#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

एक मुसाफिर हूँ यारो, कोई तो साथ दे दो ! थोड़ी सी देर को, मोहब्बत की छांव दे दो ! अब थक चूका हूँ मैं इस लंबे सफर से यारो, मुश्किल है आगे बढ़ना, ज़रा सा हाथ दे दो ! बड़ी ज़िल्लतों से पहुंचा हूँ मैं यहां तलक भी, बस कुछ वक़्त ठहरूंगा, ज़रा सी ठाँव दे दो ! बड़ी ही बेरहम हैं ज़िन्दगी की ये राहें “मिश्र”, आँखों में नींद है, कोई प्यारा से…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"