#Kavita by Dipak Charlei

पिछले दिनों एक बहुत मोटे नेता ने एक नई पार्टी बनाई क्या हुआ एक दिन हम बताते हैं भाई उन नेताजी का पेट इतना मोटा था कि बोलते समय काफी नीचे-ऊपर होता था एक दिन नेताजी मंच पर खड़े होकर सभा को संबोधित करने लगे मेरी माता मेरी बहनों और भाइयों मेरे देश हिन्दू -मुस्लिम,सिख ,ईसाइयों देश में तो आप देख ही रहे हैं क्या- क्या हो रहा है एेसा कोई सा अखबार जिसमे छपा…

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#Kavita by A K Mishra

जो बीत गया सो बीत गया। देख उसे क्यों पछताता है।।   जो आने वाला इसे सुधार ले। कामयाब ही सबको भाता है।।   जो हार गया सो बात गई। आगे बढ़ने से क्यों घबराता है।।   आगे बढ़ना है तो हार भूलजा। हार से मन डर जाता है।।   सीख हर दुःख से तू-ए-‘कुमार‘। हर दुःख कुछ नया सिखाता है।। अंजनी कुमार मिश्रा

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#Muktak by Mukesh Marwari

एक मुक्तक “सच्चाई”   जिन्हें इन्सान बनना था, वही हैवान बन बैठे | रक्षक थे कभी जो नर, वही भक्षक अब बन बैठे | रिश्तो कि हकिकत अब यहाँ पर खेल हो गयी | जिन्हें भगवान समझा था , वही शेैतान बन बैठे |   ✍ कवि मुकेश मारवाड़ी “नवलपुरी”

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#Muktak by Kavi D M Gupta

एक मुक्तक———–   आरजू जो तेरे दिल में थी, न जान सके हम। तेरी मन की हसरतों को न पहचान सके हम। भूल जाएगी हमे तू, हमे ये तो पता था, फिर भी नही इस दिल को तो संभाल सके हम।। कवि डी एम् गुप्ता “प्रीत”  – मोब नं. 9022580027

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#Kavita by Ram Niwas Kumar

  माँ का सैन्य पुत्र को खत **   अम्मा ने खत लिखा चाव से, पुत्र न मेरा दूध लजाना एक इंच पीछे मत हटना, चाहे आवे आफत जितना ।   सकुशल सब घर पर है बेटे, गांव नगर में मंगल है सियाचिन की इस घटना से, कदम-कदम पर हलचल है ।   इसे केवल खत नहीं लाड़ले, घर भर का संदेश समझ एक-एक अक्षर के पीछे, अपना सारा देश समझ ।   धवल बर्फ…

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"#Kavita by Ram Niwas Kumar"

#Gazal by Amrendra Lavanya Anmol

  हाथ लेकर लौ अँधेरे को जलाकर देखिए लाख गम हो दिल में फिर भी गुनगुनाकर देखिए   जिंदगी हर मोड़ पर कुछ इम्तिहाँ है ले रही सामना कर मुश्किलों को आजमाकर देखिए फिजाँ में खुश्बू मुरझे फूलों से नहीं मिलती बुलंदियाँ कागज के नोटों से नहीं मिलती   लहूलुहाँ कर तलवे घिसते हैं तब मिलते हैं मँजिल सफर में कुछ ही कदमों से नहीं मिलती   आवारगी सोख गई ये आबो हवा ऐसे कि…

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"#Gazal by Amrendra Lavanya Anmol"

#Kavita by Madhu Mugdha

रिश्तों के कैनवास पर दरकती हुयी तश्बीर इस कदर तन्हा कि लगता ही नहीं इन्हीं रिश्तों के दरार पर बैठकर हमने मुकम्मल जिन्दगी को जीया है ….. मधु

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"#Kavita by Madhu Mugdha"

0223 – Sudhir Gupta ‘ Chakra’

Kavita : डॉक्टर का पत्र पत्नी के नाम मेरी प्यारी एन्टीबायोटिक सरला स्वराज सुबह, दोपहर, शाम प्यार की तीन मीठी सी खुराक डरता हूँ इसलिए विनम्र निवेदन करता हूँ मुझ गरीब से तुम क्यों दूर रहती हो इतना स्टेन्डर्ड कम्पनी की महंगी दवाई रहती है मुझसे जितना मैं तुम्हारे प्यार का हार्ट पेसेन्ट हूँ सेन्ट परसेन्ट हूँ ऐसा डॉक्टर ने बतलाया है क्योंकि एक्सरे में तुम्हारा चित्र स्पष्ट नजर आया है तुम्हारी जुदाई मुझे ब्लड…

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#Kavita by KIshor Chhipeshwar Sagar

गुजरा जमाना नहीं है….. —————————— अब तो तुम्हारी चाहत दिल से मिटाना नहीं है तमाम उम्र तुम्हे भुलाना नहीं है दर्द मिल जाये हमको भला पर तुमको कभी तड़पाना नहीं है दामन में सदा रहे खुशियां तुम्हारे तुमको कभी सताना नहीं है दर्द सीने में छुपाकर मुस्कुरा लेंगे दस्ताने गम तुमको सुनाना नहीं है मिलकर तुमसे गुजारा करते थे वक्त अफ़सोस कि वो गुजरा जमाना नहीं है –किशोर छिपेश्वर”सागर” बालाघाट(म.प्र.) 9584317447

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#Kavita by Vivek Prajaati

  एक कुंडलिया का प्रयास-   बजरंगी  हनुमान  हैं भक्तों  के सम्राट। संकट कितना भी प्रबल देते पल में काट।। देते  पल  में काट  सदा  रक्षा  हैं करते। भूत  प्रेत  तो  नाम सुमिरने से ही डरते।। सदा रहो श्री राम मात सीता के संगी। जब जब हो आह्वान प्रकट होना बजरंगी।।   विवेक प्रजापति

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#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

ग़मों का आलम, बदलते भी देर नहीं लगती, खुशियों के रंग, बिगड़ते भी देर नहीं लगती ! भुला दिया जिसको कभी बेकार समझ कर, उसका मुकद्दर, बदलते भी देर नहीं लगती ! जो खाते हैं कसम वफ़ाओं की अच्छे दिनों में, वक़्त-ए-ग़र्दिश में, बदलते भी देर नहीं लगती ! मौसम का क्या भरोसा कब बदल दे मिज़ाज, चाल इन हवाओं की, बदलते देर नहीं लगती ! न बहको “मिश्र” इतना मंज़िल को करीब देख, अंजाम-ए-सफर…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"

#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

रीढ़ रखना, ज़ुर्म की धारा बना है कोर्निश करिये यहाँ तनना मना है चारणों की भीड़ है फिर राजपथ पर नौरत्न चुनने की हुई उद्घोषणा है तीरगी की हुक़ूमत चलने लगी है रोशनी से महल का रिश्ता बना है आज फिर पेशी हुई गैलीलियो की लग रहा है सूर्य को फिर घूमना है जख़्म ही बस हमारी किस्मत में आये फूल या पत्थर कोई जब भी चुना है “दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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"#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan"

#Kavita by Brij Vyas

” मदहोशियाँ छाई हुई हैं ” !! चकाचौंध है , सज़ धज ऐसी ! हम तो क्या , लुट गये परदेसी ! खुद में ही – डूबे डूबे हो ! खामोशियाँ ढाई हुई हैं !! दीवानों सा , चढ़ा खुमार है ! महकी बहकी , ये बहार है ! प्यासे प्यासे – अधर कह रहे ! सरगोशियाँ चाही हुई हैं !! ना सम्मोहन , वशीकरण है ! डूबा डूबा , जाये मन है ! दुनिया…

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"#Kavita by Brij Vyas"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

कबतक जी सकूँगा नाकाम होते होते? कबतक जी सकूँगा गुमनाम होते होते? भटक रहा हूँ तन्हा मंजिल की तलाश में, कबतक जी सकूँगा बदनाम होते होते?

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"#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"