#Kavita by Saurabh Dubey Sahil

सबका मालिक एक 卐   में तेरे दिल में हूँ , पर तू देखता दूसरों में ।   में तेरे मन में हूँ , पर तू देखता मन्दिरों में ।   में गरीबों की आह में हूँ , पर तू देखता अमीरों में ।   में हर कण कण में हूँ , पर तू देखता मीनारों में ।   में मिट्टी में ही बसा हूँ , पर तूँ देखता हैं हीरों में ।   में…

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"#Kavita by Saurabh Dubey Sahil"

#Kavita by Prerna

“बेटियां तो पहचान होती है”   नन्ही सी प्यारी सी नादान होती है, बेटियां तो माँ बाप की पहचान होती है।   न हो बेटी तो वंश न हो वीरान हो घर, घर में रौनक और उजाला लती हर पहर ।   सर को गर्व से ऊँचा करती है , बेटियां तो माँ बाप की पहचान होती है।   एक रुन्द आहट का आभास  कर लेती है माँ के दर्द को आधा कर देती है।…

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"#Kavita by Prerna"

#Kavita by Akash Khangar

हमारी अधूरी कहानी ………………………. सतरंग खिला था फूल कोई हाँ मुझे मिला था फूल कोई मुझसे पहले माली ले गया मुझसे जो थोड़ी भूल हुई   अब आस नही अब प्यास नही उस जैसा कोई मिले मुझे ऐसी मुझे तलाश नही बस वो पारस लगता था मुझको सब कुछ लगता मैला था   याद मुझे वो लम्हे है जो उसने मैंने बिताये है कुछ टूटे हुए ख्वाव,हम दोनों सीने से अपने लगाये है, मैं मान…

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"#Kavita by Akash Khangar"

#Kavita by Dipak Charlei

एक बार हम लालूजी से मिले होटल ताज में हमने पूछा उनसे उनके ही अन्दाज में लालूजी हम सुना हूँ आप पर बहुत माल है लालूजी बोले -ई बात नही है ना इ सब विपक्षी नेता लोेगन की चाल है हमरे साथ बिहार चलिये हम आज भी बहुत गरीब हूँ हमरी हर चीज की मर्यादा है नूई -दस बच्चा हैं इ , का ज्यादा हैं आज भी हमरी टूटी -फूटी कुटिया हैं बर्तन में दो…

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"#Kavita by Dipak Charlei"

#Gazal by Rifat Shaheen

शाम ए ग़म को शबे बेनूर पे हारा जाये ए सुबह तुझको बहरहाल संवारा जाये क़त्ल करता है हरेक लम्हां मुझे किस्तों में दिन गुज़रता ही नही कैसे गुज़ारा जाये कोई साथी है न मंज़िल है, न रास्ता,न पड़ाव जानिबे इश्क़ भला कैसे बेचारा  जाये मेरी आवाज़ को तासीर ए लैला दे ख़ुदा वो तड़प उठ्ठे अगर उसको पुकारा जाये मुझको माज़ी की मीनारों से पुकारे न कोई ज़र्फ़ की लाश पे क्या कोई दुबारा…

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#Kavita by Dr. Abnish Singh Chauhan

माँ – …….. घर की दुनिया माँ होती है खुशियों की क्रीम परसने को दुःखों का दही बिलोती है   पूरे अनुभव एक तरफ हैं मइया के अनुभव के आगे जब भी उसके पास गए हम लगा अँधेरे में हम जागे   अपने मन की परती भू पर शबनम आशा की बोती है घर की दुनिया माँ होती है   उसके हाथ का रूखा-सूखा- भी हो जाता है काजू-सा कम शब्दों में खुल जाती वह…

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"#Kavita by Dr. Abnish Singh Chauhan"

#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

डिजीटल इंडिया की क्या पहचान भीख मांगते बच्चे,फंदे पर किसान।   हिन्दु-मुस्लिम एकता खूब है देश मे मंदीर -मस्जिद को लेकर घमाशान।   दिन के उजाले मे है जो समाजसेवी भेडिये बन जाते है देख राह सूनसान। आरक्छण का लाभ अमीर ऊठा रहे शासकीय नौकरी पर है पुरा खानदान।   मजदुर आज भी मजदुर ही है समाज मे गरीब को मिलता नही है मान-सम्मान।   झुठे सर आंखो पर बैठे हुये है लोग के सच…

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"#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati"

# Shayari by Rishabh Radhe Tomar

मोहबत में बेबफा जैसा कोई भी किरदार नही होता गर बिछड़ कर भी जारी है तो इससे महान कोई प्यार नही होता अधूरी होकर भी जो मोहबत हमेशा  पूरी रही हो असल में ऐसी मोहबत का कोई जबाब नही होता टूटकर बिखर जाना तो दिल के लिये बहुत अच्छा है बैसे भी कम्बख़त दिल ये कोई काम का नही होता अक्सर लोगो को मेरे  जज्बात मोहबत से ओत प्रोत ही लगते है चलो ठीक है…

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"# Shayari by Rishabh Radhe Tomar"

#Kavita by Shambhu Nath

ज्येष्ठ चरम पर आने वाला है सूर्य आग बरसायेगा || तपन बढ़ेगी तब धरणी पर || अम्बर ताल बजायेगा  || पशु पक्षी व्याकुल हो करके || तब छाया पानी ढूंढेगे || रूखे सूखे पेड़ पौधे भी || त्राहिमाम तब बोलेगे || रहेगा कुछ दिन रूप भयंकर || ज्येष्ठ खूब तपता जायेगा || तपन बढ़ेगी तब धरणी पर || अम्बर ताल बजायेगा  || जीव जंतु लुक छुप के बचेंगे || कुछ जन को बिमारी घेरेगी ||…

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"#Kavita by Shambhu Nath"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

कोई हम अकेले नहीं, परेशान और भी हैं ! अभी तो देखा है क्या, मुकाम और भी हैं ! न समझो कि गुज़र गए फरेबों के दिन, अभी तो ज़िंदगी में, कोहराम और भी हैं ! वो वादे वो इरादे सब झूठ हैं मेरे दोस्त, अभी ठगने के लिए, इंतज़ाम और भी हैं ! कैसे छूट पाएंगे हम इस जिद्दो ज़हद से, अभी हमारे सर पर, इल्ज़ाम और भी हैं ! न सोचो कि बात…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"