#Kavita by Dipak Charlei

कल मेरा अपनी घर वाली से झगड़ा हो गया मामूली नही तगडा हो गया बोली तुम मेरी हर बात को टालते हो एक कान से सुनते हो दूसरे से निकालते हो मैंने कहा! इस मामले में तुम कौन सी कम हो अगर मैं पटाखा हूँ तो तुम बिल्कुल बम हो शुक्र है  भगवान का कि मैं आने वाली वला को टालता हूँ एक कान से सुनता हूँ दूसरे से निकालता हूँ मगर तुम तो रोज…

Share This
"#Kavita by Dipak Charlei"

#Lekh by Pankaj Prakhar

“सफलता की आधारशिला सच्चा पुरुषार्थ   मानव ईश्वर की अनमोल कृति है लेकिन मानव का सम्पूर्ण जीवन पुरुषार्थ के इर्द गिर्द ही रचा बसा है गीता जैसे महान ग्रन्थ में भी श्री कृष्ण ने मानव के कर्म और पुरुषार्थ पर बल दिया है रामायण में भी आता है “कर्म प्रधान विश्व रची राखा “ अर्थात बिना पुरुषार्थ के मानव जीवन की कल्पना तक नही की जा सकती इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण भरे पढ़े है…

Share This
"#Lekh by Pankaj Prakhar"

#Kavita by A K Mishra

फलक के ऊपर भी इक जहां है। उम्मीदों का जमीं पे ही आसमां है।।   जज्बा हो गर साहिल छूने का। तो कस्ती में भी उड़ान यहाँ है।।   मतलबी ज़माना बड़ा शातिर है।। दूसरों के लिए बनता नदां है।   खुश  कौन है ज़मी पे आके ‘कुमार’। खुदा से पूछो वो भी परेशां है।।   अंजनी कुमार मिश्रा

Share This
"#Kavita by A K Mishra"

#Kavita by Chetanya Chetan

मॉ ्््् मुझको परियों के किस्से सुनाती थी मॉ लोरियॉ गाके मुझको सुलाती थी मॉ   आप खुद गीले विस्तर पे लेटी रही सूखे विस्तर पे मुझको लिटाती थी मॉ   लग न जाये कोई वदनजर इसलिए मुझको काजल का टीका लगाती थी मॉ   टॉद पाने की जिद ठान लेता था तव मुझको पानी मे चँदा दिखाती थी मॉ ।   मेरी जन्नत है पाप के कदमे तले यह सबक रोज मुझको पढाती थी …

Share This
"#Kavita by Chetanya Chetan"

#Kavita by Dr. Sudhir Gupta Chakra

आसन   माँ के कंधे पर अपना चेहरा रखकर मिट जाती है मेरी मीलों लम्बी थकान कोई योगाचार्य नहीं समझ सकता कितना सुकुन मिलता है मुझे इस आसन से।   कवि (डॉ०) सुधीर गुप्ता “चक्र”  

Share This
"#Kavita by Dr. Sudhir Gupta Chakra"

#Kavita by Er. Anand Sagar Pandey

**एक गुमनाम सुखनवर**   मुझसे मत पूछ मेरा रूदाद-ए-सफर, ना तो रस्तों का पता है ना ही मंजिल की खबर।     तुझसे उम्मीद करूं क्या ऐ मेरी याद-दहानी, दर्ज कुछ है ही नहीं होश के वरक पे सिफर।     मैं तो नादिम हूँ तवील-ए-उम्र रविश पर तेरी, खिजां में कैसे हरा है ये उसकी यादों का शजर।     मैं तो अब खुद से भी मिलता हूँ मुनाफिक की तरह, है असीर मेरी…

Share This
"#Kavita by Er. Anand Sagar Pandey"

#Kavita by Ajeet Singh Avdan

श्रीगुरु ~~ श्रीगुरू मिलन सुप्रेरणा, हरि-प्रेरित भव जान । तेहिं क्षण साधक साध ले, चितवनि कृपा निधान ।।   डूबत जल अति-लालसा, प्राण-वायु की चाह । ऐसी लगन लगाइए, सुलभ आप गुरु राह ।।   भूचर जलचर गगन चर, वृक्ष पवन अरु तोय । अग्नि जलद पाषाण भज, जहाँ आस्था होय ।   अति दुर्लभ इस लोक में, अखिल-भुवन के सार । सकल जीव-धारी भजें, गुरु पद अपरम्पार ।।   बंधु मातु पितु या सखा,…

Share This
"#Kavita by Ajeet Singh Avdan"

#Kavita by Sumit Bhardwaj

घाटी की स्थिति पर शोक जताते हुए हमारे द्वारा लिखी गयी एक कविता ।     आओ बात बताते हैं, सिंहों जैसे युवाओं की, जिन्होंने नींद उड़ा रखी थी, अंग्रेजी दादाओं की, वो आज़ादी का दीवाना, आज़ाद हिंद कहलाता था, दुश्मन को बातों से नहीं, वो गोली से समझाता था, आज़ाद हिंद के गुट के, सारे युवा हिम्मत वाले थे, गंगा माँ के गौ माता के, देश के चाहने वाले थे, उन वीरों के इर्द-…

Share This
"#Kavita by Sumit Bhardwaj"

#Muktak by Kavi Nilesh

अपने पर हास्य देख लो अब   कवियों कि मीटिंग कल ही हुई यहां थी सारी कि सारी बातें बताई गई थी कवियों ने कहा चलो पाकिस्तान घूमूंगा पागलों कि संख्या अब वहां  बढाउंगा   चाय सुबह-सुबह मिलती है गोरी आंखें खोल देती है । चौके-चौराहा गली-नुक्कड़ पर सांसें बोल देती है जितनी गरम उतनी इठलाती जिह्वा को स्वाद बताती है । सुंदर प्यालों में आकर तू अपनी कहानी सुनाती है कवि निलेश

Share This
"#Muktak by Kavi Nilesh"

#Kavita by Sandeep Saras

माँ  पे  छंद लिखते ही शब्दशून्य हो गया हूँ, पंछी   कोई  जैसे   पर-हीन  हुआ  जाता है।   मनुहार   की   फुहार  कैसे  डालूँ  बार  बार, नेहिल – निषंग   शर – हीन   हुआ  जाता  है।   चरण  पखारूं  किस  भांति  बतलाएं  आप, अभिभूत   तन   कर – हीन  हुआ  जाता  है।   माँ की वन्दना भला  बताएं  कैसे  हो सकेगी, हर्षलब्ध  कण्ठ  स्वर – हीन  हुआ  जाता  है।   संदीप सरस~9450382515

Share This
"#Kavita by Sandeep Saras"

#Kavita by Dr. Abnish Singh Chauhan

केशव मेरे  **   पाना मुझको जितना, जो भी  तुमको पाना    सखा सहज तुम  केशव मेरे  हर पल यह मन तुमको टेरे    लगे अधूरा, जीवन का  तुम बिन हर गाना    मन की सच्ची  अभिलाषा को  दया-क्षमा की  परिभाषा को    जितना, जो कुछ  जाना-माना  तुमको माना   तुमसे जानी  जगत-कहानी  ज्ञान-ध्यान की  महिमा-वाणी    बना मुझे जिज्ञासु  डगर में  छोड़ न जाना

Share This
"#Kavita by Dr. Abnish Singh Chauhan"

#Gazal by V K Anjan

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है   //   ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है  // तू बच्ची को भी हुस्न – ए – बहार कहता है  //   थक  गया है हर शख़्स काम करते करते  // तू इसे अमीरी का बाज़ार कहता है।   गांव  चलो वक्त ही वक्त  है सबके पास  !! तेरी सारी फ़ुर्सत तेरा इतवार कहता है //   मौन  होकर…

Share This
"#Gazal by V K Anjan"

#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

इतना कुछ हो गया फिर भी… कुछ ना हुवा तो जाहिर है ठोस कदम उठाने और कडी निंदा करने मे हम माहिर है। —- वो जवानो के शीश ले गये और ये चैतावनी ही फेक रहे है। माईक के सामने भौकने वालो का तमाशा कई दिनो से देख रहे है।। —— आये दिन वो सीमा पर देखो खूनी खैल सेना संग खेल रहे है। अपने यहां युद्ध करने के बदले नेता मनमानी भाषण पेल रहे…

Share This
"#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati"