#Kavita by Utkrsh Anand

यह केशरिया रंग है शौर्य, नर में पौरूष की ज्वाला है। भगत सिंह, अशफाक,सुभाष ने अमर हो इसे पाला है। है श्वेत रंग यह शांति दूत है रूप समता का खींचा गांधी तिलक गोखले ने अपने लहू से इसको सिंचा। यह हरियाली है हरा रंग लेकर बहती सब एक संग यह संपन्नता का है प्रतीक खेतों की मिट्टी की उमंग। यह चक्र प्रगति के पथ का संदेश सदा ही सुनाएगा जबतक अस्तित्व हम बेटों का…

Share This
"#Kavita by Utkrsh Anand"

#Kavita by Kavi Nadeem Khan

जिसकी है हिन्द धड़कन,हिन्द पर वो कुर्बान हो जाए पूरे इन सैनिकों के दिल के सारे अरमान हो जाए नक्सलियों,आतंकियों को अब और मजा चखाने दो नहीं चाहते ये कि चमन हिन्द का वीरान हो जाए हिन्द के हालातों पर चुप्पी से तो अच्छा है मोदीजी हिन्द की खातिर सैनिकों के हक़ में एक ही बयान हो जाए एक एक करके हिन्द के वीरों की छाती छलनी हो जाती है नहीं चाहते धन-दौलत बस इनका…

Share This
"#Kavita by Kavi Nadeem Khan"

#Kavita by vinay bharat sharma

पिताजी – कभी वो मेरे पास आते हाल पूंछते गले लगाते कभी कभी अतिश्योक्ति कर मेरा जग को नाम बताते मैं पहले तो डरने लगता सोचने लगता कभी कभी जब मैं गिर पड़ता दौड़ दौड़ कर फिर वे आते मुझे उठाते गले लगाते हाथ से अपने मेरे पैरों पर दवा लगाकर मुझे सुलाते कभी कभी जब जल्दी होती मेरे जूते पोलिस करते वस्त्र प्रेस कर मुझे सजाते कभी कभी जो मैं चिल्लाता माँ को फिर…

Share This
"#Kavita by vinay bharat sharma"

#Gazal by Dr.vivek saxena

दर्दे दिल अपनों से बाँटें पर अपनों को कैसे छांटें रही स्वार्थी नजर सदा ही, कैसे खुलतीं मन की गांठें जो आदर्श बने थे अपने वे दूजों के तलवे चाटें महंगाई की चली हवा तो खड़ी हुई हैं सबकी खाटें रिश्तों के जो बीच बनी आओ ऐसी खाई पाटें डॉ विवेक सक्सेना

Share This
"#Gazal by Dr.vivek saxena"

0222 – Asha Shailly

Gazal : सहर का ख्वाब टूटा देखने को चले आए तमाशा देखने को उन्हेँ खुद पर गुरूरे जुस्तजू था जमाना भी लगा था देखने को सितारे किसके टूटे आसमां से शहर उमड़ा पड़ा था देखने को हमारे दर्द की हद है कहाँ तक दरीचा खुल गया था देखने को अब आगे हो कोई आहो-फुगां क्यों खड़ा सैय्याद चेहरा देखने को छुपी आँखों में कितनी तिश्नगी थी न पैमाना कोई था देखने को कलम की नोक…

Share This
"0222 – Asha Shailly"

#Kavita by Rakesh Yadav Raj

कृपाण घनाक्षरी   रहता घर से दूर, होता वह मजबूर, थक कर चकनाचूर, करे श्रम मजदूर।   सदा रहे परेशान, फिर भी कर्तव्य जान, करता कर्म महान, करे श्रम मजदूर।।   वेबश है परिवार, मजबूरी से लाचार, छोड़े वह घर बार, करे श्रम मजदूर।   रहती काम की आस, आलस का नही दास, करता क्रोध का नाश, करे श्रम मजदूर।।   ~ राकेश यादव “राज”  

Share This
"#Kavita by Rakesh Yadav Raj"

#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

हमेशा सर झुकाने से कभी इज्जत नहीं मिलती, किसी को भीख में नीरव यहां किस्मत नहीं मिलती, मदद तुम क्या करोगे वास्तव में हम गरीबों की– तुम्हें अपने ही घर परिवार से फुर्सत नहीं मिलती !

Share This
"#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav"

#Muktak by Harprasad Pushpak

क्रोध कभी अच्छा नही हर लेता है चेन । काम बिगाड़ेगा तेरा विचलित हो दिन रैन ।।   भाषा ऐसी बोलिय जोे मुख से बरसे फूल ।ः भाव विहृल सब को करे हो सबके अनुकूल ।।   अहंकार अच्छा नही मैं घमंड का दास । अंधकार से कर रहा क्यों प्रकाश की आस? ।।   व्यर्थ अर्थ की खोज में जीवन दिया गंवाये । राम नाम जाना नही किस विधि मुक्ति पाये ।।   अनुगामी…

Share This
"#Muktak by Harprasad Pushpak"

#Kavita by Vivek Prajapati,Kashipur

शहीदों के पार्थिव शरीर के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार से क्षुब्ध होकर लिखी एक कविता-   पूछता हूँ आज एक मानव सशक्त से पूछता हूँ आज मैं तो एक देशभक्त से।   पूछता हूँ आज मात भारती की शान से पूछता हूँ आज जन जन के प्रधान से।   आपने कहा था देश को नया बनाएंगे आपने कहा था वक्ष गर्व से फुलायेंगे।   आपने कहा था शत्रु डर से मरेंगे जी आपने कहा था अब…

Share This
"#Kavita by Vivek Prajapati,Kashipur"

#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

अब और समझौता होता नहीं इंतजार भी होता नहीं मन की बाते छोड़ दो करना पड़ेगा ऐलान जंग सब्र हमसे अब होता नहीं नमी रहती है आँखों में शहीद का परिवार चैन से सोता नहीं नारे बाजी भाषण बाजी से कुछ होता नहीं उठा लेने दो कलम भी और बन्दुक भी ऐसा नहीं कि दिल हमारा रोता नहीं –किशोर छिपेश्वर”सागर” बालाघाट

Share This
"#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar"

#Gazal by Vikash Raj

कहूँ कैसे कि मेरा यार बावफा होगा , कोई न जान सका है कि आगे क्या होगा ।   सभी के पैर के नीचे था जो कभी लोगों , वही है राह का पत्थर जो अब खुदा होगा ।   मेरी तरह हीं जमाने से प्यार करता है , वो मेरा यार है, मुझसे कहाँ जुदा होगा ।   मुझे खबर है मेरी जान हाले दिल मेरा, जरूर तुमसे हवाओं ने हीं कहा होगा ।…

Share This
"#Gazal by Vikash Raj"

#Gazal by Kavita Singh Vafa

ग़म मेरे जीस्त की बानगी बन गई ! उसका ग़म ही मेरी बंदगी बन गई !!   दफ्अतन ही सही गुफ़्तगू तो हुई ! ये मुलाक़ात ही ज़िंदगी बन गई !!   आरज़ू ही रही हाले-दिल हम कहें ! अजनबी चाह तो तिश्नगी बन गई !!   माह ढलता रहा शब पिघलती रही ! वस्ल की रात अब तीरगी बन गई !!   बेमुरव्वत जहां बेरहम ये बशर ! अब ‘वफ़ा ‘ही यहाँ दिल्लगी बन…

Share This
"#Gazal by Kavita Singh Vafa"

#Kavita by Prerna Sendre

“माँ”   निश्छल, निष्पाप, प्यार से बंधी है, मेरी माँ रिश्तों से नही ,दिल से बनी है ।   गलतियां वो हमारी हमें ऐसे बताती है, जहा दिलो में हमारे अपने प्यार को बढाती है।   हर बंधन ,हर रिश्ता उसे एक सा लगता है, दुश्मन भी अपना उसे दोस्त सा लगता है।   अथाह सागर है प्यार का उसके पास , हर वो शख्स प्यार पता है उसके पास ।   पर कोई उन्हें…

Share This
"#Kavita by Prerna Sendre"

#Kavita by Rifat Shaheen

मैंने पूछा के प्यार है मुझसे हँस के बोला के हाँ है मेरी जां मैंने पूछा के कितना है बोलो बोला इतना के सामने तुम हो कोई देखे न तेरे चेहरे को कोई तोड़े न मेरे पहरे को कुछ लिखो तो,मेरा नाम लिखो और पढ़ो तो मेरा पयाम पढ़ो सो जो जाओ तो ख्वाब में मैं हूँ आँखे खोलो तो बात में मैं हूँ तेरे सपने हो मेरी मुठ्ठी में ख्वाहिशों का हिसाब मैं रक्खूं…

Share This
"#Kavita by Rifat Shaheen"

#Kavita by Surendra Kumar Singh Chance

गीत * आंधी हो, दिया रौशनी हो पिया।   भागती देख नदिया किनारे रुके रात की शोखियों पर सितारे हंसे सागर हो जिया आंधी हो दिया।   छू लिया जिस्म को रौशनी हो गयी आँख में ही नयी बस्तियां बस गयी घागर हो लिया आंधी हो दिया रौशनी हो पिया।   ये हवा भी तुम्हारी अदा हो गयी नाचते नाचते ही खुदा हो गयी गागर हो लिया आंधी हो दिया रौशनी हो पिया।  सुरेन्द्र कुमार…

Share This
"#Kavita by Surendra Kumar Singh Chance"

#Kavita by Jyoti Mishra

अखबाऱ     सुबह की पहली जरूरत अखबार …. सिमटी होती हैं जिसमें दुनियां भर की खबरे हर तरह की जानकारी का होता सार …   कितने मरे, कितने घायल लूट, हत्या, अपहरण , चोरी  और व्याभिचार …   राजनीति की उठा पटक चुनाव में किसकी कितनी  जीत या हार …   सरकारी योजनाएं ..लोक प्रशासन कितनी  अच्छी -बुरी सरकार … कैसा होगा आज का दिन सर्दी -गर्मी, मौसम की बहार …   तापमान बतायें…

Share This
"#Kavita by Jyoti Mishra"

#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

संघर्ष करते रहे बुराई से लडते रहे परिस्थितियां खिलाफ थी फिर भी आगे बडते रहे। बहुजनो के हित मे बहुजनो को जुटाने चमका एक सूर्य अंधकार मिटाने। आप ही के करमो से सुधरा हमारा जीवन है हे संविधान निर्माता आपके चरणो मे वंदन है। संजय अश्क बालाघाटी 9753633830

Share This
"#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati"