#Kavita by Shabnam Sharma

अलमारी की रद्दी   मन में आया, पुराने कागज़, किताबें फेंक दूँ, अलमारी की कुंडी खोल छाँटने लगी, लग गया तितर-बितर ढेर, कुछ पीले कागज़, कुछ मुड़े-तुड़े और कुछ किताबों से झांकते। झाँक रहा था वो सूखा गुलाब भी काॅलेज की पुरानी डायरी में, हाथ में लिये पुरानी यादों की बिसात, मेरे जन्म दिन पर दिया था तुमने कंपकंपाते हाथों से इक छोटी सी चिट्ठी लिखकर, मुझे भी इसे रखने की जगह न मिल रही…

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#Kavita by Shabnam Sharma

दादा का डंडा **   कोने में रखा वो दादा का डंडा, भगा देता चोरों का डर, घर में घुसते कुत्तों का डर, और ढूंढ लेता मुन्ने की बाॅल, दादा की लुढ़की दवा की शीशी, गिरे हुए कुछ नोट, पाँव से धक्का खाकर गई अन्दर चप्पल। चल देता ये साथ ही जब दादा जाते घर से बाहर, टक-टक की आवाज़ में, संदेश देता जाने का, और कुछ देर बाद घर वापस, आने का, लिवा लाता…

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

घर बैठे कभी फूल, मुस्कराने नहीं आते, बिन ख़ुशी, मोहब्बत के तराने नहीं आते ! नफ़रत को उजड़ा हुआ आशियाँ समझो, जहां पंछी भी कभी, सर छुपाने नहीं आते ! खुश्क आँखें भी कर देती हैं वयां हाले दिल, उनको भी दिल के राज़, छिपाने नहीं आते ! क्यों छोड़ा था सफ़र में यूं अकेला उनको, यारा लौट कर कभी, यार पुराने नहीं आते ! शहर की फ़िज़ाओं से बच कर रहिये दोस्त, आग लगाने…

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#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

  “जय जवान जय किसान” हमेशा सर झुकायें उन जवानों के लिए जो अपना परिवार देश के सभी परिवारों की रक्षा के लिए छोड़ देते हैं जिनकी वज़ह से हम निश्चिंतता से परिवार के लोगों का जन्म दिन मनाते हैं जिनकी वज़ह से हम निश्चिन्त होकर परिवार के साथ छुट्टियों का आनंद उठा सकते हैं इसी के साथ साथ सबसे बड़ी बात जिनकी वज़ह से दुनियाँ में हमारे देश का और हमारा सर गर्व से…

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

कभी कभी मैं खुद से पराया हो जाता हूँ! दर्द की दीवार का एक साया हो जाता हूँ! जब बेखुदी के दौर से घिर जाता हूँ कभी, नाकाम हसरतों का हमसाया हो जाता हूँ!

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#Kavita by Brij Vyas

” मुस्कराया है गगन भी ” !! बन्धनों में , हूँ बंधी सी ! खुशबूओं से , हूँ लदी सी ! अनुबन्ध रंगीले हुए हैं – खिलखिलाया है चमन भी !! ताने बाने , बुन रखे हैं ! प्यारे प्यारे , रंग सजे हैं ! साकार सी अब कल्पनाएं – आ भी जाओ है लगन सी !! प्रश्न बहुतेरे , मुखर हैं ! अपनों से ही , अब तो डर है ! हाथ थामा छोड़ना…

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#Kavita by Balwant Bawala

बावला हो गया हूँ ‘ बावला हो गया हूँ तेरी चाह में अब ये दर्द सहा नही जाता लोग खुलकर कह देते हैं दर्द -ए-दिल के आरजू पर मुझसे कहा नही जाता तेरी कातिल नजरों का सुरूर छा गया है अब तो दिलो दिमाग में नजरों की गुस्ताखी कहूँ या दिल की दिवानगी जो बिना तुझे देखे अब रहा नही जाता * * * * बिंदास जीते हैं लोग फुर्सत के पलों को कोई कहीं…

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#Shayari by Akash Khangar

मेरे कदमो से कदम मिलाने वाले बहुत याद आता है तू रूठ जाने वाले मुझे जिन्दा रखना दिल में तू जा किया तुझे हमने रब के हवाले…आकाश खंगार ** जब कही आ गयी मिट्टी की खुशबू मेरे मन को महका गयी मिट्टी की खुशबू लो तैयारी हो गयी मानसून की,समय से पहले बस इशारो में बता गयी मिट्टी की खुशबू…आकाश खंगार

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#Kavita by Jitendra Kariya ‘ jeetu musafir’

  आज कर लूं ज़रा अपने इश्क़ की आजमाईश, तू कह दे ज़रा हाँ बस इतनी है गुजारिश ।   दिल अपना हाथो में लिए हूँ घूमता , दिल ये मेरा है तेरा दिल हूँ ढूंढता , गुजरा जब भी गलियो से तेरी मै , तब से पता अपना सब से हूँ पूछता ।   लम्हो मे गुजर जाये संग तेरे ये उम्र सारी , सांसो मे तेरी ज़रा बस जाऊ इतनी है ख्वाईश ।…

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#Kavita by Vaishnav Khatri

देश के कर्णधार   देश की शान हो, ऋषियों की सन्तान हो । पहचानो अपनी शक्ति को, इतने क्यों लाचार हो । जानो अपनी शक्ति को, इतने क्यों लाचार हो ।   1-सुख का भंडार हो, शक्ति का आगार हो , देश के कर्णधार हो, पहचानो अपनी शक्ति को इतने क्यों लाचार हो । जानो अपनी शक्ति को, इतने क्यों लाचार हो ।   2-सूर्य के समान हो , मशाल  की  ज्वाल हो, शेर की…

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#Gazal by Peeyush Gupta Gagan

तुझको  मुझमे खुदा दिखाई दे मेरी हर इक वफ़ा दिखाई दे   जो सभी के गमों पे हँसता हो अब वो रोता हुआ दिखाई दे   मुझको मेरा नहीं दिखे कोई हर कोई आपका दिखाई दे   मेरी अब एक ही तमन्ना है जग ये सुख से भरा दिखाई दे   खामियाँ सबकी ढूँढने वाले तुझको तेरी खता दिखाई दे   तेरे दिल तक मुझे पहुँचने का अब कोई रास्ता दिखाई दे   पीयूष गुप्ता

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#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

दोस्ती ——— दोस्ती बिना जिंदगी बेकार है मेरी नजर में दोस्ती सच्चा प्यार है   दोस्त है तो ख़ुशी है दोस्त है तो बहार है दोस्ती के लिए दिलों जान निसार है   एक दूजे के वास्ते मर मिटने तैयार है दोस्ती मानो तो हर सपने साकार है   दोस्ती मुरत है भगवान की दोस्ती संस्कार है दोस्ती नाम है वफा का बड़ा आकर है   दोस्ती बगिया है खुशियों की दोस्तों से बहार है…

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#Kavita by Er. Anand Sagar Pandey

*इक मासूम सी लड़की* जब तन्हाई जिस्म के सारे पोरों में भर जाती है, जब खामोशी आँखों के सूनेपन से चिल्लाती है, जब दिल का अँधेरा सारे मौसम में छा जाता है, और कोई तूफान मेरे जज्बातों से टकराता है, जब हर हसरत बागी होकर दिल खाली कर जाती है, तब इक मासूम सी लड़की मेरी आँखों में भर आती है !!   जब भी जीत की चाहत लेकर मसलों से टकराता हूँ, जब शिकस्त…

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#Kavita by Ram Niwas Kumar

पत्नी को समर्पित मेरी ताजा रचना ** गर तू मेरे साथ न होती, जीकर भी मैं क्या करता ! रुक जाता मैं क हीं गली में, जैसे पथिक है थक जाता !!   तू मेरे दिल की धड़कन हो साँस हवाले करता हूँ ! करके तुमको याद मैं हरदम, खोया-खोया सा रहता हूँ।   भले तुमहारे की चाहत की, सोच हमेशा रखता हूँ ! किसी ने पूछा क्या गिफ्ट किए हो? आज सबकुछ अर्पण मैं…

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#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

~  हास्य व्यंग्य ~   जब चाहा अच्छा जब चाहा खराब कह दिया , हमने पानी भी पकड़ा तो आपने शराब कह दिया, क्या करें गलती हमसे ही हो गयी शादी के समय , जो जानबूझकर बन्द गोभी को गुलाब कह दिया ।   सौरभ दुबे  “साहिल” किशनी मैनपुरी यूपी

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#Gazal by Rifat Shaheen

तुम्हारे साथ गुज़ारी थी एक शब् हमने के उसके बाद नही फिर कोई सहर आई न ज़िन्दगी के उजालों से वास्ता ही पड़ा न ख्वाहिशों के समंदर में फिर लहर आई न सुबह आई मेरे ग़म को थामने के लिये सुकुने वस्ल की न कोई दोपहर आई तुम्हारा इश्क़ है जलते हुए सूरज की तरह हवाएं रहमते तस्कीन न बन कर आई हमपे इलज़ाम भी आया जुनूनों वहशत का हमारे हिस्से में ही रिफ़अत ये…

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#Kavita by M D Juber

कमाल है,,,,,   उगते सूरज को देखकर पता चला कि बहुत ही खूबसूरत है आपकी नगरी वो मोहब्बत की नगरी की रोशनी तो बखूबी कमाल है   ना तिशनगी का शिला,ना गम-ए-वक़्त मिला सुंदर सी बगीचा में इतराती तितली की भी खुशि की मलाल है   रात होते ही नींद नहीं आती न सुकून मिलत है जहन को सुबह होते ही निकल पड़ते है बटोरने तिनके को क्योंकि गुजर-बसर का सवाल है   मैंने भी…

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#Kavita by Gaurav Tripathi

वैसे तो बिटिया माँ बाप की गुड़िया होती है……. उनके घर आंगन की चंचल चिड़िया होती है, पर इक दिन आंगन छोड़ के उड़ जाना होता है, कोई दूजा आंगन फिर उन्हें बसाना होता है, लाडो बिटिया चंदा शोना, इन  लफ्ज़ो को पड़ता खोना, छोड़ बचपना लिखना नया फ़साना  होता है, माँ का आंचल फिर बेगाना होता है, यूँ तो बेटियां माँ बाप की रानी होती है, पर हर इक गुड़िया की यही कहानी होती…

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#Kavita by Ajeet Srivastava

गलत यदि रास्ता मेरा तो आकर तुम बता देना मेरी कमियाँ बताने से तो फिर ये काम अच्छा है अगर तू है सही तो हम भी तेरे साथ चल देंगे हमे मालूम हो पहले तेरा ईमाँन सच्चा है।।   ये पश्चाताप की अगनी अहं को राख करती है प्रभु भी माफ करता है अगर तू दिल से सच्चा है गलत करता है गलती से मगर फिर मान लेता है मुझे लगता यही कि फिर वही…

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"#Kavita by Ajeet Srivastava"

#Kahani by L.R.Seju Thob

लघु कथा चीख़ आज मेरी दूसरी सालगिर थी प्रथम वर्ष तो बहुत अच्छा रहा रवि मुझसे बहुत प्यार करते थे पर पता नहीं क्यों बाद में कुछ बदल गए । बात बात पर झगड़ा करने लगे । मुझे डाँटना पीटना मानो उनकी आदत सी हो गई थी । मै अपने कमरे में बैठी सोच सोचकर हैरान थी की कैसे इस आपसी झगड़े को खत्म कर वापस प्रेम रंग भरे । इतने में वो कमरे के…

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#Kahani by Shabdh Masiha

वन्दे मातरम् ! =========   रेलवे स्टेशन पर एक औरत हाथ में रोटी लिए बैठी थी . उसके परिवार के लोग भी पास ही बैठे थे . तभी उसने देखा कि कुछ सैनिक उसकी तरफ आ रहे हैं . वह तुरंत खड़ी हो गयी और एक सैनिक के सामने खड़ी होकर उस से पूछने लगी –   ‘बेटा ! तू भूखा होगा , ये ले रोटी खा ले . ये जवानों को समय पर रोटी…

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#Kavita by Binod Kumar

विधा:माहिया छंद ** आजा अब तो राजा। बाट निहारूँ मैं, बोलूँ कब से आजा।।   आता जब भी रानी। बात नहीं मानी, कैसे समझे वाणी।।   देखूँ जब भी काया। रूप मुझे भाया, तू हो जग की माया।। बिनोद कुमार”हंसौड़ा”

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#Kavita by Ishq Sharma

बारिश ••• हवाओं में  लिप्त रहती थी, आज कदमो से लिपट गई। बारिश की  बूंदों से पल में, उस की फ़ितरत बदल गई। ताप से हमे तरबतर किया, देखो  कितना  शरमाता है। बादलों में लुक करके सूर्य, मुख अपना यूँ  छिपाता है। हरी भरी ये  धरती सुहानी, मेरे मन को  मोह जाती है। सौंधी सौंधी  खुशबु मिली, जो हृदय में समा जाती है। कीचड़ में खेलता बच्चा ये, बचपन कीयाद दिलाता है। भीग जाता  हूँ …

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"#Kavita by Ishq Sharma"

#Muktak by Kavi Nilesh

राजनीति पर हल्की बूंदाबांदी ** तेरा आकाश मुझको तो खबर सारी ही देता है । हवा कि हल्कि ही झोखों में नाविक नावों को खेता है । बहुत उम्मीद थी तुमसे, बहुत ही रौब था तेरा , मगर पंगु हो तुम भी तो, शहर का चोर भी कहता है ।  –   कवि निलेश

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#Kavita by Nirdosh Kumar

बेटी….   चंद्रमा की छोटी किरण सी और वह चंचल शिशु हिरण सी चमकती नन्हीं बूंद ओस सी कोमल कोमल पवित्र सोंच सी मंद मंद शीतल स्पंदन सी भोर की शुचि मंत्र वंदन सी सागर की अधखुली सीप सी दांतो बीच बेटी•    जीभ सी कवि निर्दोष कुमार

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"#Kavita by Nirdosh Kumar"