#Muktak by Annang Pal Singh

रहता है जन अकेला, अहंकार के संग ! जीवन भर चलता अलग लेकर फीके रंग !! लेकर फीके रंग , चले नित समानान्तर. ! अहंकार का बोझ उठाये फिरता बाहर. !! कह ंअनंग ंकरजोरि,जिन्दगी भर दुख सहता ! अहंकार को गला न पाता अकड़ा रहता !! अनंगपाल सिंह ंंअनंग ं ग्वालियर म. पृ.

Share This
"#Muktak by Annang Pal Singh"

#Kavita by Shambhu Nath

आंखो से ओझल होने पर || बहुत अधिक रोती थी माँ || आँचल मे छुपा के सोती थी माँ || ठुमक ठुमुक के  मै चलता था || ताली मइया बजाती थी || छींक मुझे जब आती थी तो  || माँ परेशान हो जाती थी || कभी अगर बिमार मै पड़ता  || बहुत अधिक माँ रोती थी|| आँचल मे छुपा के सोती थी माँ || मेरे लिए जतन खूब करती || प्रयत्न करती जल्दी बढ़ जाऊँ||…

Share This
"#Kavita by Shambhu Nath"

#Gazal by asha shaili

सहर का ख्वाब टूटा देखने को चले आए तमाशा देखने को उन्हेँ खुद पर गुरूरे जुस्तजू था जमाना भी लगा था देखने को सितारे किसके टूटे आसमां से शहर उमड़ा पड़ा था देखने को हमारे दर्द की हद है कहाँ तक दरीचा खुल गया था देखने को अब आगे हो कोई आहो-फुगां क्यों खड़ा सैय्याद चेहरा देखने को छुपी आँखों में कितनी तिश्नगी थी न पैमाना कोई था देखने को कलम की नोक कैसे कुंद…

Share This
"#Gazal by asha shaili"

#Lekh by pankaj prakhar

सफलता की आधारशिला सच्चा पुरुषार्थ मानव ईश्वर की अनमोल कृति है लेकिन मानव का सम्पूर्ण जीवन पुरुषार्थ के इर्द गिर्द ही रचा बसा है गीता जैसे महान ग्रन्थ में भी श्री कृष्ण ने मानव के कर्म और पुरुषार्थ पर बल दिया है रामायण में भी आता है “कर्म प्रधान विश्व रची राखा “ अर्थात बिना पुरुषार्थ के मानव जीवन की कल्पना तक नही की जा सकती इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण भरे पढ़े है जो…

Share This
"#Lekh by pankaj prakhar"

#Gazal by Rishabh Tomar Radhe

मैं इतना अच्छा हुआ कि बुरा हो गया कि आज मैं खुद की ही नजरों से गिर गया मैने इस तरह मोहबत की उस मलिका से कि आज मैं उसकी ही चाहत में गिर गया मैं इस तरह उदास बैठा हूँ अपनी छत पर कि मैं उसकी छत पर कुछ अपना भूल गया मोहबत में नुमाइश की क्या जरूरत है मैं चुपचाप उसकी खताओ को भूल गया  परेशान होकर उनकी गजले में खो गया कि…

Share This
"#Gazal by Rishabh Tomar Radhe"

#Kavita by Kavi Nadeem Khan

मोदीजी के अच्छे दिन याद रहे सन 57 का जमाना भूल गए दिखाते थे आँखे दुश्मन को हम वो आँखे दिखाना भूल गए दम ब दम हिम्मत बढ़ रही है नक्सलियों पत्थरबाजों आतंकियों की सन 47 की तरह हम दुश्मन को जड़ से मिटाना भूल गए नाक में दम करके रखा है हिन्द की उन दहशतगर्दों ने दहशतगर्दी याद रह गयी सारे अच्छा का तराना भूल गए कारगिल जैसी जंग करके उनको मुंहतोड़ जवाब दे…

Share This
"#Kavita by Kavi Nadeem Khan"

#Kavita by Manglesh jaiswal

         *माँ* माँ असीमित है, माँ अविरल है, माँ अद्वितीय है माँ निश्छल है, माँ खुदा है, माँ ईश्वर है, माँ दुआ है , माँ नश्वर है, माँ धरा है, माँ  परमेश्वर हैं, माँ मन्नत है माँ जन्नत है, माँ सुकून है, माँ शांति है, माँ शीतल है, माँ धेर्य है, माँ प्रकृति है, माँ आकृति है, माँ प्रेम है,माँ परिवेश है, माँ अजान है, माँ आरती है, माँ सरोज है ,माँ भारती है, माँ…

Share This
"#Kavita by Manglesh jaiswal"

#Muktak by Piyush Sharma

मुझे ना भूख शौहरत की,ना मंच पाने की चाहत है। मुझे समरसता मिल जाए,मेरी कलम इबादत है। भले यहाँ हिंदू-मुसलमान चाहें कोई रहते हो, मेरी कलम की ताकत ही,मिलकर मेरा भारत है।   कवि पियूष शर्मा नगर उपाध्यश ,बारां शहर

Share This
"#Muktak by Piyush Sharma"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

तूने खुशुबुओं का रिश्ता, बर्बाद कर दिया ! इक हरे भरे से चमन को, उजाड़ कर दिया ! तेरी हर ख़ुशी में लटके थे जो हार बन कर, मुस्कराते उन फूलों को, तूने कबाड़ कर दिया ! जो खुश थे तेरी बुलंदियों को देख कर दोस्त, ख़ुदारा उन्हीं के दिल पर, तूने वार कर दिया ! जिसका सहारा लेकर पहुंचा तू इतना ऊंचा, उसी को धक्का मार कर, तूने बेराह कर दिया ! ये कैसा…

Share This
"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Kavita by Braj Mohan Swami Bairagi

ऐश्वर्या राय का कमरा (1) ————————- चला जाता हूँ/उस सड़क पर जहां लिखा होता है- आगे जाना मना है। मुझे खुद के अंदर घुटन होती है मैं समझता हूँ लूई पास्चर को, जिसने बताया की करोड़ों बैक्टिरिया हमें अंदर ही अंदर खाते हैं पर वो लाभदायक निकलते है इसलिए वो मेरी घुटन के जिम्मेदार नही हैं कुछ और ही है जो मुझे खाता है/चबा-चबा कर। आपको भी खाता होगा कभी शायद नींद में/जागते हुए/ या…

Share This
"#Kavita by Braj Mohan Swami Bairagi"

#Kavita by Jyoti Chouhan

दिल अगर चाहता है तो रुक,, “हसरतें” पूरी कर उसकी कि दिल बार बार नही चाहता।। जीवन की इस धूप छाँव में, परिवर्तन की बहती धारा में, कुछ ऐसा कर जो चाहे दिल कि दिल बार बार नही चाहता। ग़र तू चाहे पंछी बन , उडू नभ में या बनू ईश, बस जायें जो मन में या बन जाउ परी, सँवारे जो जिंदगी। चाहता है दिल….. सागर बन शांत करु तृष्णा या खिल जाऊ मुस्कान…

Share This
"#Kavita by Jyoti Chouhan"

#Kavita by Jeetu musafir

अब कहाँ बनते हैं संगमरमर के ताज़महल , जब से आ गए हैं रंग बिरंगे मारबल । अब तो पहचान जाते हैं उन्हें रिंगटोन से ही , ना चमकती है बिंदिया ना खनकती हैं पायल । ना छाती है घटा ज़ुल्फो की ना नैनो के तीर चलते हैं , जींस लेंगिस और मिनिज देखते ही हो जाते हैं घायल । प्यार की चिठ्ठियां भी अब नही पहुँचती डाकखाने , इंटरनेट और मोबाइल ने दिये है…

Share This
"#Kavita by Jeetu musafir"