#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

मैंने तो समझा कि, दर्द बंटाने आया था ! लगा कि दुःख में, साथ निभाने आया था ! दिखाए थे ज़ख्म सारे मरहम की आस में, पर वो बेवफा तो, नमक लगाने आया था ! चढ़ा दिया हमको बिना पतवार कश्ती पर, और हम समझे कि, पार लगाने आया था ! पानी से भरी गागर फोड़ दी उसने यूं ही, हम समझ बैठे कि, प्यास बुझाने आया था ! न समझ पाए हम इस दुनिया…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"