#Muktak by Lal Bihari Lal, Lal Kala Manch

मजदूरदिवस पर लाल बिहारी लाल के  दोहे  :- दुनिया के हर कामको,देते सदा अंजाम। चाहे कोई कुछ कहे,लेते नहीं विराम ।1। इनके ही सम्मानकी बाते करते लोग। इनके नहीं नसीबमें,जीवन को ले भोग।2। कहीं तोड़े पत्थरतो, कही तोड़ते हार। लाल तरस नहीखाये,अजब गजब ब्यवहार।3) पल-पल करते चाकरी,रोटी खातिर रोज। लाल जाने कब अइहें,जीवन में सुख भोग।4। मजदूरों के जोग से दुनियाबने महान। चाहे बात विनाश कीया हो फिर निर्माण।5।

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"#Muktak by Lal Bihari Lal, Lal Kala Manch"

#Kavita by vinay bharat sharma

वो कोई और हैं वो कोई और हैं जो लिखता हैं कविता कहानी और व्यंग्य मैं हूँ साधारण वो हैं विशिष्ट कभी कभी हावी होता हैं वह जबरन मुझ पर और घिसता है स्याही लीपता हैं कोरे कागज फिर निर्मित होता हैं नया साहित्य जी हाँ वह मैं नही जिसे देखते हैं आप अखवारों में पत्रिकाओं में या किसी मंच पर बोलते हुए वह मेरे अन्दर का इन्सा है कोई दूसरा इंसा उसके जागते ही…

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"#Kavita by vinay bharat sharma"

Gazal by Asha Shailli

खुशबुए-गुल की तरह मैं भी बिखरकर देखूँ ख़्वाब में  साथ तेरे आज सफ़र कर देखूँ ये हवाएँ मुझे ले जाएँ जिधर भी चाहें सामने मैं कोई  पुरनूर-सा मंज़र देखूँ एक मुद्दत यूँ भटकना था नसतबों में मेरे दिल में हसरत थी, कभी अपना भी मैं घर देखूँ सर्दियाँ ज़ोर पे हैं, काम बहुत बाकी है रात भी सर पे खड़ी अब तो मैं बिस्तर देखूँ उसने हरदम ही तराशा है मिरी ग़ज़लों को क्यों न…

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"Gazal by Asha Shailli"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

इश्क़ से हमने तो यारो, बंदगी कर ली ! यूं ही तबाह बेकार में, ज़िन्दगी कर ली ! हमें तो उजाले दौड़ते हैं काटने को अब, हमने तो चरागों की, गुल रोशनी कर ली ! अपनों की मोहब्बत ने धोखा दिया यारो, इसलिए गैरों से हमने, आशिक़ी कर ली ! रखा है क्या हसीनों की महफ़िलों में “मिश्र’ छोड़ कर सब को, तन्हा ज़िन्दगी कर ली !

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"