#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

बहुत समहल कर चले रास्ते भर , किनारे पर आकर के फिसल गये , दिन में सूरज की तपन से तो बच गये , पर रात में शबनम की बूँदों से जल गये ।   ~ सौरभ दुबे  ” साहिल”

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#Kavita by Dr. Yasmeen Khan

क़लम पर सिहर उठे सवाल’   पीर- ए मुगां ख़ुद को समझने की लड़खड़ाती तहरीर कहो लफ़्ज़ों में छुपी बेवजह नफ़रत की शमशीर कहो,   उलझने बढ़ाने को बेताब तेरी निष्ठुरता, ख़ुद की नज़र में तू है बड़ा ही सुर्ख़रु शहंशाह अपने  प्रेम की पीर कहो , रूहानी रिश्ते का भी उड़ाना तेरा मज़ाक करना जज़्बों के महल को पल में ही राख़, लूटी गई  किसी लुटेरे के हाथ मासूम हीर कहो,   महज़ किसी…

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#Kavita by Dipak Charlei

भी तो लोग पुलिस से बचते हैं”{हास्य व्यंग्य}   हमारे गाँव के पास मिली एक इंसान की लाश, दुर्गंध तो आनी थी लाश को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो चार -पांच दिन पुरानी थी लोग उसके पास से गुजर रहे थे किसी अनहोनी की वजह से डर रहे थे हमने भी डरते,डरते थाने किया फोन तो उधर से कडक आवाज आई हाँ, भई कौन ? बताइए क्या काम है। कैसे याद किया और…

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"#Kavita by Dipak Charlei"

#Kavita by Vinita Badmera

तुम   मैं तो निशदिन तुम्हारे  ही चेहरे को पढ़ना चाहती  हूँ। नहीं सीखना   चाहती    हूँ तुम्हारे अलावा कोई अक्षर।   जानना चाहती हूँ सिर्फ तुम्हारे प्रेम की वर्णमाला उतरना  चाहती  हूँ तो तुम्हारे शब्दों की गहराई में।   समेटना चाहती हूँ  सदैव तुम्हारे ही यादों के पन्नों को, लिखना चाहती हूँ   कविता जो तुमसे शुरु हो और समाप्त भी तुम पर हो।   अपनी कल्पना में रंगना चाहती हूं तुम्हारे ही ख्वाब। और मुस्कुराना…

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#Kavita by Mohan Srivastava

वन स्मृति ** हरित वसन स्मित वन प्रांगण मनभावन मृदु स्मृतियाँ । झरझर झरझर झरते झरने कलकल कल गाती नंदियाँ ।। ** सुंदर सुखद वृक्ष वृंदों में पुष्पों पर मधुपों का डेरा । कोयल  कूहकूह आंदोलित करती फिरती शब्दचितेरा ।। ** रंगबिरंगे खग वृंदों की टोली निकली गगन नापने । मधुपराग में वासंती के पांव चले हैं समय छापने ।। ** नर्म घास में बेसुध लेटे सूरज गोधुलीबेला ताके । अस्ताचल को देख सेंदुरी चंदा…

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#Kavita by Kavi Nilesh

  लोग कहते हैं दुनिया  चलती है ** घुमती दुनिया शायद अब चलने लगी कुछ लड़कीयां मुझे देखकर जलने लगी । पहले लड़कीयां मुंह छुपाए टकटकी लगाए बैठी रहती थी । चेहर पर घूंघट और चुपचाप सुनती रहती थी । अब तो घर में मेरी खैर नहीं है । पत्नी से अब भी मेरी बैर नहीं है । फिर भी अब बदलाव आया । मेरे जैसा पुरुष भी चुपचाप बेलन खाया है। घर घर कि…

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#Kavita by Manoj Soni

दिलासो का सुन्दर चमन होतीं हैं बेटियां, सौगातों की खुशनुमा समन्दर होतीं हैं बेटियां, बड़े ही नसीब वाले होते हैं वे लोग जिनके, घर-आँगन मे जन्म, लेती हैं बेटियां . बेटियां पढेंगी,लिखेगीं, तभी तो हम सबकी किस्मत गढेंगी, बेटियों को सिर्फ प्यार दीजिए, देखना एक दिन, कितना आगे बढेंगी, बेटियां तो LIC की पालिसी हो गंई, जीवन के पहले भी जीवन के बाद  भी सदा दुख हरेंगीं, आज माँ के कई बेटे हैं, हरदिन किसी…

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#Muktak by M.A.Vasant

नहीं मंदिर मैं जाता हूँ, नहीं मस्जिद मैं जाता हूँ। जहाँ सब लोग जाते हैं, नहीं हरगिज मैं जाता हूँ। मुझे मालूम है धरती पे है जन्नत कहाँ भाई मैं अपनी मां के कदमों में सदा सर को झुकाता हूँ। -एम.ए.वसंत

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#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

उठा लेने दो हमें भी पत्थर ————– वो पत्थर से जवानो पर वार करते है बेवजह तकरार करते है   हम अमन चैन की बाते करते वो है की तिरस्कार करते है   मसला हल होगा नहीं शांति और समझौतों से चलो बंदूकों से पत्थरों से हम भी वार करते है   लातों के भुत बातों से नहीं मानते बेवजह ही हम इन्तजार करते है   रोज शहीद होते है हमारे देश के जवान उठा…

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#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

कभी नक्सली कभी आतंकी हमले मे रोज जवान खो रहे है हम और सरकार के पास दो ही बाते है कडी निंदा और ठोस कदम।। बडे से बडे हमले को जांच के नाम सिमटा दिया जाता है जवानो की मौत पे सियासी खैल हर बार वहीं डॉयलॉग “देख लेंगे हम” … संजय अश्क बालाघाटी

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#Kavita by Harprasad Pushpak

कविता मई जून का महीना चिलचिलाती धूप हार नही मानी संघर्ष की ठानी सूर्य देव.दिखा रहे अपना रौद्र रूप थुल-थुल मोटी काली काया बिखरे बाल जीवन वेहाल पसीना ही पसीना कैसा आया यह मई जून का महीना सड़क के किनारे पेड़ के सहारे आधी धूप आधी छाया बेचती पंखे हर आने जाने बाले को निहार रही थी बाबू जी ले लो न! वहुत काम आयेगा गरमी में यही साथ निभायेगा गरमी में सिर्फ हवा यही…

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#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

कैसे हैं ये मौसम, जो सताने चले आते हैं ! फिर से याद उनकी, दिलाने चले आते हैं ! कभी इतराते हैं मोहब्बत के हसीन लम्हें, कभी नफरतों के पल, रुलाने चले आते हैं ! पहले देते हैं लोग ग़मों का ज़हर खुद ही, और बाद इसके, शोक जताने चले आते हैं ! कैसी है ये दुनिया और कैसे हैं लोग इसके, कि दिल जलों के, दिल जलाने चले आते हैं ! अफ़सोस कि न…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"