#Kavita by Vinita Badmera

तुम   मैं तो निशदिन तुम्हारे  ही चेहरे को पढ़ना चाहती  हूँ। नहीं सीखना   चाहती    हूँ तुम्हारे अलावा कोई अक्षर।

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#Kavita by Mohan Srivastava

वन स्मृति ** हरित वसन स्मित वन प्रांगण मनभावन मृदु स्मृतियाँ । झरझर झरझर झरते झरने कलकल कल गाती नंदियाँ

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#Kavita by Manoj Soni

दिलासो का सुन्दर चमन होतीं हैं बेटियां, सौगातों की खुशनुमा समन्दर होतीं हैं बेटियां, बड़े ही नसीब वाले होते हैं

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#Muktak by M.A.Vasant

नहीं मंदिर मैं जाता हूँ, नहीं मस्जिद मैं जाता हूँ। जहाँ सब लोग जाते हैं, नहीं हरगिज मैं जाता हूँ।

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#Kavita by Harprasad Pushpak

कविता मई जून का महीना चिलचिलाती धूप हार नही मानी संघर्ष की ठानी सूर्य देव.दिखा रहे अपना रौद्र रूप थुल-थुल

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