#Gazal by Ishaan Sharma Anand

कि खँजर हैं दो, पर मयाँ ऐक ही है। सगे भाईयों का मकाँ ऐक ही है।। . मेरे घर में सब आदमी अजनबी हैं। पता ऐक है, आशियाँ ऐक ही है।। . करो तो ज़रा आरज़ू-ऐ-बुलन्दी। ये किसने कहा , आसमाँ ऐक ही है।। . फक़त वाक़िऐ हैं अलग आशिकों के। करो ग़ौर तो दास्ताँ ऐक ही है।। . जहाँ देख कर घर को लौटा तो जाना। सुकूँ से भरा आस्ताँ ऐक ही है।। .…

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"#Gazal by Ishaan Sharma Anand"

#Gazal by Tejvir Singh Tej

वतन के सिपाहियों को समर्पित ** लहू दान दे सरहदों पे डटे हैं। वतन के सिपाही वतन पे मिटे हैं। किया इश्क़ वर्दी औ जान-ए-चमन से। चढ़ा शीश अपना ख़ुशी से कटे हैं। उदासी न दिल में नहीं खौफ़ कोई। चहे जान जाये मगर ना हटे हैं। हिफ़ाजत सदा कर रहे भारती की। बमों-गोलियों के मुहाने सटे हैं। शरीरों में भर-भर के बारूदी जज़्बे। समरभूमि में ज्यों तिरंगे अटे हैं। शहादत तुम्हारी खुशाली चमन की।…

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"#Gazal by Tejvir Singh Tej"