#Kahani by Sushil M Vyas

ख़ौफ़… जैसे घड़ी ने 5 बजाए की विनीत की नजर घड़ी पर पड़ी..उसके चेहरे पर ख़ौफ़ का साया तैरने लगा…क्योंकि अब ऑफिस से घर जाने का समय हो गया था। विनीत घर नही जाना चाहता था क्योंकि उसे डर था की उसके साथ उस घर में फिर वही घटित होगा जो पिछले तीन दिन से हो रहा था। पिछले तीन दिनों की उन घटनाओं को याद कर के विनीत के शरीर में एक सिहरन सी…

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#Geet by Aasee Yusufpuri

विरह गीत   मिलन ऋतु आइल मन गदराइल बरखा के फुटेला झाग, अंचरा में लागे न दाग़ — रिम झिम बरसेला सगरो सवनवां एही सवनवां में पिया के अवनवां बइठल अटरिया पे काग अंचरा में लागे न दाग़…   अगहन बीतल आइल पूस के महीनवां एही महीनवां ह पिया से मिलनवां डंसी अब न बिरहा के नाग अंचरा में लागे न दाग़….   फगुवा क चढ़ते ही लोग घर आइल गउवां में घरे घरे चइतो…

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#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

जमाने से जिरह करते बहुत दिन हो गए अब तो, तुम्हारी याद में लिखते बहुत दिन हो गए अब तो, कभी तो दिल से आखिर गम हमारा पूँछ लो नीरव– तुम अपने हो यही कहते बहुत दिन हो गए अब तो!

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#Kavita by Ishq Sharma

एकपैग़ाममाँकेनाम   सीने से लगा लेती है, आँचल में छुपा लेती है, पुचकारती बे’वक़्त मुझे, दुनिया मुझमें बसा लेती है, अधिकार है औरों से पहले, मुझमें उसके सपने सुनहले, ख़ुद में मुझे यूँ पनाह देती है, दुनिया मुझमें बसा लेती है, मैं  बेख़बर  कैसे  हो  जाऊ, औरों के दर क्यू ठोकरें खाऊ, मेरे दर्द को अपना बना लेती है, माँ दुनिया मुझमें बसा लेती है, औरों  में  उपरोक्त  बात नही है, किसी  की  ऐसी  जात …

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#Gazal by Rifat Shaheen

उनके लिये जो मुंहासों की वजह से परेशान है *********** चढ़ता शबाब और जवानी के निशां हैं नाहक़ आप कील मुँहासों से ख़फ़ा हैं देता है खुदा जिसको भी भरपूर जवानी उस खुशनसीब को ही मिली है ये निशानी गालों पे जब ये निकले हसीनों ये समझ लो बचपन से कह रही है जवानी के खिसक लो अब अ गया शबाब मुँहासों की शक्ल में सौगात इनको समझो और लाओ अक़्ल में खुद पर करो…

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#Kavita by M.D.Juber

क़ब्र की मिट्टी   मौत का मातम तो छाई हैं, इस कदर की ख़ुशी को पनाह ना मिल पाए आस-पास तो ढूंढते हैं हम दर्द मेरे कही क़ब्र की मिट्टी ना उठा ले जाये     उनकी आँखों की नमी ने भी बताया हैं गम का मातम उनपर भी छाया है दीदार तो ना हो सका उनका आख़िर दीदार पे तो,कब्र पे ही आया हैं   गम की दरिया मे डूब के आँसुओ के धार…

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#Kahani by Sushma Rastogi

एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था। जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता। पेड के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता। उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।   बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया। कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।   आम…

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#Shayari by Akash Khangar

हासिल इश्क़ है उसका हासिल रूह हुई उसकी बस मोहब्बत का दायरा यही तो है   न जिस्म की चाहत थी न हासिल करने की आरजू मोहब्बत का कायदा यही तो है   मेरे न होने की कमी सताती है उसको उसकी रूह में उतरा हूँ मैं वो हो बेखबर पर खबर सभी को है ये मेरी गजलो में जिक्र उसी का ही तो है   सुर्ख आँखे भी करती है मुझसे सवाल आँखों में…

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#Gazal by Sanjay Ashk Balaghati

जो बात यहां मजहब की करते है वो कब बात भला रब की करते है। नेता सच भी बोलता है जनता से लोग भी ना बात गजब की करते है। अपनापन,प्यार सब झूठ है यहां पर वो उम्मीद बस मतलब की करते है। समाज के रावण भी खूब है “अश्क” रामजी की अदाएं गजब की करते है।

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#Gazal by ShANTI SWAROOP MISHRA

इज़्ज़त बचानी है, तो ईमान बचा के रखिये ! अपने हसीन सपनों को, यूँही सजा के रखिये ! गर अंधेरों से डर लगता है तो मुस्तैद हो कर, आँधियों से अपने चरागों को, बचा के रखिये ! किस्मत के सहारे बैठ कर कुछ नहीं मिलता, यारो हाथ पैरों में, ज़रा जुम्बिश बना के रखिये ! दर्द तो होता है दुनिया के दिए ज़ख्मों में यारा, पर दिल के तूफां पे ज़रा कब्ज़ा बना के रखिये…

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"#Gazal by ShANTI SWAROOP MISHRA"