Bohara Aman

श्रम की देवी ** करीब से देखा है मैंने , वो पत्थर-पहाड़ों को , अनवरत तोड़ रही है ।   बस ! जीने की आस मे ही, पसीने की बूंद-बूंद से , बिखरा जीवन जोड़ रही है ।।   मुन्ना कुदरत के ‘झूले’ में , मुन्नी थोर की छांव में , बेखबर हो खेल रही है ।   पर मां की ममता का मोह , एक नजर बच्चों पर है तो , दूसरी पत्थर झेल…

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"#Kavita by Mukesh Bohara Aman"

#Kavita by S B S Yadvesh

बिष नाग निकले हैं  ? ***   बसंती ठप बयारें हैं , तपिस पछुआ की वारें हैं बचे रहना , बिलों से बिलबिला बिष नाग निकले है   मैं पोषक था , पल रहे थे मेरे अस्तीन के अंदर खबर क्या थी  ? फनफना कर करेंगे वार ही मुझ पर बचे रहना ,  तुम्हें डसने को काले नाग निकले हैं बचे रहना ,बिलों से बिलबिला विष नाग निकले हैं   बब्बर शेरों ,को डसने की…

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"#Kavita by S B S Yadvesh"

#Kavita by Saurabh Dubey Sahil

गर जो आप गुलाब होते   मदमस्त भोंरे हम भी होते, गर जो आप गुलाब होते ।   मेरे लिए हर दिन इतवार होते, गर जो आप हमारे पास होते ।   रोज सुबह घण्टों निहारते तुम्हे, गर जो आप अखबार होते ।   हम तो अनपढ़ ही रह जाते, गर जो आप किताब होते ।   उलझने कभी सुलझती ही ना, गर जो आप हिसाब होते ।   सोचो जुबां पर कितने सबाल होते,…

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"#Kavita by Saurabh Dubey Sahil"

#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

मक्का चरी और खीरे की अभी बुआई नहीं हुई, सूख रही है फसल ईख की अभी सिंचाई नहीं हुई, जो कमजोर हैं उन कृषकों का बोझ पड़ा है खेतों में– मई चल रहा है गेहूं की अभी मड़ाई नहीं हुई।

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"#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav"