#Kavita by Dr. Sarla Singh

  मेरा भारत कभी दुनिया का नूर था , हर क्षेत्र में ही हर तरह से भरपूर था ।।   धन दौलत की ना कोई कमी थी यहाँ , शानो शौकत तो दुनिया में मशहूर था ।।   जग में विज्ञान  का था ये ज्ञाता प्रबल , फिर भी इसको ना खुद पे कोई गुरुर था।।   धर्म का भी लोहा माने हैं अब तक सभी , पर करता किसी को ना ये मजबूर था…

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"#Kavita by Dr. Sarla Singh"

#Kavita by Reeta Jaihind Arora

हिये  – श्रंगार  रस   –  मात्रा  12.     10.    .12 ** अब जल्दी घर आना मुझ संग  साजन अब तुम प्रीति  निभा जाना   **   सुरज से चमक जाओ आओ प्रीतम अब अँधकार मिटा  जाओ **   ये चाँद निकल आया तुम  जैसा  बिल्कुल है साजन घर आया   **   जीवन साकार हुआ देखा जो साजन रौशन संसारा  हुआ   ** ख्वाबों में रहते थे सपने सच्चे हुए जो हमने   देखे थे   **…

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"#Kavita by Reeta Jaihind Arora"

#Kavita by Manoj Kumar Srivastava

आज का श्रृंगार काॅलेज के प्रोफेसर ने, छात्रा से श्रृंगार रस का उदाहरण पूछा, छात्रा उत्तर दे रही थी- ’’राम को रूपनिहारत जानकी’’ प्रोफेसर ने बीच  में टोकते हुए कहा- ’’पुराना डाॅयलाग मत सुनाओ, हमें कुछ नया चाहिए, छात्रा चुप खड़ी रही’’ प्रोफेसर ने फटकारते हुए कहा- जल्दी सुनाओ नहीं तो, खींच के लगाउंगा बेंत में, छात्रा कह उठी-’’सन्-सनन्-सांय-सांय हो रहा था खेत में’’ सर! आप ही ने कहा था- ’’अपने दिमाग का सारा पट…

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"#Kavita by Manoj Kumar Srivastava"

#Kavita by Rifat Shaheen

एक रोज़ मेरी अपनी बीवी ने ये कहा तुमने मुझे कभी लव लेटर नही लिखा अब जा रही हूँ मैके तब तक न आऊंगी जब तक तेरे लव लेटर का तोहफ़ा न पाऊँगी हैरान हो गया मैं सुन कर के उसकी बात लिख्खू उसे लव लेटर अब ऐसे नही हालात अब तक तो चार बच्चों का मैं हो गया था बाप न थी नई उमंगे न था नया शबाब अब तो मुझे थी फ़िक्र बस…

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"#Kavita by Rifat Shaheen"

#Kavita by Kavi Santosh Kumar Preet

मन की भाषा की होती अनुवाद है। गीत ग़ज़ल कविता सब दिल के नाद है।।   चुन चुन कर के शब्द सुमन से हार बने, सुर की बहती नदियां की फिर धार बने। दिल को छू जाए ऐसी रचनाओ की, जज्बातो की आंधी ही आधार बने।। सागर की लहरों सी उठती रहती है, कवि हृदय तो भाव से आबाद है।   सोये हुए जज्बातो में हलचल कर दे, संगदिल को भी अपना ये कायल कर…

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"#Kavita by Kavi Santosh Kumar Preet"

#Kavita by Chetanya Chetan

  एक सिने तारिका का बॉसों वाली बरेली मे ठुमका लगाते हुए झुमका निकल गया ठुमके की चोट जो करारी पडी दिल पे तो लाखो लाख भक्तजन का जियरा मचल गया झुमके को ढूँढने को हाय तौवा ऐसी मची बुद्धिवाला साफ्टवेयर डिस्क से निकल गया कारखाना था जहॉ पे बॉसोंवाले फर्नीचर का वो ही मानसिक अस्पताल मे बदल गया ।

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"#Kavita by Chetanya Chetan"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

ये रात गुज़र जाए तो चले जाइएगा, न रहे कोई अरमां तो चले जाइएगा ! बहुत बेचैन रहता है ये नादान दिल, मैं समझा बुझा लूँ तो चले जाइएगा ! न जाने कितनी यादें बसी हैं दिल में, उनको मैं भूल जाऊं तो चले जाइएगा ! मुद्दत के बाद तो आये हो तुम दोस्त, ज़रा गुफ़्तगू कर लूँ तो चले जाइएगा ! ये कैसी है तड़प कैसी है हलचल “मिश्र”, ये तूफ़ान गुज़र जाए तो…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"